बीता हुआ समय वापस नहीं आता पर निबंध | Essay on Elapsed time does not come back in Hindi

बीता हुआ समय वापस नहीं आता पर निबंध | Essay on Elapsed time does not come back in Hindi

गया वक्त फिर हाथ आता नहीं पर निबन्ध | Essay on Missed Opportunity Never Returns Again in Hindi: वैयक्तिक या सामाजिक जीवन में सफलता का रहस्य समय का सदुपयोग है. समय ही धन है, जिसका दुरूपयोग पिछ्तावे के सिवाय कुछ नहीं देता है. अतः जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है कि समय की कद्र करे, यदि ऐसा नहीं करेगे तो जीवन ठहर जाएगा. जबकि जीवन एक प्रवाहमान नदी के समान होना चाहिए, यह जीवन सरिता कभी रुकनी नहीं चाहिए, संत के साथ साथ साथ आगे बढ़ते रहने की प्रबल मानवीय लालसा ही जीवन हैं. आज हम समय के महत्व पर निबंध Essay on Elapsed time does not come back in Hindi जानेगे.बीता हुआ समय वापस नहीं आता पर निबंध | Essay on Elapsed time does not come back in Hindi

बीता हुआ समय वापस नहीं आता पर निबंध | Essay on Elapsed time does not come back in Hindi

यदपि जीवन की निर्बाध गति के मार्ग में अनेक अवरोध भी आते है लेकिन ये अवरोध जीवन रुपी मार्ग को और अधिक दृढ बनाते है, लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अभिप्रेरित करते हैं. जीवन कर्म का पथ है और संघर्ष लम्बी साधना है. यह संघर्ष और कर्म तब तक बना रहता है, जब तक सांस चलती है.

इस संसार में प्रत्येक क्षण कर्म होता रहता है अर्थात जीवन आगे बढ़ता रहता है लेकिन समय के साथ जीवन की गति मेल नहीं खाती, परिणामस्वरूप विकास की प्रक्रिया रूक जाती है और जीवन एवं वास्तविकता में एक लम्बा अंतराल आ जाता है. यह अंतराल व्यक्ति को प्श्चाताप, निराशा एवं असफलता की ओर ले जाता है. इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करने की विद्वानों एवं महापुरुषों ने सलाह दी हैं.

का बरखा जब कृषि सुखाने, समय चूकी पुनि पछताने

बीता हुआ समय कभी नहीं लौटता (Essays: Due in On Time, Never Due Back)

जीवन की सफलता एवं सार्थकता सही दसमी पर किये गये सही कार्यों में निहित है. यह तब ही संभव है जब समय के महत्व की पहचान हो, समय के महत्व को पहचानने का सबसे बेहतर ढंग है, अपने समय का अधिकतम सार्थक उपयोग. क्योंकि खोया हुआ धन, जन, स्वास्थ्य किसी प्रकार लौट आए लेकिन गुजरा हुआ समय कमान से निकला तीर, मुहं से निकले शब्द कभी वापिस नहीं आते है.

इतिहास साक्षी है कि जिसने अपने समय का अधिकतम उपयोग किया है, वह सफलता की चोटी पर पहुच गया है. गांधी, नेपोलियन, अरस्तु, गणितज्ञ रामानुज, वैज्ञानिक मैडम क्युरी आदि ने न जाने कितने ऐसे अनगिनत नाम है, जिनकी गाथाएं दुनियां जानती है.

एक ग्रामीण लोकोक्ति है कि समय का चूका विद्यार्थी, बरसात का चूका किसान और डाल का चूका बन्दर कहीं का नहीं रहता है. इस लोकोक्ति में समय की महत्ता वर्णित है. जो लोग समय का सम्मान करते है, समय भी उनका सम्मान करता है. लेकिन जो लोग समय को नष्ट करते है, समय भी उन्हें एक दिन नष्ट कर देता हैं.

एक मिनट की सावधानी से विजय का सेहरा सिर पर बंधता है और एक मिनट की चूक से पराजय की कलिख हमेशा के लिए लग जाती है. पांच मिनट की कीमत को ठीक से नहीं पहचानने के कारण आस्ट्रियन नेपोलियन से पराजित हो गये और वही अपराजेय नेपोलियन अपने मित्र ग्रुफी के पांच मिनट विलम्ब करने के कारण बंदी बनकर अपमान की मौत मरा.

जो लोग समस्याओं की छाती को चीरते हुए, आलस्य की दीवार को तोड़ते हुए, तेजी से छलांग मारते हुए समय की गाडी पर सवार हो जाते है, वे गन्तव्य तक पहुच ही जाते है, लेकिन जो समय की परवाह नहीं करते है उन्हें लक्ष्य तक पहुचने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और अक्सर वे वांछित सफलता से वंचित रह जाते हैं.

एक बार जो समय बीत जाता है वह कभी वापस नहीं लौटता. समय का कारवाँ गुजर जाने के बाद गुहार मचाने का कोई लाभ नहीं हैं. लाभ तो तब है जब समय के गुजरते कारवाँ के साथ हो लिया जाए. समय को पहचानने का तात्पर्य सिर्फ यांत्रिक समय की गति को ही पहचानने से नहीं है बल्कि अपने युगबोध को भी पहचानने की आवश्यकता है, समय की तत्कालिक आवश्यकता समझने की हैं.

समय की पहचान वास्तव में इसमें ही निहित है. आज देश को एकता और सफल नेतृत्व की आवश्यकता है. देश की तरक्की और सफलता पर टेडी नजर गड़ाए पड़ोसी देश इसकी खुशहाली छिनने के लिए प्रयासरत है. यदि हम स्वार्थवश अपने ही मद में खोए रहे तो भविष्य में पछताने के सिवाय प्राप्त कुछ नहीं होगा. समय को पहचानना इस भाव से भी सम्बन्धित है.

प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा ने लिखा है कि

तू मोती के द्वीप स्वप्न में रहा खोजता
तब तो बहता समय शिला सा जम जाएगा

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