राष्ट्रभाषा हिंदी पर निबंध | Essay on Hindi Language in Hindi

Essay on Hindi Language in Hindi: देश की आजादी से पूर्व ही गांधीजी ने कहा था,यदि कोई भाषा भारत की राष्ट्रभाषा बन सकती है तो वह हिंदी ही होगी. बिना राष्ट्र भाषा के कोई भी देश गूंगा ही कहा जाएगा. हिंदी, बंगला, उर्दू, पंजाबी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, उड़िया सहित कुल 22 भाषाओं को संविधान द्वारा राजभाषा का दर्जा दिया गया हैं, हिंदी के अलावा अन्य सभी स्थानीय भाषाएँ हैं, जिन्हें बोलने वालो की संख्या एक ही राज्य में सिमटकर रह जाती हैं. जबकि हिंदी भारत की एक मात्र भाषा ही होगी, जिन्हें दर्जन भर राज्यों में बोला एवं समझा जाता हैं. यही वजह है कि इन्हें राजभाषा का दर्जा प्राप्त हैं. 14 सितंबर, 1949 के दिन ही भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. मगर बड़े दुःख का विषय है जिस भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए वह अपने ही राज्यों एवं देश में शोषित व् अपमानित हो रही हैं. हिंदी भाषी राज्यों में भी अंग्रेजी का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा हैं. राष्ट्रभाषा हिंदी पर निबंध में हमारी मातृभाषा हिंदी के इसी दुःख व पीड़ा का वर्णन हैं.

Essay on Hindi Language in Hindi For Students

राष्ट्रभाषा हिंदी पर निबंध | Essay on Hindi Language in Hindi
राष्ट्रभाषा हिंदी पर निबंध | Essay on Hindi Language in Hindi

Essay on Hindi: Our National Language in Hindi Hindi Hamari rashtrabhasha hai essay in Hindi Wikipedia राष्ट्रभाषा हिंदी पर निबंध: गांधीजी भारत की स्वाधीनता के साथ साथ राजभाषा, राष्ट्रभाषा अथवा सम्पर्क भाषा के रूप में किसी भारतीय भाषा को प्रतिष्ठित देखना चाहते थे. उन्होंने पूरे देश का दौरा करके यह निष्कर्ष निकाला कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा हो सकती हैं जिसे राजभाषा के पद पर प्रतिष्ठापित करने में कोई परेशानी नही होगी.

वे चाहते थे कि आजादी मिलने के बाद देश में राष्ट्रीय सरकार का काम किसी भारतीय भाषा में होना चाहिए. उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने के लिए भारत में हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की, ताकि लोग हिंदी पढ़े और हिंदी बोलने समझने, लिखने में उन्हें कोई कठिनाई ना हो. वे चाहते थे कि देश का नया संविधान जब बना तब गांधीजी की कही बातों को लोगों ने याद किया और संविधान के अनुच्छेद 343(1) में लिखा गया कि ”संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी’

Essay on Hindi Language in Hindi Language In 300 Words

संविधान में यह भी कहा गया कि 26 जनवरी 1950 को नया संविधान लागू होने के 15 वर्ष बाद हिंदी समग्र रूप से राष्ट्रभाषा का पद मिल जाएगा और जिन कामों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग होता रहा हैं. उन सभी के लिए हिंदी का प्रयोग शुरू कर दिया जाएगा. संविधान में उक्त पंक्तियाँ लिखे जाने से पूर्व राजर्षि टंडन, सेठ गोविन्ददास जैसे हिंदी भक्तों ने इसका विरोध किया था और कहा था यदि हिंदी को अभी से लागू नही किया गया तो कालान्तर में कई परेशानियां आएगी और हिंदी कभी भी पूरी तरह राष्ट्रभाषा नही बन पाएगी, उस समय नेहरू जैसे कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया था और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के प्रश्न पर 15 वर्षों के लिए टाल दिया था.

नेहरू जी नही रहे, किन्तु उनके बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री ने संसद में नेहरू के आश्वासन को कार्यरूप में बदलने के लिए एक बिल पेश किया, जो पास होकर कालान्तर में राजभाषा अधिनियम 1963 के रूप में जाना जाता हैं, यह अधिनियम इतना खतरनाक सिद्ध हुआ कि आजादी के ७३ वर्ष बीत जाने के बाद भी हिंदी पूरी तरह से भारत की राष्ट्रभाषा नही बन पाई हैं. इस अधिनियम में उल्लेख किया गया हैं कि अंग्रेजी तब तक राजभाषा बनी रहेगी, जब तक दक्षिण भारत के लोग उसे हटाने की मांग नही करेगे.

हिंदी के व्यापक प्रयोग के लिए सरकारी प्रयत्न जारी हैं. जिसकी वजह से सन 1976 में सरकार ने बारह राजभाषा नियम तैयार किये. इन नियमों के अनुसार कुछ कामों के लिए हिंदी का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया हैं. भारत सरकार द्वारा गठित संसदीय समितियों के सदस्य समय समय पर केंद्र सरकार के कार्यालयों का निरीक्षण करते हैं. इस प्रकार के निरीक्षणों से उन लोगों को काफी प्रोत्साहन मिला हैं, जो हिंदी का प्रयोग करने के लिए प्रयत्नरत हैं.

Essay on Hindi Language in Hindi In 400 Words

राष्ट्रीय एकता एवं प्रगति में हिंदी भाषा का महत्व- प्राचीनकाल से ही मनुष्य जंगलों में निवास करता था. धीरे धीरे उसने समाज में रहना आरम्भ किया और सुरक्षा की दृष्टि से समूह में रहना उपयुक्त समझा जाने लगा. कालान्तर में इन्ही समूहों कबीलों का और फिर नगर राज्यों का विकास हुआ.

राष्ट्रवाद की अवधारणा का विकास मध्यकाल से माना गया हैं. पश्चिमी विद्वान भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण अंग्रेजी शासन को मानते हैं, किन्तु यह तथ्य स्वीकार्य नही हैं. वस्तुतः भारत में राष्ट्रवाद की भावना उतनी ही प्राचीन है जितना कि यहाँ का इतिहास. चक्रवर्ती सम्राट बनकर सम्पूर्ण भारत पर शासन करना हमारे देश के प्राचीनकालीन राजाओं का सपना हुआ करता था. प्राचीन काल में संचार के साधनों का अभाव होने के कारण यदपि लम्बे समय तक भारत कभी एक सत्ता के अधीन न रह सका किन्तु यह भावना कभी मरी नही अशोक समुद्रगुप्त जैसे शासकों ने लगभग सम्पूर्ण भारत को एक शासन के अधीन ला दिया था.

एक पश्चिमी विचारक का कथन है कि किसी स्वतंत्र राष्ट्र के लिऐ राजकाज की कोई विदेशी भाषा होना वहां की सांस्कृतिक गुलामी को दर्शाता हैं. ठीक भारत में यही स्थिति हैं. यहाँ के आमजन की भाषा हिंदी को अपमानित कर अंग्रेजी को आज राष्ट्रभाषा के सिंहासन पर स्थापित किया हुआ प्रतीत होता हैं. इस समय भारतीय संवैधानिक स्थिति में हिंदी को देखा जाए तो अनुच्छेद 343 के खंड-1 में भारत के राजकार्यों की भाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया हैं, जिनमें देवनागरी लिपि मान्य रहेगी. अंक गणित में भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीयीकरण होगा. लेकिन इसी अनुच्छेद का अगला भाग यह कहता हैं. अगले 15 साल यानि 26 जनवरी 1965 तक सरकारी कामकाज के लिए अंग्रेजी का प्रयोग भी स्वतंत्र रूप से होता रहेगा. ऐसा प्रवधान करने की एक वजह यह भी थी कि अब तक के सभी कानून तथा व्यवस्थाएं अंग्रेजो द्वारा अंग्रेजी भाषा में बनाई गई थी, अतः यकायक इतनी चीजों को हिंदी में बदलना और इसे धरातलीय रूप देना संभव भी नही था

Essay on Hindi Language in Hindi In 500 Words

1965 तक हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी का भी राजभाषा के रूप में उपयोग करने का निर्णय उस समय की परिस्थितियों के मुताबिक काफी हद तक सही भी था. मगर जब 15 साल खत्म हो गये तथा अंग्रेजी को भारत से पूरी तरह समाप्त कर हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने का समय आया, तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में स्वार्थी राजनीतिज्ञों ने एक हिंसक जाल बुना और आमजन को इसकी भावनाओं के साथ जोड़कर राजनितिक रूप दे दिया गया. क्षेत्रीय भाषा के दमन के विषय पर इस उग्र हिंदी विरोधी आंदोलन के चलते समस्त हिंदीभाषियों का सपना चूर चूर हो गया.

भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दिया गया हैं, यह भारत के भाषाभाषी होने की वजह हैं. यदि विभिन्न भाषाओं को बोलने वाली संख्या पर गौर करे तो भारत में सबसे अधिक लोग हिंदी बोलते हैं. इसके पश्चात दूसरा स्थान बांगला का हैं इसके बाद मराठी, पंजाबी, गुजराती, तेलगु आदि भाषाएँ आती हैं.

हिंदी राष्ट्रभाषा बनने के सभी मापदंडों को पूर्ण करती हैं. यह भारत में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा हैं. उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम सभी भागों को एक सम्पर्क माध्यम प्रदान करने वाली भाषा हैं. दूसरा तथ्य यह भी है कि हिंदी को छोड़कर अन्य कोई ऐसी भाषा नही हैं जिन्हें दो राज्यों के लोग आपस में विचार विनिमय के लिए उपयोग कर सकते हैं. महज कुछ दक्षिणी राज्यों को छोड़कर हिंदी समस्त देश में बोली और समझी जाती हैं.

वर्तमान समय में हिंदी भारत की मातृभाषा, सम्पर्क भाषा तथा राजभाषा तो हैं ही मगर सम्पूर्ण देश को एक कड़ी में बाँधने वाली हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान भी दिया जाना चाहिए. इस सम्बन्ध में हमारे प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का कथन उल्लेखनीय हैं उन्होंने कहा था जिस देश को अपनी मातृभाषा तथा साहित्य का गौरव नही हैं वो राष्ट्र कभी भी उन्नति नही कर पायेगा. न केवल सरकारी प्रयासों से हिंदी को सम्मानजनक स्थान दिलाया जा सकता हैं बल्कि हम सभी क्षेत्रों में हिंदी के उपयोग तथा इसको बढ़ावा देकर भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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