मानव अधिकार आयोग पर निबंध | Essay On Human Rights Commission In Hindi

प्रिय साथियो आपका स्वागत है Essay On Human Rights Commission In Hindi में  हम आपके साथ मानव अधिकार आयोग पर निबंध साझा कर रहे हैं. कक्षा 1,2,3,4,5, 6,7,8,9,10 तक के बच्चों को मानवाधिकार आयोग भारत के कार्य पर निबंध टिप्पणी पर सरल भाषा में हिन्दी निबंध (ह्यूमन राइट्स कमिशन एस्से)  को परीक्षा के लिहाज से याद कर लिख सकते हैं.

Essay On Human Rights Commission In Hindi

Essay On Human Rights Commission In Hindi

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति का विचार और उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हैं. इसके अंतर्गत बिना हस्तक्षेप के कोई राय रखना और किसी भी माध्यम के जरिये से तथा सीमाओं की परवाह न करके किसी की सूचना और धारणा का अन्वेषण, ग्रहण तथा प्रदान सम्मिलित हैं.

मानव अधिकार क्या है 

ये वे प्राकृतिक अधिकार हैं जिनका प्रत्येक नागरिक उपभोग कर सकता हैं. मानव अधिकारों के अंतर्गत जीवन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, जीविकापार्जन का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार आते हैं.

संसार का प्रत्येक लोकतांत्रिक देश अपने नागरिकों को ये अधिकार प्रदान करता हैं. भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 से 35 तक इन अधिकारों का प्रावधान किया गया हैं. विश्वस्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल हैं जिनका मुख्यालय लन्दन में हैं.

मानव अधिकार आयोग की आवश्यकता

भारत में मूल अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका के अलावा कुछ और सरंचनाओं का भी निर्माण किया गया हैं. इनमें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति एवं जाति आयोग तथा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग प्रमुख हैं. ये संस्थाएं क्रमशः अल्पसंख्यकों, महिलाओं, दलितों के अधिकारों तथा मानवाधिकारों की रक्षा करती हैं.

भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व कार्य

मौलिक अधिकारों और अन्य अधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2000 में भारत सरकार ने कानून द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया हैं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक पूर्व न्यायधीश, किसी उच्च न्यायालय का एक पूर्व न्यायधीश तथा मानवाधिकारों के सम्बन्ध में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले दो और सदस्य होते हैं.

कार्यक्षेत्र

मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायते मिलने पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग स्वयं अपनी पहल या किसी पीड़ित व्यक्ति की याचिका पर जांच कर सकता हैं. जेलों में बंदियों की स्थिति का अध्ययन कर सकता हैं. मानवाधिकार के क्षेत्र में शोध कर सकता हैं. या शोध को प्रोत्साहन कर सकता हैं.

प्राप्त शिकायतों का स्वरूप

आयोग को प्रतिवर्ष हजारों शिकायतें मिलती हैं. इनमें से अधिकतर हिरासत में मृत्यु, हिरासत के दौरान बलात्कार, लोगों के गायब होने, पुलिस की ज्यादतियों, कार्यवाही न किये जाने पर, महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार आदि से सम्बन्धित होती हैं.

आयोग को स्वयं मुकदमा सुनने का अधिकार नहीं हैं. यह सरकार या न्यायालय को अपनी जांच के आधार पर मुकदमें चलाने की सिफारिश कर सकता हैं.

आयोग का दुरूपयोग

प्रत्येक व्यक्ति के मूल अधिकारों की रक्षा का पक्ष हर कोई लेता हैं. शक्तिशाली लोग, सत्ता या समूह किसी के अधिकारों का हनन न करे. यदि ऐसा हो तो वह आयोग की शरण में जा सकता हैं. यह व्यवस्था निसंदेह मानवता की भलाई के लिए बनाई गई, मगर कई बार व्यक्ति विशेष या दल विशेष के प्रभावों के चलते मानव अधिकार आयोग ने निष्पक्षता से काम नहीं लिया हैं.

देश के समुदाय विशेष के किसी व्यक्ति की झूठी अपवाह या कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी करने वाले के अधिकारों की रक्षा के लिए ह्यूमन राईट कमिशन का कारवां बचाव में खड़ा हो जाता हैं. मगर यही आयोग कैराना, सिख दंगे, कश्मीर विस्थापित लोगों के पुनर्वास अथवा उनके अधिकारों की बात नहीं करेगा. इसी दोगलेपन के चलते भारत में मानवाधिकार आयोग का प्रभाव शून्य ही नजर आता हैं.

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