पर्यावरण अध्ययन पर निबंध Essay on Environmental Studies in hindi

पर्यावरण अध्ययन पर निबंध Essay on Environmental Studies in hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम पर्यावरण अध्ययन पर निबंध बता रहे हैं. हमारा जीवन और पर्यावरण एक दूसरे से गहन अंतर्निहित हैं. दोनों एक दूसरे के पूरक भी हैं. आज के निबंध, स्पीच, भाषण, अनुच्छेद, लेख, आर्टिकल पैराग्राफ में हम जानेगे कि पर्यावरण (एनवायरमेंट) क्या है अर्थ परिभाषा महत्व आवश्यकता और अध्ययन के उद्देश्य समझेगे.

Essay on Environmental Studies in Hindi

Essay on Environmental Studies in hindi

पर्यावरण का अर्थ है वे परिस्थितियाँ जिसमें कोई व्यक्ति या वस्तु रहती है या विकसित होती हैं. अतः पर्यावरण उन सब प्रभावों का योग है जो जीवन और चरित्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं. पर्यावरण शब्द परि और आवरण से मिलकर बना हैं.

परि का अर्थ चारों ओर और आवरण का अर्थ होता है घेरा. अर्थात पर्यावरण का अर्थ हमें चारों ओर से घेरने वाला वातावरण होता हैं इस प्रकार हमारे चारो ओर के जिस वातावरण में हम व अन्य जन्तु व पेड़ पौधे आदि जीवित रहते हैं. पर्यावरण कहलाता हैं. प्रकृति की समस्त जैविक और अजैविक परिस्थितियाँ जो समस्त जीवों के चारो ओर उपस्थित रहती हैं का योग ही पर्यावरण हैं.

न्यू वेबस्टर्स डिक्शनरी ऑफ़ इंग्लिश लेंग्वेज अनुसार all the physical, social and cultural factors and condition s influencing the existence or development of  organism or assemblage of aeegaisms is environment.

द युनिवर्सल एन्साइक्लोपीडिया के अनुसार पर्यावरण उन सभी दशाओं, प्रणालियों और प्रभावों का योग हैं जो जीवों व उनकी प्रजातियों के विकास, जीवन व मृत्यु को प्रभावित करती हैं. इस प्रकार स्पष्ट है कि पर्यावरण में निम्न शामिल किये जा सकते हैं.

प्राकृतिक पर्यावरण अर्थ क्या है परिभाषा (what the natural environment meaning Definition in hindi)

यह एक व्यापक संकल्पना है यों तो यह संकल्पना है यों तो यह संकल्पना सारे ब्रह्मांड की द्योतक हैं, परन्तु सामान्यतः यह केवल पृथ्वी ग्रह तक ही सिमित है और मूलतया पृथ्वी के उन भागों से सम्बन्धित है, जो इस समय या निकट भविष्य में मानव के विविध क्रियाकलापों से प्रभावित है या होंगे.

सभी जैविक व अजैविक घटक दोनों मिलकर प्राकृतिक पर्यावरण का निर्माण करते है. पेड़ पौधों, जीव जन्तु व मनुष्य पर्यावरण के जैविक घटक तथा प्रकाश, वायु, जल, मृदा आदि निर्जीव पदार्थ पर्यावरण के अजैविक घटक हैं. इस प्रकार प्राकृतिक पर्यावरण के चार आधारभूत घटक या अंग हैं.

  • स्थलमंडल– यह पृथ्वी की ठोस भूपर्पटी
  • जलमंडल– यह पृथ्वी की सतह के विविध जलीय भागों का सम्मिलित रूप हैं.
  • वायुमंडल– यह गैसों, जलवाष्प और धूल की वह राशि है जो पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए है.
  • जीवमंडल– यह जीवित प्राणियों का मंडल है, जो स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल में व्याप्त. पर्यावरण के चारों तत्व परस्पर संबंधित है और एक दूसरे पर अवलम्बित हैं. पर्यावरण इन चारों तत्वों की समग्रता का नाम हैं.

सामाजिक पर्यावरण (social environment definition in hindi)

मनुष्य ने अपनी योग्यता के बल पर पर्यावरण में अभूतपूर्व परिवर्तन किया हैं. उसने सड़कों, पुलों, इमारतों आदि का निर्माण किया हैं. इसे सामाजिक या मनुष्य निर्मित पर्यावरण के नाम से जाना जाता हैं. इस प्रकार सामाजिक पर्यावरण का अर्थ है पर्यावरण में मनुष्य द्वारा लाया गया परिवर्तन.

पर्यावरण अध्ययन की संकल्पना (Concept of Environmental Studies in hindi)

पर्यावरण अध्ययन का शाब्दिक अर्थ है, वह अध्ययन जो पर्यावरण की समझ प्रदान करें. अतः पर्यावरण अध्ययन से तात्पर्य वह अध्ययन है जो हमें अपने पर्यावरण के संरक्षण, संवर्द्धन और सुधार की समझ देता हैं. यह अध्ययन मनुष्य और प्रकृति के बीच सह सबंधों की व्याख्या करता हैं. मनुष्य प्रकृति से सीखे, प्रकृति के अनुसार अपने आपकों ढाल सके और प्रकृति को दूषित करने से बाज आए, यही संचेतना उसे पर्यावरण अध्ययन से मिलती हैं.

पर्यावरण अध्ययन का सम्बन्ध हर उस प्रश्न से है जो एक जीवित काया को प्रभावित करता है. यह मूलतः एक बहुशास्त्रीय दृष्टिकोण है जो हमारे प्राकृतिक जगत और मानव पर उसके प्रभाव को समग्रता में समझना सिखाता है. यह एक व्यावहारिक विज्ञान है क्योंकि इसका उद्देश्य अधिकाधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे इस प्रश्न का उत्तर देना है कि पृथ्वी के सिमित संसाधनों के बल पर मानव सभ्यता को कैसे जारी रखा जाए.

पर्यावरण से जुड़ी हुई जो भी मूल अवधारणाए और समस्याएं हैं, यह अध्ययन न केवल उनकी पहचान कराता है बल्कि ऐसे दृष्टिकोणों और कौशल का भी विकास करता हैं जो हमें अपनी परिस्थितियों से सही तालमेल बिठाने की समझ दे . पर्यावरण की विषम समस्या न हो तो मनुष्य को स्वस्थ रहने देती है और न ही सुखी. उसे अपना भविष्य धुंधला लगने लगा हैं. प्रकृति ने तो मनुष्य को अनेक बहुमूल्य संसाधन दिए, लेकिन अब वह उनके अवमूल्यन का दंड भोग रहा हैं. पर्यावरण अध्ययन उसे अपनी गलतियों का बोध कराता हैं.

प्रकृति पर हमारी निर्भरता इतनी अधिक है कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा किये बिना हम जीवित नहीं रह सकते, इसलिए अधिकांश संस्कृतियाँ पर्यावरण को माँ प्रकृति कहती है और अधिकांश परम्परागत समाज जानते है कि प्रकृति का सम्मान उनकी अपनी जीविका की रक्षा के लिए कितना आवश्यक हैं. अतः पर्यावरण अध्ययन हमरं प्रकृति का सम्मान करना सिखाता हैं और भविष्य में सावधान रहने के लिए तैयार करता हैं.

स्वान के अनुसार पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा यह है कि ऐसी सदनागरिकता का विकास किया जाए, जो पर्यावरण एवं उससे जुड़ी हुई समस्याओं से परिचित हो. इन समस्याओं के समाधान के लिए अपनी भागीदारी के अवसरों की जानकारी रखती हो तथा इसके लिए आत्म प्रेरित भी हो. दूसरे शब्दों में पर्यावरण की गुणवत्ता के प्रति चिंता के सुविज्ञ दृष्टिकोण का विकास करना ही पर्यावरण अध्ययन हैं.

ए बी सक्सेना के अनुसार पर्यावरण अध्ययन वह प्रक्रिया है जो पर्यावरण के बारे में हमें संचेतना, ज्ञान और समझ देती है इसके बारे में अनुकूल दृष्टिकोण का विकास करती हैं और इसके संरक्षण तथा सुधार की दिशा में हमें प्रतिबद्ध करती हैं. चैपमेन टेलर ने इसे इस प्रकार परिभाषित किया है, पर्यावरण अध्ययन सदनागरिकता का विकास करता है इससे अध्येता में पर्यावरण के संबंध में जानकारी प्रेरणा और उत्तरदायित्व के भाव आते हैं.

चैबर्स डिक्शनरी के अनुसार पारिस्थितिकी एक ऐसा अध्ययन क्षेत्र है जिसमें जीव जन्तुओं, पेड़ पौधों तथा मनुष्य समुदायों के अपने वातावरण के साथ अंतर्संबंधों को व्याख्यायित किया जाता हैं. पर्यावरण के साथ जीवधारियों का जो भी आदान प्रदान होता हैं. जो भी अन्तः क्रियाएं होती है तथा अंतर्संबंध बनते है, उनका वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन करना ही पर्यावरण अध्ययन हैं.

उपरोक्त अध्ययन से स्पष्ट है कि पर्यावरण अध्ययन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हमें पर्यावरण के प्रति सचेत रहने के लिए तैयार किया जाता हैं. जीव विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, रसायनशास्त्र, भौतिकी, अभियांत्रिकी समाजशास्त्र, स्वास्थ्य, मानवाशास्त्र सांख्यकी, कंप्यूटर और दर्शनशास्त्र, पर्यावरण के विभिन्न घटक हैं. पर्यावरण अध्ययन निम्न कारणों से आवश्यक हैं.

  • ऐसी सूचनाओं की आवश्यकता है जो पर्यावरण संबंधी आधुनिक धारणाओं को स्पष्ट करे जैसे जैवविविधता के संरक्षण की आवश्यकता, अधिक निर्वहनीय जीवनशैलियों की आवश्यकता और संसाधनों के समतामूलक उपयोग की आवश्यकता.
  • हम अपने पर्यावरण को जिस दृष्टिकोण से देखते है उसमें भी परिवर्तन लाने की आवश्यकता हैं. जो अवलोकन और आत्म शिक्षा पर आधारित हो और अधिक व्यावहारिक हो.
  • अपने पर्यावरण के प्रति ऐसी चेतना जागृत करने की आवश्यकता है जो पर्यावरणमुखी इकाइयों को जन्म दे. इसमें ऐसे आसान क्रियाकलाप भी शामिल है जो हम पर्यावरण की रक्षा के लिए अपने दैनिक जीवन में कर सकते हैं. अतः पर्यावरण अध्ययन एक साथ तीन काम करता हैं,
  • पर्यावरण के प्रति संचेतना बढाना
  • उसके बारे में सही समझ का विकास करना तथा
  • मनुष्य और शेष जगत के बीच अंतर्संबंधों को इस तरह व्याख्यायित करना ताकि जीव जगत एक सही संतुलन बनाकर साथ साथ रह सके. साथ ही पर्यावरण उसमें यह भी समझ देता है कि पर्यावरण की रक्षा कैसे की जाए, संसाधनों का सही उपयोग कैसे हो और प्रदूषित वातावरण को कैसे सुधारा जाएं. मौटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि मनुष्य पर्यावरण के बारे में सब कुछ जाने पर्यावरण से सीखे और पर्यावरण के सुधारे के लिए काम करें, यही पर्यावरण अध्ययन का अभीष्ट हैं.

पर्यावरण अध्ययन के उद्देश्य (Scope and Objectives of Environmental Studies in hindi)

पर्यावरण अध्ययन बच्चे की एक बुनियादी आवश्यकता हैं. सुप्रसिद्ध शिक्षाविद ड्यूवी की मान्यता है कि बच्चा अपने पर्यावरण के साथ अन्तः क्रिया के माध्यम से ही कुछ सीखता है, उसके सम्पर्क में आने से पहले ही उसमें समझ के सही संस्कार पड़ते है और यह बात केवल प्रकृति के बारे में ही नहीं समाज के बारे में भी सत्य हैं. पर्यावरण अध्ययन के माध्यम से बालकों का अनुभव क्षितिज बढ़ता है तथा निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति होती हैं.

  • मनुष्य और प्रकृति के मध्य सीधे और आत्मीय संवाद की स्थिति बनाना.
  • मनुष्य के लालच ने प्रकृति के साम्राज्य का जो भयानक विनाश किया है, उसकी तीव्रता और गहराई की समझ पैदा करना.
  • विकास और पर्यावरण के बीच समीकरण बनाना जो विनाश से बचा सके.
  • वास्तविक जीवन की पर्यावरणीय समस्याओं को सुलझाने में भागीदारी करने की दृष्टि, कौशल और योग्यता का विकास करना, ऐसी समस्याओं का संज्ञान और उसकी जानकारी अर्जित करने में सहयोग देना.
  • पर्यावरण के अभिन्न अंग होने की भावना का बच्चों में विकास करना. प्रकृति के प्रति सहकार की यह भावना उन्हें सही दिशा में आगे बढाएगी. फिर न तो प्रदूषण होगा और न ही प्रकृति का शोषण हो पाएगा.

इस प्रकार पर्यावरण अध्ययन का उद्देश्य व्यक्ति को पर्यावरण का ज्ञान देने के साथ ही ऐसी कुशलताओं को विकसित करना है जिससे वह पर्यावरण की समस्याओं को समझकर उन्हें दूर करने में सफल हो सके. एच टी हेवावसान ने पर्यावरण अध्ययन के मुख्य उद्देश्य पर बल देते हुए कहा कि पर्यावरण अध्ह्यं के बारें में जानकारी कर अपने कौशल से उसकी समस्याओं को समझने हल निकालने और मिटाने अथवा दूर करने का अध्ययन और वे सभी निष्पादन इस प्रकार किये जाते है कि उसकी पुनरावृत्ति न हो.

पर्यावरण अध्ययन का क्षेत्र (Field of environmental studies in hindi)

पर्यावरण अध्ययन एक विस्तृत एवं बहुआयामी विषय हैं. पर्यावरण अध्ययन का जीवन से सीधा सम्बन्ध हैं. जीवन में अनेक धाराओं, घटनाओं, कृतियों और अंतरसम्बन्धों का समागम होता हैं. ठीक इसी तरह पर्यावरण अध्ह्यं भी अनेक विषय क्षेत्रों का एक संगम हैं. यह भी जीवन की तरह व्यापक और अनंत हैं. इसकी विषयवस्तु का विस्तार अनेक क्षेत्रों में देखा जा सकता हैं.

भौतिक, सामाजिक, मानवीय, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक. यह भी कहा जा सकता है कि पर्यावरण अपने आप में एक विधा है जिसमें अनेक वर्तमान विषयों के आधारभूत सिद्धांत और कौशल समा जाते हैं. विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, गणित, भाषा, कला, व्यवसाय आदि अनेक शाखाएं प्रशाखाएं कहीं न कहीं जाकर पर्यावरण से जुड़ जाती हैं. पर्यावरण अध्ययन के क्षेत्र में मनुष्य की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि सभी प्रकार की गतिविधियों को शामिल किया जाता हैं. क्योंकि पर्यावरण पर सर्वाधिक मानवीय गतिविधियों का प्रभाव पड़ता है और सम्पूर्ण जीव जगत इससे प्रभावित हैं. पर्यावरण अध्ययन की प्रकृति भी बहुमुखी और बहुविषयी हैं अतः पर्यावरण अध्ययन का क्षेत्र अति व्यापक हैं.

पर्यावरण अध्ययन की विषयवस्तु में पर्यावरण और पारिस्थितिकी के विविध घटकों, इनके पारिस्थितिकीय प्रभावों, मानव पर्यावरण सम्बन्धों का अध्ययन सम्मिलित किया जाता हैं. इसके अलावा इसमें पर्यावरणीय अवनयन, प्रदूषण, नगरीकरण, पर्यावरण संकट, पर्यावरण संरक्षण तथा पर्यावरण प्रबंधन का अध्ययन किया जाता हैं. पर्यावरण अध्ययन के विषय क्षेत्र में हम निम्नांकित को सम्मिलित कर सकते हैं.

  • पर्यावरण प्रबंधन का अध्ययन
  • पर्यावरण तथा पारिस्थतिकी का अध्ययन
  • पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी के विभिन्न घटकों का समग्र अध्ययन
  • पर्यावरण अवबोध का विकास करना
  • पर्यावरण और पारिस्थितिकी के घटकों का एक दूसरे के साथ क्रियात्मक संबंधों का अध्ययन
  • पर्यावरण अवकर्षण का विभिन्न क्षेत्रों में स्तर एवं प्रभाव का अध्ययन
  • जनसंख्या, नगरीकरण तथा औद्योगीकरण का पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव का अध्ययन
  • संसाधन संरक्षण एवं पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में मानव व समाज की भूमिका का अध्ययन
  • विकास की गतिविधियों जैसे बाँध बनाना, सड़के बनाना आदि का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन.
  • वर्तमान प्राकृतिक पारिस्थितिकीय तंत्रों का व्यापक अध्ययन
  • पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी नियमों का निर्माण करना तथा उसकी व्याख्या करना एवं उचित अनुपालना करवाना.
  • मनुष्य तथा पर्यावरणीय अध्ययन के पारस्परिक तंत्रों का अध्ययन
  • मनुष्य द्वारा अपनाएं जा रहे अनुकूलन व रूपांतरणों का अध्ययन
  • पर्यावरणीय घटकों की क्षेत्रीय भिन्नता तथा उनका पारिस्थितिकी पर प्रभावों का अध्ययन
  • विभिन्न प्रमुख पारिस्थतिकीय तंत्रों में जीवन के विकास के स्वरूप आवास तथा समाज का अध्ययन.
  • मानव की आर्थिक क्रियाएँ जैसे उद्योग धंधों, कृषि कार्य आदि का अध्ययन करना तथा इन सभी का पर्यावरण पर प्रभाव अध्ययन.
  • पर्यावरण प्रदूषण के स्वरूप, कारणों तथा प्रभावों का अध्ययन
  • पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य का अध्ययन
  • प्राकृतिक आपदाओं अकाल सूखा बाढ़ अतिवृष्टि, भूकम्प, ज्वालामुखी, चक्र्वातीय तूफ़ान आदि आपदाओं का अध्ययन.
  • अपनी क्षेत्रीय पर्यावरण समस्याओं का अध्ययन एवं उनके समाधान निराकरण उपायों का अध्ययन.

 समाकलित पर्यावरण अध्ययन Integrated EVS Integrated Environmental Studies hindi

समाकलन शब्द से आशय है पाठ्यचर्या के विभिन्न विषयों से विभिन्न संकल्पनाओं  एक स्थान संयोजित करना. समाकलित अध्ययन वह अध्ययन है जिसमें बच्चे अपने परिवेश के कुछ पक्षों से संबंधित विभिन्न विषयों में ज्ञान की व्यापक रूप से खोज करते हैं. इसका आशय विभिन्न इन्द्रियों के माध्यम से अधिगम को समाकलित करना भी हैं. अर्थात शिक्षार्थी को अपने कानों और अथवा आँखों के माध्यम से ही नहीं अपितु उसकी समस्त इन्द्रियों के माध्यम से अनुभव प्रदान करना. समाकलन शब्द का आशय संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनश्चालक तीनों क्षेत्रों से शिक्षार्थी को अनुभव प्रदान करना भी हैं. समाकलित अधिगम के विकास के लिए शिक्षक में सामान्यतः विविध प्रणालियाँ और प्रविधियां प्रयुक्त करते हैं.

अतः समाकलित पर्यावरण अध्ययन वह अध्ययन है जिसमें पर्यावरण के विभिन्न अंगों को समाहित करते हुए अधिगम अनुभव अर्जित किये जाते हैं. इसमें पर्यावरण के विभिन्न पक्षों को अंतर्संबंधित करते हुए उनका व्यापक अध्ययन किया जाता हैं. पर्यावरण में स्थल, जल, वायु एवं जीवमंडल के अंतसम्बन्धों का अध्ययन किया जाता हैं. जिसमें सम्पूर्ण मानवीय क्रियाओं का निर्धारण होता हैं.

वर्तमान में पर्यावरण अध्ययन एक बहुआयामी विषय है. प्रारम्भ में पर्यावरण का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों में ही किया जाता था. लेकिन पर्यावरण के घटकों के तीव्र गति से दोहन से पर्यावरण की सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाएं रखने के लिए वर्तमान में इसके अध्ययन का क्षेत्र विस्तृत किया गया है ताकि प्राकृतिक विज्ञान के साथ साथ प्राकृतिक उपक्रमों और मानवीय क्रियाकलापों का अध्ययन भी किया जा सके.

पर्यावरण अध्ययन का महत्व (importance of environmental studies in hindi)

हमारी धरती माता ब्राह्मांड का सबसे मूल्यवान उपहार हैं. प्रकृति की रक्षा ही मानव जाति के भविष्य के विकास की कुंजी हैं. प्रकृति की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य और दायित्व हैं. पर्यावरण की समझ का महत्व दिखाई देता हैं. हमारे पर्यावरण के हास का सम्बन्ध विकास की प्रक्रिया से तथा पर्यावरण संतुलन के प्रति जनता के अज्ञान से हैं.

हमारे पर्यावरण का हास का संबंध प्रदूषण, वनों के विनाश, ठोस अपशिष्ट के निबटारे, आर्थिक उत्पादकता के प्रश्नों व राष्ट्रीय और पर्यावरण सुरक्षा के प्रश्नों से हैं. विश्वव्यापी उष्णता का बढ़ता स्तर, ओजोन परत का हास और जैव विविधता की गंभीर क्षति ने भी सभी को पर्यावरण के बढ़ते खतरों के लिए सजग बनाया हैं. सच तो यह है कि विश्व का कोई भी नागरिक पर्यावरण से संबंधित प्रश्नों से उदासीन नहीं रह सकता हैं.

पर्यावरण प्रबंध हमारी स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्र का एक अंग बन चूका हैं. पर्यावरणीय आपदाओं का प्रबंध व सम्भावित आपदाओं की रोकथाम आज तक तत्कालिक आवश्यकता बन चुकी हैं. अतः पर्यावरण अध्ययन का महत्व निर्विवाद हैं. निर्वहनीय विकास की आवश्यकता मानव के भविष्य की कुंजी हैं. पर्यावरण अध्ययन के महत्व को निम्न बिन्दुओं में व्यक्त किया जा सकता हैं.

  • पर्यावरण अध्ययन जीवन में वनों के महत्व को स्पष्ट करता हैं. पर्यावरण अध्ययन के द्वारा ज्ञान प्राप्त करके वन संरक्षण में सक्रिय योगदान देने की प्रवृत्ति विकसित की जा सकती हैं.
  • पर्यावरण अध्ययन में बच्चों में पर्यावरण के बारे में सही समझ  विकसित की जा सकती हैं.
  • इससे पर्यावरण के प्रति जनचेतना जागृत करने में मदद मिलती हैं.
  • बढ़ती जनसंख्या व कम होते वृक्षों के कारण दिनोंदिन प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही हैं. पर्यावरण अध्ययन के द्वारा बालकों में इसके बारे में चेतना पैदा की जाती हैं.
  • इस अध्ययन से प्राणियों व वनस्पतियों के संरक्षण की प्रेरणा मिलेगी और संरक्षण ओर सोच प्रारम्भ होगी.
  • पर्यावरण अध्ययन से बालक तथा जनसामान्य जलवायु, मृदा आदि के संरक्षण के उपाय सीखते हैं.
  • समाज की प्रगति के द्योतक आधुनिक कल कारखानों से उत्पन्न समस्याओं का ज्ञान पर्यावरण अध्ययन द्वारा किया जाता हैं.

1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पर्यावरण अध्ययन का महत्व (Importance of Environmental Studies in 1986 National Education Policy)

पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की बहुत आवश्यकता है और यह जागरूकता बच्चों से लेकर सभी आयु वर्गों व क्षेत्रों में फैलनी चाहिए. पर्यावरण के प्रति जागरूकता विद्यालयों तथा कॉलेज की शिक्षा का अंग होनी चाहिए. इसे शिक्षा की प्रक्रिया में समाहित किया जाएगा.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों पर्यावरण अध्ययन पर निबंध Essay on Environmental Studies in hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा. यदि इसमें दी गई जानकारी आपकों अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तो के साथ जरुर शेयर करें.

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