तम्बाकू सेवन के दुष्परिणाम निबंध | Essay On Harmful Effects Of Tobacco In Hindi

Essay On Harmful Effects Of Tobacco In Hindi: आज हम तम्बाकू सेवन के दुष्परिणाम निबंध आपकों यहाँ बता रहे हैं तम्बाकू सेवन हानिकारक व जानलेवा है सामाजिक संदेश आधारित यहाँ कक्षा 1, 2, 3,4, 5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए 5,10 लाइन 100,200,250,300,400, 500 शब्दों में छोटा बड़ा एस्से दिया गया हैं. Tobacco Hindi Essay निबंध  मदद से आप समझ पाएगे तम्बाकू क्या है इसका प्रभाव सेवन छोड़ने लाभ हानि आदि सरल निबंध भाषण लिख पाएगे.

Essay On Harmful Effects Of Tobacco In Hindi

Essay On Harmful Effects Of Tobacco In Hindi

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तम्बाकू एक सूखा नशा हैं जो जीते जी नरक का कष्ट भोगने वाली मादक वस्तु कही जाने तो गलत नहीं होगा. निकोटियाना नामक वनस्पति के पत्तों को सुखाकर तम्बाकू तैयार की जाती हैं, जिसमें निकोटिन नामक विषैला एवं प्राणघातक तत्व होता हैं जो नशा तो देता हैं मगर जीवन अवधि को भी खत्म करता जाता हैं.

यदि तम्बाकू जहर हैं तो कैसा हैं उपयुक्त उत्तर होगा, मीठा जहर जो इन्सान की धीरे धीरे जान निकाल लेता हैं. अपने भारत में तम्बाकू सेवन की प्रवृति दुनियां के अन्य देशों के मुकाबलें में सर्वाधिक हैं. तम्बाकू खाने वाला व्यक्ति तो इसके लिए जिम्मेदार होता ही हैं साथ ही हमारी सरकारे भी इसके लिए कम कसूरवार नहीं हैं.

सरकार को हर वर्ष एक बड़ी रकम तम्बाकू के राजस्व से प्राप्त होती हैं. जिसके चलते वह इसे प्रतिबंधित अथवा रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाती हैं. यदि किन्ही राज्यों में गुटखा,  बीड़ी एवं  तम्बाकू पर प्रतिबन्ध  आरोपित किया भी गया हैं. तो उस सख्ती से रोक नहीं है जिससे तम्बाकू व्यापार को रोका जा सके सरकार को भी इस विषय पर नयें सिरे से सोचना चाहिए.

क्योंकि जितना राजस्व तम्बाकू उत्पादों से प्राप्त होता हैं उससे कहीं अधिक मात्रा में स्वास्थ्य खर्च बढ़ जाता हैं लोगों की औसत आयु प्रत्याशा घट जाती हैं. लोग भी तम्बाकू की लत के बाद ही इसके दुष्परिणाम से अवगत होते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं. क्योंकि तम्बाकू की लत छोड़ना उतना आसान नहीं हैं जितना इसकी लत डालना. धीरे धीरे व्यसन का आदी व्यक्ति स्वयं को विनाश की ओर धकेल देता हैं.

बीड़ी, हुक्का, गुल, गुड़ाकु, जर्दा, किमाम, खैनी, गुटखा और सिगरेट ये भारत में सर्वाधिक प्रयोग किये जाने तम्बाकू उत्पाद हैं. बहुत से लोग बीड़ी, गुटका और सिगरेट की लत के आदि होते हैं. शरीर में किसी भी रूप में तम्बाकू पदार्थ का सेवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एवं जानलेवा होता हैं.

परफैरोल तम्बाकू में पाया जाने वाला दूसरा सबसे घातक पदार्थ हैं. यह व्यक्ति की जीवन शक्ति को कम कर टीबी जैसी घातक बीमारियों की ओर ले जाता हैं. इस तत्व से दांत कमजोर होना, पीले पड़ना और मुहं से बदबू का आना शुरू हो जाता हैं. तम्बाकू का कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं हैं त्वरित स्फूर्ति तथा आनन्द के वशीभूत होकर इसका सेवन शुरू करने के बाद इससे पीछा छुड़ाना सम्भव नहीं हैं.

तम्बाकू सेवन की अनगिनत हानियाँ हैं जबकि इसका कोई फायदा नहीं हैं. तम्बाकू पदार्थों पर हर दिन बड़ा खर्च, बिमारी हो जाने पर ईलाज का खर्च इस दौरान परिवार तबाह हो जाता हैं. अस्थमा और नपुसंकता तम्बाकू जन्य रोग हैं. निरंतर तम्बाकू सेवन से मुहं की लार पेट में नहीं जाने से भोजन ठीक ढंग से नहीं पच पाता हैं. इससे शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया भी बाधित होती हैं. दीर्घकाल में जीवनदायी शक्ति की नाशक बन जाती हैं.

शरीर में जकड़न , छाती में दर्द, आंखों से कम दिखाई देना, रक्तचाप आदि तम्बाकू के नकारात्मक प्रभाव हैं. नशे की लत से व्यक्ति की चमड़ी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं. एक युवक वृद्ध की तरह दिखने लगता हैं. विगत दो वर्षों में सम्पन्न एक सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत की कुल आबादी के 29 फीसदी युवक किसी न किसी माध्यम से तम्बाकू का सेवन करते हैं एक तरह से यह आने वाले समय में भयानक त्रासदी एवं मानव जीवन के संकट का पैगाम हैं.

हालिया समय में प्रकाशित एक शोध में तम्बाकू से होने वाली मौतों का आंकड़ा बेहद डरावना हैं. जिसके अनुसार विश्व में हर छः सैंकड में तम्बाकू का सेवन करने वाले एक व्यक्ति की म्रत्यु हो जाती हैं. इनके अनुसार हर एक मिनट में दस युवक तम्बाकू से होने वाली बीमारी के कारण दम तोड़ लेते हैं. तम्बाकू सेवन करने वाले प्रत्येक दो व्यक्ति में से एक की मौत का कारण तम्बाकू ही होता हैं.

इस लिहाज से संसार में प्रतिवर्ष 70 लाख लोग तम्बाकू चबाने से मर जाते हैं. बच्चों पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि २८ फीसदी बच्चों की मृत्यु तम्बाकू के धुंए से होती हैं परिवार में बीड़ी सिगरेट, हुक्का पीने पाने न सिर्फ अपनी मौत को न्यौता देते हैं बल्कि अपने भावी कर्णधारों के भविष्य को भी रौंद डालते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन १९८७ से ३१ मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मना रहा हैं.  इन  आंकड़ों को   देखकर तो  यही  कहा  जा सकता हैं. विगत दशकों में तम्बाकू के सेवन करने वालों में कमी की बजाय तीव्र वृद्धि इस तरह के प्रयासों की विफलता का सबूत हैं. तम्बाकू मुक्त समाज के लिए सामाजिक एवं धार्मिक स्तर किये गये प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं. समाज के गणमान्य लोगों को चाहिए कि वे समाज से इस कुरीति को समाप्त करे.

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