Essay on Feriwala in Hindi फेरीवाला पर निबंध

Essay on Feriwala in Hindi फेरीवाला पर निबंध: हमने बचपन में फेरीवाला की कहानियां व किस्से सुने हैं यह वो इन्सान होता हैं जो हमारे घर मोहल्ले तथा गाँव शहर की गली में ठेले पर दुकान सजाकर हमारे घर तक सामान पहुचाता हैं. दैनिक आवश्यकता की छोटी बड़ी चीजे जैसे फल, फूल, सब्जी, चाट, पानपुड़ी अथवा घर के उपयोग की सामग्री बेचता हैं आज हम फेरीवाला पर लघु निबंध पढेगे.

Essay on Feriwala in Hindi फेरीवाला पर निबंध

Essay on Feriwala in Hindi फेरीवाला पर निबंध

आमतौर पर देश दुनियां के किसी भी कोने में फेरीवाले मिल जाते हैं. ये बेहद आम लोग होते हैं जो रोजीरोटी के लिए छोटे बड़े गाँव या शहर में फेरी के व्यापार के जरिये अपनी आजीविका चलाते हैं. व्यापार जगत में ये निम्न स्तर के व्यापारी होते हैं जो फुटपाथ के सहारे छोटी दुकान लगाकर या घर घर जाकर सामान बेचते हैं. एक आम नगरवासी के दिल में फेरीवाले के प्रति अच्छी भावना होती हैं.

एक फेरीवाला चार पहिये के ठेले हथगाड़ी या सिर पर टोकरी में सामान लादकर बेचता हैं. वह अपने सामान की बिक्री के लिए हर घर के पास से गुजरता हुआ मधुर आवाज में लोगों को बताता हैं.मिठाइयां, सब्जियां, नमकीन, कपडे, जूते, बर्तन व हरमाल के सामान फेरीवाला बेचता हैं. कुछ लोग कबाड़ी का सामान भी लेते है तो कुछ टूटी फूटी वस्तुओं की मरम्मत का कार्य भी करते हैं.

वृद्ध लोगों, बच्चों एवं कामकाजी महिलाओं द्वारा फेरीवाले का बेसब्री से इन्तजार रहता हैं. क्योंकि वे अपनी जरूरत की छोटी छोटी चीजों के लिए बाजार नहीं जा सकते हैं इसलिए वे उसका इन्तजार करते हैं तथा उसकी आवाज सुनते ही उसके चारो ओर एकत्रित हो जाते है तथा अपनी जरूरत की वस्तुएं खरीद लेते हैं. आमतौर पर ये लोग बाजार से कम दाम में ही वस्तुएं बेचते है तथा इनकी वस्तुओं का मोलभाव भी किया जाता हैं.

फेरीवाले का जीवन बेहद कठिनाई से भरा होता हैं उन्हें अपनी जीविका के निर्वहन के लिए विपरीत हालातों तेज ठंड, गर्मी और बरसात के दिनों में भी फेरी लगानी पड़ती हैं. बेहद छोटे व्यापारी होने के कारण इन्हें लाभ की प्राप्ति भी बहुत कम होती हैं फिर भी ये अपनी मेहनत की कमाई से संतोष कर लेते हैं तथा अपने परिवार का गुजारा करते हैं. दिन की थोड़ी सी कमाई से ही इन्हें अपने घर के खर्चे तथा बच्चों को पढ़ाई उनकी शादी आदि करवानी होती हैं जो कि बेहद जटिल कार्य हैं.

फेरीवाले के कार्य की स्थितियां भी बहुत खराब होती हैं. कई बार उन्हें पुलिसवाले तथा नगर निगम या नगर पालिका के लोग अक्सर उन्हें तंग करते हैं उनसे पैसे वसूल करते हैं. बेहद कम पूंजी के साथ फेरीवाले अपना कारोबार शुरू कर, निरंतर कठिन परिश्रम और लोगों के बीच अच्छी छवि बनाकर अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर लेते हैं.

कई बार फेरीवाले का सामान लम्बे समय तक नहीं बीक पाता हैं इस कारण उसकी वैधता खत्म हो जाती है और वह या खरीदने वाला इस बात पर ध्यान नही देता हैं. खासकर बच्चों के खाने पीने के उत्पादों के साथ इस तरह की समस्याएं कई बार देखी गई हैं. फेरीवालों को इस समस्या से बचने की आवश्यकता हैं वही बरसात के मौसम में लोगों को इन फेरीवालों की दुकानों के चलते चलने में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं. आजकल स्थानीय प्रशासन इस तरह के व्यापारियों को सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थल पर चीजे बेचने के लिए लाइसेंस जारी कर रही हैं.

सुधार के कुछ उपाय

स्थानीय प्रशासन को फेरीवाले तथा ठेलेवालों के सम्बन्ध में कुछ कठोर नियम बनाने तथा उसका कड़ाई से पालना करने की जरूरत हैं तभी उसके माल की गुणवत्ता तथा उसके बिक्री स्थल के आसपास की सफाई को व्यवस्थित किया जा सकता हैं कई बार मिठाई, फल आदि पर भिनभिनाती मक्खियाँ बिमारियों को आमंत्रित करती हैं ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को निरंतर निरीक्षण करते रहने की आवश्यकता हैं.

उपसंहार:

फेरीवाले छोटे व्यापारी होने के साथ साथ समाज सेवक की भूमिका भी निभाते हैं वे वृद्ध, घर की स्त्रियों तथा बच्चों की जरूरत की वस्तुएं उन्हें घर पर पहुचाते हैं इससे उनकी समस्याएं कम हो जाती हैं. कई बार वे वस्तु का अधिक दाम भी लेते हैं फिर भी लोगों की पहली पसंद होते हैं.

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आशा करता हूँ दोस्तों Essay on Feriwala in Hindi का यह निबंध आपको पसंद आया होगा फेरीवाले पर निबंध भाषण कविता जानकारी का यह लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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