भारत में खेलों का भविष्य पर निबंध | Essay On Future Of Sports In India In Hindi

Essay On Future Of Sports In India In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आज हम भारत में खेलों का भविष्य पर निबंध आपकों बताने जा रहे हैं. भारत में खेलों की वर्तमान स्थिति तथा इसके भविष्य की संभावनाओं तथा सुधार की आवश्यकताओं पर Essay On Future Of Sports In India In Hindi हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के विद्यार्थियों के लिए खेलों के वर्तमान और भविष्य पर छोटा बड़ा निबंध 5,10, लाइन 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में यहाँ दिया गया हैं.

भारत में खेलों का भविष्य पर निबंध | Essay On Future Of Sports In India In Hindiभारत में खेलों का भविष्य पर निबंध | Essay On Future Of Sports In India In Hindi

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Best Essay On Future Of Sports In India In Hindi In 500 Words

खेलकूद की लोकप्रियता- आज सारे संसार में खेलकूद की लोकप्रियता बढ़ती जा रही हैं. मनोरंजन के साथ साथ इसमें धन का खेल भी खुलकर हो रहा हैं. व्यवसायी वर्ग खिलाड़ियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर अपने व्यापार को बढ़ा रहे हैं.

खिलाड़ियों को करोड़ों रुपयें विज्ञापन से मिल रहे हैं. कार्पोरेट जगत और सट्टेबाज भी कमाई में पीछे नहीं हैं. युवा वर्ग तो खेलों का दीवाना बना हुआ हैं. अनेक युवक युवतियों ने तो खेलों को ही अपना करियर बना दिया हैं. इस प्रकार खेलों में आज व्यवसायिकता का प्रवेश हो चूका हैं.

भारत में खेलों की स्थिति- भारत में खेल मंत्रालय है, विविध खेलों के संघ और संघठन हैं. फिर भी पिछले दशकों में खेलों की स्थिति चिंताजनक हो रही हैं. किसी समय हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल था लेकिन राजनीति और मनमानी ने इस खेल की दुर्गति कर डाली.

एक क्रिकेट को छोड़ बाकी सभी खेलों में भारत की स्थिति शोचनीय रही हैं. खेल संघों के प्रधान अपनी कुर्सी से चिपके रहे. खेलों की स्थिति सुधरने में उनकी कोई रूचि नहीं रही.

इस स्थिति में परिवर्तन की महत्ती आवश्यकता हैं. एशिया के जापान आदि छोटे देश भी खेल खेलों में भारत से आगे हैं. भारत की तुलना में चीन की खेल जगत में अपूर्व प्रगति हुई हैं.

खेलकूद में भारत के बढ़ते कदम- भारतीय खिलाड़ियों ने अनेक खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन आरम्भ कर दिया हैं. सरकार ने भी खेल संघों के पुनर्गठन पर ध्यान दिया हैं. खेलों के प्रबन्धन में पारदर्शिता लाने के प्रयास हो रहे हैं.

बीजिंग ओलम्पिक से भारतीय खिलाड़ियों ने नयें खाते खोलना आरम्भ कर दिया हैं. कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय खिलाडियों ने नयें क्षेत्रों में अपनी प्रतिभाएं प्रदर्शित की हैं.

तीरंदाजी, मुक्केबाजी, तैराकी, चक्का फेंक आदि में स्वर्ण पदक प्राप्त किये हैं. हॉकी को भी नवजीवन देने के प्रयास हो रहे हैं. क्रिकेट में तो भारत ने अपना वर्चस्व स्थापित किया ही हैं. टेनिस और बैडमिंटन में सायना नेहवाल और सानिया मिर्जा धूम मचाएं हुए हैं. शतरंज में आनंद विश्वनाथ और कुश्ती तथा भारोत्तोलन में भी नयें नयें चेहरे सामने आ रहे हैं. निशानेबाजी में अभिनव बिंद्रा का उल्लेखनीय योगदान है किन्तु अभी इस क्षेत्र में भारत को अभी बहुत कुछ करना बाकी हैं.

महिलाओं की भागीदारी- अब खेलों में महिलाएं अपनी पहचान बना रही हैं. ओलम्पिक खेलों में. दिव्यांग खेल कूद में, मुक्केबाजी तथा कुश्ती तक में महिलाओं ने अपने कीर्तिमान स्थापित किये हैं.

देश में खेलों का भविष्य- यदि खेलों को राजनीति और भ्रष्टाचार से मुक्त रखा जाए तो भारत में खेलों का भविष्य निश्चय ही उज्ज्वल होगा. इसके साथ ही विद्यालय स्तर से ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए. कॉमनवेल्थ खेलों में अल्पख्याति प्राप्त खिलाड़ियों ने भी देश की शान बढाई थी. मुझे विश्वास है कि भारत में खेलों का भविष्य निश्चय ही उज्ज्वल होगा.

आवश्यकता इस बात की हैं भारत अपनी खेल नीति की समीक्षा करे. स्कूल में खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए. छात्रों को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए. विद्यालयों में खेल के मैदान अनिवार्य रूप से होने चाहिए.

शहरों के फैलाव के साथ स्कूलों के खेल मैदान, पार्क, तालाब आदि भवन निर्माण की भेंट चढ़ चुके हैं. जब शहरों में खेल के मैदान और पार्क ही नहीं रहेगे तो बच्चे खेलेगे कहाँ. इस सम्बन्ध में मौलिक परिवर्तन पर विचार किया जाना चाहिए.

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