पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध | Pollution Essay In Hindi

Pollution Essay In Hindiवर्तमान समय में हमारा पर्यावरण प्रदूषण की विकराल समस्यासे जूझ रहा हैं. ज्यो ज्यो मानव प्रोद्योगिकी विकास कर रहा हैं. यह समस्या उतनी ही ज्यादा बढ़ रही हैं. वास्तव में प्रदूषण हैं क्या ? इसके बारे में कहा जा सकता हैं कि वे तत्व जो अपनी अधिकता से वायु, जल, भूमि के भौतिक, रासायनिक अथवा जैव परिलक्षण में अनेपक्षित परिवर्तन करते हैं वे प्रदूषण कहलाते हैं. और अनेपक्षित परिवर्तन ही प्रदूषण हैं. Pollution Essay/ प्रदूषण पर निबंध

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Essay On Pollution Essay On Pollution · Nibandh In Hindi hindi wikipedia, general essay on environmental pollution (information in Hindi), environmental pollution essay in hindi language pdf, causes: यह प्रदूषण, प्रदूषको के अत्यधिक जमाव के कारण होता हैं. ये परिवर्तन हमारे संसाधनो की कच्ची सामग्री तथा पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं या उसका हास्य करते हैं.प्रदूषण का जैविक प्रजातियों सहित मानव पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं. यह हमारे औद्योगिक विधियों, रहन सहन तथा सांस्कृतिक पूंजी को नुकसान पहुचाता हैं, मनुष्य की क्रियाओ द्वारा वायुमंडल में कई परिवर्तन होते हैं.

आज विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ हमारे जीवन में कई वस्तु के उपयोग में अधिकता व्यापक रूप से बढ़ी हैं.कल-कारखानों से निकलने वाला धुआ, वनों की अंधाधुंध कटाई, विषैली गैसे तथा रेडियों धर्मी गैसों से पर्यावरण प्रदूषण होता हैं. मनुष्य ने अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए पहाड़ो, वनों तथा नदी नालों का अंधाधुंध उपयोग किया हैं. जिससे हमारे आस-पास की वायु, जल आदि प्रदूषित हो गईं हैं. जिससे हमारे जीवन की कठिनाइयाँ बढ़ गईं हैं. आज मनुष्य ही नही बल्कि इस प्रदूषित जल, वायु तथा वातावरण का दुष्परिणाम प्राणिमात्र ( जिनमें पशु-पक्षी भी शामिल हैं) पर भी पड़ रहा हैं.मुख्यत पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव प्रकृति के जिन तत्वों पर पड़ता हैं वे हैं- जल वायु तथा ध्वनि. इन्ही के आधार पर पर्यावरण प्रदूषण को जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण आदि क्षेत्रो में बाटा गया हैं.

उघोग से निकलने वाले गन्दे अपशिष्ट तथा विषैलें कचरे को शहरों कस्बो के पास बहने वाली नदियों में बहाना सबसे ज्यादा घातक हैं, जिससे पानी के शुद्ध के प्राकृतिक स्त्रोत प्रदूषित हो गया हैं.वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारा वर्षा चक्र प्रभावित हो गया हैं तथा वर्षा की कमी के कारण भूगर्भ के जल स्तर से तेजी से गिरावट हो गईं हैं. जो पानी नलकूपों आदि से 400-500 फुट की गहराई से लिया जा रहा हैं, वह न मनुष्यों के लिए उपयोगी रहा और ना ही कृषि के लिए. फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा ने पानी को और अधिक प्रदूषित कर दिया हैं.

वायु मंडल में ध्वनि तरंगो का अधिक शोर, शादी विवाह के अवसरों पर बजने वाले लाउडस्पीकरो, भौपुओ, कारखानों तथा बड़ी मशीनों से निकलने वाली ध्वनि तरंग मनुष्य में चिडचिडापन बहरापन तथा स्वभाव में उतेजना पनपाने का काम कर रही हैं जिससे लोगों में रक्तचाप, मधुमेह, मानसिक तनाव जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं.

इसलिए पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से बचने के लिए पहला कार्य तो हमे यह करना चाहिए कि हम इस समस्या को ठीक से पहचाने. साथ ही प्रदूषण के मुख्य कारकों व कारणों को चिन्हित करे. जिससे उनका सीधा समाधान निकाला जा सके. वनों की कटाई रोकने के साथ ही आस-पास नये पेड़-पौधे लगाकर तथा हरियाली को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना सकते हैं. कल-कारखानों के अपशिष्ट तथा कचरे का अन्यत्र प्रबंध किया जाना चाहिए जिससे नदियों का जल प्रदूषित ना हो.

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pollution in hindi wikipedia, Pollution Essay in Hindi / Essay on Pollution in Hindi language: भूमि, जल, वायु, आकाश, वृक्ष, नदी, पर्वत यही सब मिलकर बनाते हैं- पर्यावरण. इन्ही के बिच मनुष्य आदिकाल से रहता चला आ रहा हैं. पर्यावरण मनुष्य को प्रकृति का अमूल्य वरदान हैं. लेकिन वैज्ञानिक प्रगति के मंद में मत मानव ने प्रकृति को अपनी दासी बनाने के अभियान में अपार हानि पहुचाई हैं.

प्रदूषण क्या हैं- दूषण का अर्थ दोषयुक्त होना हैं. प्र उपसर्ग लगने से दूषण की अत्याधिकता व्यक्त होती हैं. आजकल प्रदूषण शब्द का प्रयोग एक विशेष अर्थ में लिया जा रहा हैं. पर्यावरण के किसी अंग को, किसी भी प्रकार से मलिन या दूषित बनाना ही प्रदूषण हैं.

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

जल प्रदूषण- जल मानव जीवन के लिए परम आवश्यक हैं. जल के परम्परागत स्रोत हैं कुआँ, तालाब, नदी तथा वर्षा का जल. प्रदूषण ने इन सभी स्रोतों को दूषित कर दिया हैं. औद्योगिक प्रगति के कारण उत्पन्न हानिकारक कचरा और रसायन इन जल स्रोतों को दूषित कर रहे हैं.

वायु प्रदूषण- आज शुद्ध वायु मिलना कठिन हो गया हैं. वाहनों, कारखानों और सड़ते हुए औद्योगिक कचरे ने वायु में जहर भर दिया हैं. घातक गैसों के रिसाव भी यदा कदा प्रलय मचाते रहते हैं.

खाद्य प्रदूषण- प्रदूषित जल और वायु के बीच पनपने वाली वनस्पति या उसका सेवन करने वाले पशु पक्षी भी आज प्रदूषित हो रहे हैं. चाहे शाकाहारी हो या मासाहारी, कोई भी भोजन प्रदूषण से नही बच सकता.

ध्वनि प्रदूषण– आज मनुष्य को ध्वनि के प्रदूषण को भी भोगना पड़ रहा हैं. आकाश में वायुयानों की कानफोड़ ध्वनियाँ, धरती पर वाहनों यंत्रों और ध्वनिविस्तारकों का शोर, सब मिलकर मनुष्य को बहरा बना देने पर तुले हैं.

प्रदूषण रोकने के उपाय– प्रदूषण रोकने के लिए प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योगों को बस्तियों से सुरक्षित दूरी पर स्थापित और स्थानांतरित किया जाना चाहिए. उद्योगों से निकलने वाले कचरे और दूषित जल को निष्क्रिय करने के उपरांत ही विसर्जित करने के कठोर आदेश होने चाहिए. वायु को प्रदूषित करने वाले वाहनों पर भी नियंत्रण आवश्यक हैं. आजकल हमारी सरकार औद्योगिक कचरे से बायो ऊर्जा बनाकर इसके निस्तारण को प्रबल कर रही हैं.

ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति तभी मिलेगी जब वाहनों का अंधाधुंध प्रयोग रोका जाए. हवाई अड्डे बस्तियों से दूर बने. रेडियो टेप रिकॉर्डर तथा लाउडस्पीकरों को मंद ध्वनि से बजाया जाए.

उपसंहार- यदि प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नही किया गया तो आदमी अशुद्ध जल वायु भोजन और शांत वातावरण के लिए तरस जाएगा. प्रशासन और जनता दोनों के गंभीर प्रयासों से ही प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती हैं.

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