सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था पर निबंध । Essay On Government budget and economy in hindi

नमस्कार दोस्तों, सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था पर निबंध Essay On Government budget and economy in hindi में हम बजट और इकोनॉमी के बारे में विस्तार से पढ़ेगे। बजट क्या है अर्थ परिभाषा महत्व इतिहास प्रकार आदि को इस निबंध स्पीच अनुच्छेद पैराग्राफ के रूप में समझने का प्रयास करेंगे।

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था पर निबंध । Essay On Government budget and economy in hindi

Essay On Government budget and economy in hindi

बजट एस्से इन हिंदी : सरकार की वह क्रिया वित्तीय प्रशासन मानी जाती है, जिसके द्वारा सार्वजनिक आय , सार्वजनिक व्यय एवं सार्वजनिक ऋण की व्यवस्था नियंत्रण व प्रबन्धन किया जाता है। वित्तीय प्रशासन में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि आय को न्याय संगत तरीके से एकत्रित किया जाए और सरकार के व्यय को मितव्ययता ढंग से किया जाए।

बजट सरकार की राजस्व नीति का व्यापारिक रूप होता है। भारत में बजट सामान्यतया आगामी वित्तीय वर्ष हेतु आवश्यक सरकारी खर्च की सुनिश्चितता प्राप्त करने का प्रावधान हैं।

वित्तीय प्रशासन में बजट महत्वपूर्ण होता है इसे वित्तीय प्रशासन की धुरी कहा जा सकता है सरकार की आय व्यय और ऋण आदि से संबंधित क्रियाओं का निर्धारण बजट के माध्यम से होता है।

बजट का अर्थ एवं परिभाषा Meaning and Definition of Budget In hindi

बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द Bougette से मानी जाती है जिसका अर्थ है चमड़े के थैले। 1733 में बजट शब्द का प्रयोग इंग्लैंड में जादू के पिटारे के अर्थ में किया गया।

बजट सरकार की आय और व्यय का एक विवरण प्रपत्र है जिसमें आगामी वर्ष के लिए आय व्यय के अनुमानित आंकड़े एवं आगामी वर्ष के सामाजिक आर्थिक कार्यक्रम तथा आय व्यय को घटाने बढाने के लिए प्रस्तावों का विवरण होता है।

सामान्यतया बजट का तात्पर्य सरकार के उस विवरण पत्र से होता है जिसमे वर्ष पर्यन्त होने वाले आय व्यय का ब्यौरा दर्शाया जाता है, व्यापक अर्थ में इसका आशय यह है कि बजट में निहित तथ्यों को उस समय तक गुप्त रखा जाता है जब तक कि उसे देश की संसद के समक्ष प्रस्तुत न कर दिया जाए। विभिन्न विद्वानों ने बजट को निम्न प्रकार से परिभाषित किया है।

प्रो बेस्टेबल के अनुसार बजट का अर्थ है एक दिए गए समय के लिए वित्तीय प्रबन्ध जिसके साथ विधानसभा में स्वीकृति के लिए पेश करने का सामान्य सुझाव जुड़ा हुआ है।

फिण्डले शिराज के अनुसार बजट एक साथ एक रिपोर्ट एक अनुमान तथा एक प्रस्ताव है। यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा वित्तीय प्रशासन की सभी विधियों को सम्बंधित किया जाता है, उनकी तुलना की जाती है एवं समन्वय स्थापित किया जाता है।

स्पष्ट है कि बजट के दो पक्ष होते है एक ओर सरकार की प्रत्याशित आय जबकि दूसरी ओर सरकार के प्रत्याशित व्यय को व्यक्त किया जाता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार प्रतिवर्ष बजट संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है और संसद की स्वीकृति होने के पश्चात इसके प्रस्ताव के अनुसार ही कार्य किये जाते है।

बजट के उद्देश्य Budget objectives in hindi

देश की अर्थव्यवस्था को दिशा प्रदान करना बजट का प्रमुख उद्देश्य होता है। देश की अर्थव्यवस्था सरकार के बजट से प्रभावित होती है। बजट के प्रमुख उद्देश्य निम्न है।

  1. सरकारी बजट से न केवल विकास प्रभावित होता है बल्कि विकास की दिशा भी बजट से निर्धारित होती है।
  2. उत्पादन बढ़ाने में भी बजट की भूमिका महत्वपूर्ण होती है बजट में राहत कार्य द्वारा किये गए करारोपण सम्बन्धी रियायतों एवं शुल्क में राहत द्वारा दिये गए प्रोत्साहन उत्पादन वृद्धि में सहायक होते हैं।
  3. सामान्यतया सरकार बजट के माध्यम से नये कर लगाकर और जनता से ऋण लेकर उसकी क्रय शक्ति में कमी करते हुए कीमत स्तर को नियंत्रित करती है।
  4. देश के आर्थिक व सामाजिक विकास को गति देना एवं आय व धन का पुनर्वितरण करना।
  5. देश की उत्पादन संरचना एवं उत्पादन के स्तर को दिशा देना, बजट में करारोपण सम्बन्धी रियायते एवं प्रोत्साहन उत्पादन वृद्धि में सहायक होता है।
  6. देश मे प्रचलित मुद्रा स्फीति एवं अवस्फीति का उपचार बजट प्रावधानों में परिवर्तन द्वारा किया जाता है। जिससे आर्थिक स्थिरता के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
  7. कल्याणकारी राज्य की स्थापना का लक्ष्य बजट की सहायता से प्राप्त किया जा सकता है।
  8. आर्थिक असमानता पर रोक सामाजिक सुरक्षा हेतु विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन आर्थिक विकास हेतु योजनाओं का निर्माण बजट के प्रावधानों के माध्यम से ही किये जाते है।

बजट के प्रकार Types of budget In hindi

सरकारी बजट को सरकारी आय व्यय की प्रवृत्ति एवं सन्तुलन के आधार पर निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है।

राजस्व एवं पूंजीगत बजट (Revenue Budget)

यह बजट के प्रथम भाग में ही दर्शाया जाता है जिसमे राजस्व आय या राजस्व प्राप्तियां प्रदर्शित की जाती है। इन प्राप्तियों को भी दो भागों में विभाजित किया जाता है।

राजस्व प्राप्तियां एवं राजस्व व्यय

इसके अंतर्गत वह आय दर्शायी जाती है जिसका सम्बन्ध उसी वित्तीय वर्ष से होता है, इसे चालू खाता भी कहा जाता है। इस खाते में आय के वे स्रोत शामिल होते है जिनके बदले में कोई भुगतान नही करना होता है जैसे करो से प्राप्त आय, सार्वजनिक उपक्रमों से अर्जित आय, सरकारी उद्योग पर प्राप्त ब्याज आदि।

राजस्व बजट के अंतर्गत राजस्व आय एवं राजस्व प्राप्तियां दर्शाई जाती है। राजस्व आय एवं राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व जैसे आयकर निगम कर, सम्पति कर, उपहार कर, शासित कर उत्पादन शुल्क, सीमा शुल्क, व्यय इत्यादि आते है।

गैर राजस्व कर में ऋण, ब्याज, शुल्क, शासित, जुर्माना इत्यादि आते है। राजस्व व्यय को बजट में गैर विकासात्मक व्यय, तथा विकास व्यय के रूप में विभाजित किया जाता है। गैर विकासात्मक व्यय के अंतर्गत सरकारी अनुदान एवं ब्याज की अदायगी शामिल है।

जबकि विकासात्मक व्यय के अंतर्गत सरकारी सेवाओं पर व्यय, कृषि एवं सहायक सेवाओं उद्योग खनिज, उर्वरक सब्सिडी, सामान्य आर्थिक सेवाए, विद्युत सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण सार्वजनिक निर्माण परिवहन एवं संचार राज्यों को अनुदान शामिल किया जाता है।

राजस्व व्यय को दो भागों में दर्शाया जाता है। आयोजना भिन्न व्यय राजस्व खाते से तथा आयोजना व्यय राजस्व खाते से। इन दोनों मन्दों में सरकारी बजट के आयोजना एवं आयोजना भिन्न मन्दों में होने वाले व्यय को दर्शाया जाता है।

  • कर राजस्व
  • गैर कर राजस्व

बजट में राजस्व प्राप्तियों के अगले भाग में राजस्व व्यय दर्शाया जाता है, राजस्व व्यय को भी दो भागों में विभाजित किया जाता है।

  • आयोजना भिन्न व्यय राजस्व खाते से
  • आयोजना व्यय राजस्व खाते से

पूंजीगत बजट (कैपिटल बजट)

बजट दस्तावेज के दूसरे भाग में दर्शाया जाता है इसके दो भाग है।

पूंजीगत प्राप्तियां और पूंजीगत व्यय

इसके अंतर्गत आय के उन समस्त स्रोतों को रखा जाता है जिनके बदले में भुगतान करना आवश्यक होता है। पूंजीगत व्यय खाते में उन व्ययों को शामिल किया जाता है जिनमें व्यय तो चालू वर्ष में दिया जाए किन्तु सामाजिक कल्याण में वृद्धि चालू वर्ष के साथ साथ आगामी वर्ष तक होती रहे।

पूंजीगत आय के अंतर्गत ऋणों की वसूली, विविध प्रकार की प्राप्तियां इत्यादि दर्शायी जाती है जबकि पूंजीगत व्यय को आयोजना भिन्न व्यय पूंजीगत खाते से तथा आयोजना व्यय पूंजीगत खाते दर्शाया जाता है।

पूंजीगत प्राप्तियां

इसके अंतर्गत ऋणों की वसूली,विविध प्राप्तियां उधार व अन्य देनदारियां दर्शाई जाती है। इनकी कुल प्राप्तियों का योग पूंजीगत प्राप्तियां कहलाती है।

पूंजीगत व्यय

पूंजीगत व्यय को भी दो भागों में बांटा जाता है। आयोजना भिन्न व्यय पूंजीगत खाते से तथा आयोजना व्यय पूंजीगत खाते से। सरकार की कुल आय एवं कुल व्यय में समानता या अंतर के आधार पर भी सरकारी बजट के तीन प्रकार निम्न है।

  • बचत का बजट – यह बजट बचत का बजट कहलाता है जिसमें सरकार के व्यय की अपेक्षा आय का आधिक्य हो। अर्थात सरकार की कुल आय उसके व्यय की अपेक्षा अधिक हो।
  • सन्तुलित बजट – जिस बजट दस्तावेज में सरकारी आय व सरकारी व्यय दोनों समान हो वह सन्तुलित बजट कहलाता है।
  • घाटे का बजट – सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में सरकारी व्यय की अपेक्षा सरकारी आय कम हो तो उसे घाटे का बजट कहा जाता है। आधुनिक युग मे प्रायः सभी लोकतांत्रिक देशों में सरकार को जनकल्याणकारी कार्यों के निर्वहन हेतु कई प्रकार के व्यय करने पड़ते है। आर्थिक विकास की बढ़ती मांग, सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं पर बढ़ता व्यय, देश की मांग बढ़ने से सरकारों का सार्वजनिक व्यय तेजी से बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि घाटे का बजट, बजट की लोकप्रिय अवधारणा है।

बदलते परिवेश में बजट के प्रकार Types of budget in hindi in changing environment

सामान्यतया सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि से सम्बंधित है। भारत मे वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

अर्थव्यवस्था में बदलती हुई परिस्थितियों, बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप के कारण बजट की प्रक्रिया एवं बजट के स्वरूप में आधुनिक युग मे परिवर्तन हुए है, जिन्हें निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है।

आम बजट

आम बजट को पारम्परिक बजट भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य विधायिका या कार्यपालिका पर वित्तीय नियंत्रण स्थापित करना रहा है। इस प्रकार बजट का प्रमुख उद्देश्य सरकारी खर्चों पर नियंत्रण करना था न कि तीव्र गति से विकास को प्रेरित करना। इस बजट में मुख्यतः वेतन, मजदूरी, उपकरण मशीने आदि के रूप में किये जाने वाले व्यय तथा विभिन्न मन्दों में होने वाली आय को प्रस्तुत किया जाता है।

पूरक बजट : यदि बजट में स्वीकृत धनराशि 31 मार्च से पूर्व ही समाप्त हो जाए तो इस स्थिति में सरकार संसद के सम्मुख पूरक बजट प्रस्तुत करती है और अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है।

लेखानुदान : पिछला बजट 31 मार्च को समाप्त हो जाता है जिसे बढाया नही जा सकता, इसलिए सरकार को 1 अप्रैल को अपने खर्चों के लिए नए बजट की आवश्यकता होती है। संसद अस्थायी रूप से सरकार को व्यय के लिए अग्रिम धनराशि देती है।

निष्पादन बजट

कार्य के परिणामों या निष्पादन को आधार बनाकर निर्मित किया गया बजट निष्पादन बजट कहलाता है। निष्पादन बजट को व्यापक कार्यवाही का दस्तावेज माना जाता है। जो कार्यक्रमों योजनाओं से सम्बंधित सख्यात्मक आंकड़ो एवं क्रियान्वयन की उपलब्धियों का मापन करता है। यह बजट मूलतः लक्ष्योन्मुखी एवं उद्देश्य परक प्रणाली पर आधारित है।

जीरोबेस बजट

जीरोबेस अर्थात शून्य आधारीय बजट का जनक अमेरिका के पीटर ए पायर को माना जाता है। 1979 में इसे अमेरिका के राष्ट्रीय बजट में राष्ट्रपति जिमी कार्टर द्वारा अपनाया गया।

शून्य आधारित बजट प्रणाली व्यय पर अंकुश लगाने की एक तार्किक प्रणाली है इस प्रणाली में विगत व्ययों को आधार नहीं बनाया जाता अर्थात विगत व्ययों को भावी व्यय के लिए तर्क के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है।

इस प्रणाली में प्रत्येक क्रियाकलाप को शून्य आधार से पुनः औचित्य निर्धारित करना पड़ता है। न कि पुराने व्ययों पर नयें व्ययों का प्रावधान करना। इस बजट प्रणाली को सूर्यास्त बजट प्रणाली सनसेट सिस्टम कहा जाता है।

आउटकम बजट

सामान्य बजट की तुलना में यह एक कठिन प्रक्रिया है, जिसमे वित्तीय प्रावधानों को परिणामों के संदर्भ में देखा जाता है। बजट में मूल्यांकन किये जा सकने वाले भौतिक लक्ष्यों का निर्धारण इस उद्देश्य से किया जाता है कि बजट के क्रियान्वयन की गुणवत्ता को परखा जाना संभव हो सके। आउट कम बजट में कार्य सम्पादन हेतु किसी भी स्तर पर देरी या रुकावट के बजाय निर्धारित धनराशि को सही समय सही मात्रा में पहुचाना होता है।

जेंडर बजटिंग

जेंडर बजटिंग के माध्यम से सरकार द्वारा महिलाओं के विकास, कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष बजट में एक निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रावधान किए जाते है। बजट के प्रावधान पुरुष और स्त्री को अलग अलग तरीके से प्रभावित करते हैं।

संघीय प्रांतीय एवं स्थानीय संस्थाओं के बजट

संघीय एवं प्रांतीय सरकार के बजट कार्यकारिणी द्वारा तैयार किये जाते है तथा कार्यकारिणी द्वारा पास करवाए जाते है। तथा इनके क्रियान्वयन का दायित्व भी कार्यकारिणी पर रहता है। स्थानीय संस्थाओं का बजट स्वतंत्र होता है।

सामान्य एवं संकटकालीन बजट

सामान्य बजट प्रायः अपेक्षाकृत स्थायी प्रकृति के कार्यों से व्यवहार करते है। जबकि संकटकालीन बजट असामान्य या विशेष परिस्थितियों जैसे युद्ध मंदी आदि से संबंधित होते है। दोनों के उत्तरदायित्व भागीदारी एवं क्षमताएं अलग अलग होती है।

महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता का अभाव, शिक्षा के अवसरों में कमी स्वतंत्र निर्णय न ले पाना इत्यादि परिस्थितियों के कारण जेंडर बजटिंग का भारत जैसे विकासशील देश में पर्याप्त महत्व हैं।

बजट घाटे की अवधारणा Concept of budget deficit in hindi

आधुनिक युग मे लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा प्रस्तुत बजट में विविध प्रकार के बजटीय घाटों को दर्शाया जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है। प्रो डाल्टन के अनुसार एक बजट घाटा पूर्ण है यदि एक दिए गए समय के अंदर व्यय आय से अधिक है।

विभिन्न अवधारणाएं

राजस्व घाटा

जब बजट के अंतर्गत दर्शाये गए कुल राजस्व व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है। तो वह अंतर राजस्व घाटा कहलाता है। अर्थात राजस्व घाटा बजट की राजस्व प्राप्तियों की अपेक्षा राजस्व व्यय के आधिक्य को व्यक्त करता है।

राजकोषीय घाटा

प्रस्तुत बजट में राजकोषीय घाटा कुल राजस्व प्राप्तियों गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के ऊपर सरकार के कुल व्यय पूंजीगत व्यय जिसमें उधार दिए गए शुद्ध ऋणों की राशि भी शामिल होती है। का आधिक्य है। स्पष्ट है कि बजट घाटे में उधार एवं अन्य समस्त देनदारियां जोड़ दे तो वह राजकोषीय घाटा कहलाता है। राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था वर्तमान में आर्थिक स्थिति का समग्र दर्पण होता है।

वित्तीय घाटा

वित्तीय घाटा सरकारी कोष की वास्तविक स्थिति को व्यक्त करता है इसके अंतर्गत बजट घाटे के साथ साथ सरकार की शुद्ध उधारी को भी जोड़ा जाता है।

प्राथमिक घाटा

राजकोषीय घाटे में से ब्याज अदायगियों को घटाने के बाद जो राशि शेष बचती है उसे प्राथमिक घाटा कहा जाता है। अर्थात ब्याज अदायगिए राजकोषीय घाटे से निकाल दी जाए तो प्राप्त शेष को प्राथमिक घाटा कहा जाता है।

उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि सरकारी बजट किसी भी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। आधुनिक युग मे तो सरकारी बजट सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को न केवल प्रभावित करता है बल्कि अर्थव्यवस्था को दिशा भी प्रदान करता हैं।

भारत में बजट की नवीन प्रवृत्तियां New trends in budget in india in hindi

वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए केंद्र सरकार का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राजकोषीय प्रशासन व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के व्यय को योजनागत व्यय एवं गैर परम्परागत व्यय में वर्गीकृत करने की परंपरा को समाप्त करने की घोषणा की है।

2017-18 में यह प्रथा समाप्त हो गयी। और बजट को केवल राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय के रूप में ही वर्गीकृत किया जाएगा।

2016-17 के बजट में डिजिटल साक्षरता स्कीम, कालेधन की घोषणा हेतु स्कीम, मेक इन इंडिया सहित एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम शुरू करने की योजना प्रस्तावित की गई है।

सितम्बर 2016 में हुई भारत सरकार की केबिनेट मीटिंग के निर्णयानुसार अगले वित्तीय वर्ष में रेल बजट को भी अलग से प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। बल्कि इसे देश के आम बजट में एक मद के रूप में दर्शाया जाएगा।

केंद्र एवं राज्य सरकारों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय संसद ने 7 मई 2003 को राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबन्धन अधिनियम पारित किया जिसमें प्रावधान किया गया है कि राजस्व घाटे को शून्य किया जाए।

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राजस्व बंटवारे के मानक तय करने हेतु देश मे वित्त आयोग समय समय पर केंद्र सरकार को सुझाव देता है। केंद्र एवं राज्यों के राजस्व घाटे को शून्य स्तर पर लाकर राजकोषीय सुदृढ़ीकरण का सुझाव तेहरवें वित्त आयोग वाई वी रेड्डी की अध्यक्षता में गठित किया गया है। जिससे प्राप्त रिपोर्ट पर 2015 से 2020 तक क्रियान्वयन किया जा सकेगा।

भारतीय संविधान में प्रतिवर्ष बजट को संसद द्वारा पास कराने की व्यवस्था से सरकारी मशीनरी द्वारा किये जाने वाले व्यय के लिए संसद की अनुमति की अनिवार्यता का प्रावधान संसद के नियंत्रण को सर्वोच्चता प्रदान करता है।

आर्थिक नीति के उपकरण के रूप में बजट

बजट को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की आर्थिक नीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है। बजट केवल अनुमानों के प्रस्तावक मात्र ही नहीं बल्कि भूतकाल के अनुभव पर आधारित भविष्य के लिए व्यापक योजना एवं कार्यक्रम है। जो सरकार की आर्थिक एवं सामाजिक विचारधारा को प्रकट करता है। बजट सरकार की आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण एवं  आवश्यक उपकरण है। बजट राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के आर्थिक विकास का अभिन्न अंग है। यह देश मे इच्छीत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सरकार के हाथों में अच्छा उपकरण है।

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था पर निबंध । Essay On Government budget and economy in hindi का  यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, रिजर्व बैंक कार्य फंक्शन के बारे में यहाँ दी गईं जानकारी आपको पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

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