भारत में उच्च शिक्षा पर निबंध | Essay On Higher Education System And Policies In India in Hindi

भारत में उच्च शिक्षा पर निबंध  Essay On Higher Education System And Policies In India in Hindi: हमारे देश भारत की  व्यवस्थित शिक्षा प्रणाली (education in india)  की शुरुआत  आजादी के साथ ही हुई थी.  पिछले 7 दशक में  भारत ने प्राथमिक, माध्यमिक, कॉलेज, उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं  व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में  महत्वपूर्ण प्रगति की हैं  फिर भी देश में उच्च शिक्षा की कई चुनौतियां हैं जिनका हल किया जाए तो लाखों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश न जाना पड़े. भारत में उच्च शिक्षा के इस लेख में हम जानेगे कि उच्च शिक्षा अर्थ नवाचार प्रणाली  चुनौती उभरते ,निजीकरण  गुणवत्ता रुझान स्थिति आदि के बारें में इस निबंध में जानेगे.

Higher Education System And Policies In India in Hindi

Essay On Higher Education System And Policies In India in Hindi
            Higher Education System And Policies In India

उच्च शिक्षा पर निबंध (poor education India, Essay on Higher Education in Hindi)

बदलते वक्त के अनुरूप उच्च शिक्षा को और परिष्कृत एवं परिमार्जित करने के उद्देश्य से शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में यह घोषणा की गई थी. इस नई नीति के फलस्वरूप पूरे देश में शिक्षा को एक समान अर्थात 10+2+3 के शैक्षिक ढाँचे की शुरुआत हुई थी. इस समय पूरे देश में इसी शैक्षिक ढांचे की व्यवस्था हैं. इसे प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा व उच्च शिक्षा में विभाजित किया जा सकता हैं.

प्राथमिक शिक्षा को  दो भागों में बांटा  जा सकता हैं  1 से पांच तक प्राथमिक स्तरीय शिक्षा  तथा उच्च प्राथमिक स्तरीय शिक्षा. देश में प्राथमिक शिक्षा के बाद माध्यमिक शिक्षा को भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता हैं  माध्यमिक और उच्च माध्य. उच्च  माध्यमिक शिक्षा की पढ़ाई पूरी करने  के बाद छात्रों को  उच्चतर शिक्षा के  लिए त्रिवर्षीय स्नातक में प्रवेश दिया जाता हैं. उच्च शिक्षा के अंतर्गत स्नातक के बाद के दो वर्षः परास्नातक पाठ्यक्रम की व्यवस्था भी हैं. इसके बाद किसी भी क्षेत्र में विशेष ज्ञता के रूप में उच्चतर शिक्षा हासिल की जा सकती हैं.

भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली और निकाय (higher education system in india and its regulatory bodies)

इस तरह भारत में उच्च शिक्षा का अर्थ हैं उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा से आगे की पढाई. प्राचीन काल से ही देश   भारत उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र रहा हैं. प्राचीन भारतीय शिक्षा केन्द्रों की प्रसिद्धि विश्वभर में फैली थी, मगध बौद्धकालीन शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. यहाँ उस काल के दो प्रमुख विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय व् विक्रमशिला विश्वविद्यालय विद्यमान थे. यहाँ विश्व के कई देशों के लोग विद्या ग्रहण करने के लिए आते थे. इन विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त शेष भारत में वल्लभी विश्व., नदिया विश्वविद्यालय, तक्षशिला विश्वविद्यालय इत्यादि बौद्धकाल के कुछ प्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे.

भारत में उच्च शिक्षा की उपलब्धता (availability of education in india)

भारत सदियों तक विदेशियों के अधीन रहा, परतंत्रता के इस दौर में भारतीय शिक्षण संस्थान लगभग समाप्ति की कगार पर थे, ऐसे में देशी विदेशी लोगों के प्रयत्न से ब्रिटिश काल में आधुनिक शिक्षा की नीव पड़ी. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत इसमें सुधार करते हुए उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू कर दिए.  सन 1948 में  उद्देश्य की  पूर्ति हेतु सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध् यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग का गठन किया गया. इसके बाद से उच्च शिक्षा की समीक्षा एवं इसमें सुधार के लिए समय – समय पर कई शिक्षा आयोगों का गठन किया जाता रहा हैं. आज भारत में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले कुछ विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान हैं. विदेशी छात्र भी भारत में अब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आने लगे हैं.

भारतीय शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का इतिहास (innovation in indian education sector)

उच्च शिक्षा की  वर्तमान प्रणाली की शुरुआत  की कोशिशे उन्नीसवीं  शताब्दी के द्वितीय दशक में प्रारम्भ हुई. लार्ड मैकाले के विवरण पत्र को 1835 ई में स्वीकृति मिलने के बाद उच्च शिक्षा के लिए  विश्वविद्यालयों की स्थापना पर जोर दिया जाने लगा. इसके बाद 1854 ई में चार्ल्स वूड ने अपना घोषणा पत्र  में लंदन  विश्वविद्यालय की  तर्ज पर  भारत में भी विश्वविद्यालयो की स्थापना का सुझाव दिया, इसी सुझाव को कार्यान्वित करते हुए 1857 ई में कोलकाता, बम्बई व मद्रास में तीन विश्वविद्यालय की स्थापना की गई.

इसके बाद 1887 ई में इलाहबाद विश्वविद्यालय की स्थापना हुई. इस समय भारत में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले पचास से अधिक केन्द्रीय विश्वविद्यालय,दो सो से अधिक राज्य विश्वविद्यालय लगभग एक सौ समकक्ष विश्वविद्यालय तथा लगभग तीस हजार महाविद्यालय हैं.

भारतीय उच्च शिक्षण के संस्थान (education in indian schools current challenges in higher education)

विश्वविद्यालय को निधियां उपलब्ध करवाने तथा उच्चतर शिक्षा की संस्थाओं में मानकों के समन्वय, निर्धारण अनुरक्षण का दायित्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग निभाता हैं. इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों के मानकों के समन्वय निर्धारण तथा अनुरक्षण का दायित्व निभाने के लिए कुछ संवैधानिक व्यावसायिक परिषदें कार्यरत हैं.

ये परिषदें हैं- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एसआईसीटीई, दूरस्थ शिक्षा परिषद, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद इत्यादि.

भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा (higher education in india and abroad)

भारत में इस समय 6 भारतीय प्रबंधन संस्थान हैं. समय समय पर इनकी संख्या में बढ़ोतरी की गई हैं. पिछले कुछ सालों में प्रबन्धन की उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों की बाढ़ सी आ गई हैं. इसमें से कुछ उच्च स्तरीय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. तो कुछ गुणवत्ता मानकों के दृष्टिकोण से बेहतर नहीं कर पा रहे हैं. इसके चलते छात्र वर्ग को प्रवेश के निमित्त असमंजस की स्थिति से गुजरना पड़ता हैं.

भारत में प्रति वर्ष 8 लाख से अधिक छात्र इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त करते हैं आईआईटी एवं कुछ अन्य केन्द्रीय इंजीनिय रिंग संस्थान आज भी अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखे हुए हैं. इस समय भारत में कुल 23 आई आई टी संस्थान हैं. नई पीढ़ी के उच्च शिक्षा प्राप्त भारतीय युवाओं का आकलन करने पर भारतीय उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का पता चलता हैं. नई युवा पीढ़ी ने उच्च शिक्षा के वर्तमान भारतीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर अपनी बुद्धि एवं क्षमता का लोहा विश्व भर में मनवाया हैं.

भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति व जॉब सम्भावना (annual cost & jobs in higher education in india)

आईआईटी और आईआईएम से निकले छात्रों की प्रतिभा का लोहा पूरा विश्व मानता हैं. इसका पता इसी बात से चल जाता हैं कि अत्यधिक ऊँचे वेतन पॅकेज देकर उनको अपने संस्थानों में नियुक्त करने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में होड़ लगी रहती हैं किन्तु यह एक सिक्के का एक पहलू भर हैं. दूसरा पहलू यह हैं कि अधिकतर मामलों में भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति अभीभी पिछड़ी हुई हैं.

भारत में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर इसमें पर्याप्त सुधार के सुझाव देने के लिए वर्ष 2005 में सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन किया गया, इस आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए 2015 तक 1500 नयें विश्वविद्यालय की स्थापना करने की आवश्यकता हैं.

उच्च शिक्षा ने स्वतंत्र भारत के आर्थिक विकास, सामजिक प्रगति और प्रजातांत्रिक विचारधारा को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया हैं. लेकिन इस समय गंभीर चिंता का विषय यह है कि उच्च शिक्षा में प्रवेश करने वाले आयु वर्ग का हमारी जन संख्या में कुल अनुपात 10 प्रतिशत ही हैं. विश्वविद्यालयों में स्थानों की संख्या की दृष्टि से उच्च शिक्षा पाने के अवसर हमारी आवश्यकताओं के हिसाब से बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं हैं.

हमारी आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से को उच्च शिक्षा की कोई सुविधा सुलभ नही हैं. इतना ही नहीं हमारे अधिकतर विश्व विद्यालयों में उच्च शिक्षा का स्तर तय मानकों से बहुत कम हैं. इसमें सुधार की आवश्यकता हैं. २१ वीं शताब्दी में भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज का बदलाव काफी हद तक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं इसके प्रसार पर निर्भर करता हैं. अतः यह जरुरी हो गया हैं कि उच्च शिक्षा में जो बाधाएं हैं, उन्हें दूर कर इसे व्यापक एवं सबके लिए सुलभ बनाया जाए.

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