पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध | Essay On Environmental Pollution

Essay On Environmental Pollution:वर्तमान समय में हमारा पर्यावरण प्रदूषण की विकराल समस्यासे जूझ रहा हैं. ज्यो ज्यो मानव प्रोद्योगिकी विकास कर रहा हैं. यह समस्या उतनी ही ज्यादा बढ़ रही हैं. वास्तव में प्रदूषण हैं क्या ? इसके बारे में कहा जा सकता हैं कि वे तत्व जो अपनी अधिकता से वायु, जल, भूमि के भौतिक, रासायनिक अथवा जैव परिलक्षण में अनेपक्षित परिवर्तन करते हैं वे प्रदूषण कहलाते हैं. और अनेपक्षित परिवर्तन ही प्रदूषण हैं.

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध / Essay On Environmental Pollution

यह प्रदूषण, प्रदूषको के अत्यधिक जमाव के कारण होता हैं. ये परिवर्तन हमारे संसाधनो की कच्ची सामग्री तथा पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं या उसका हास्य करते हैं.प्रदूषण का जैविक प्रजातियों सहित मानव पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं. यह हमारे औद्योगिक विधियों, रहन सहन तथा सांस्कृतिक पूंजी को नुकसान पहुचाता हैं, मनुष्य की क्रियाओ द्वारा वायुमंडल में कई परिवर्तन होते हैं.

आज विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ हमारे जीवन में कई वस्तु के उपयोग में अधिकता व्यापक रूप से बढ़ी हैं.कल-कारखानों से निकलने वाला धुआ, वनों की अंधाधुंध कटाई, विषैली गैसे तथा रेडियों धर्मी गैसों से पर्यावरण प्रदूषण होता हैं. मनुष्य ने अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए पहाड़ो, वनों तथा नदी नालों का अंधाधुंध उपयोग किया हैं. जिससे हमारे आस-पास की वायु, जल आदि प्रदूषित हो गईं हैं. जिससे हमारे जीवन की कठिनाइयाँ बढ़ गईं हैं. आज मनुष्य ही नही बल्कि इस प्रदूषित जल, वायु तथा वातावरण का दुष्परिणाम प्राणिमात्र ( जिनमें पशु-पक्षी भी शामिल हैं) पर भी पड़ रहा हैं.मुख्यत पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव प्रकृति के जिन तत्वों पर पड़ता हैं वे हैं- जल वायु तथा ध्वनि. इन्ही के आधार पर पर्यावरण प्रदूषण को जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण आदि क्षेत्रो में बाटा गया हैं.

उघोग से निकलने वाले गन्दे अपशिष्ट तथा विषैलें कचरे को शहरों कस्बो के पास बहने वाली नदियों में बहाना सबसे ज्यादा घातक हैं, जिससे पानी के शुद्ध के प्राकृतिक स्त्रोत प्रदूषित हो गया हैं.वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारा वर्षा चक्र प्रभावित हो गया हैं तथा वर्षा की कमी के कारण भूगर्भ के जल स्तर से तेजी से गिरावट हो गईं हैं. जो पानी नलकूपों आदि से 400-500 फुट की गहराई से लिया जा रहा हैं, वह न मनुष्यों के लिए उपयोगी रहा और ना ही कृषि के लिए. फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा ने पानी को और अधिक प्रदूषित कर दिया हैं.

वायु मंडल में ध्वनि तरंगो का अधिक शोर, शादी विवाह के अवसरों पर बजने वाले लाउडस्पीकरो, भौपुओ, कारखानों तथा बड़ी मशीनों से निकलने वाली ध्वनि तरंग मनुष्य में चिडचिडापन बहरापन तथा स्वभाव में उतेजना पनपाने का काम कर रही हैं जिससे लोगों में रक्तचाप, मधुमेह, मानसिक तनाव जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं.

इसलिए पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से बचने के लिए पहला कार्य तो हमे यह करना चाहिए कि हम इस समस्या को ठीक से पहचाने. साथ ही प्रदूषण के मुख्य कारकों व कारणों को चिन्हित करे. जिससे उनका सीधा समाधान निकाला जा सके. वनों की कटाई रोकने के साथ ही आस-पास नये पेड़-पौधे लगाकर तथा हरियाली को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना सकते हैं. कल-कारखानों के अपशिष्ट तथा कचरे का अन्यत्र प्रबंध किया जाना चाहिए जिससे नदियों का जल प्रदूषित ना हो.

मित्रों पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध का ये लेख आपकों कैसा लगा, हमारे लिए Essay On Environmental Pollution,essay about environment इस लेख के बारे में कोई सुझाव या सलाह के लिए हमे आपके कमेंट का इन्तजार रहेगा. आप भी अपनी रचित कोई कविता, लेख, निबंध, कहानी अथवा कोई अन्य सामग्री आप इस वेबसाईट के द्वारा अधिक लोगों तक पहुचाना चाहते हैं. तो आपका स्वागत हैं. आप हमे अपने लेख merisamgari@gmail.com पर इमेल कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *