यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता पर निबंध | Essay on If I were the Prime Minister in Hindi

Essay on If I were the Prime Minister in Hindi प्रिय विद्यार्थियों आपका स्वागत है आज हम आपके साथ यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता पर निबंध अर्थात देश का पीएम बनता तो क्या होता अथवा क्या करता. इस विषय पर आपके साथ हिंदी एस्से कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए सरल भाषा में Essay on If I were the Prime Minister in Hindi का निबंध 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में साझा कर रहे हैं.

यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता पर निबंध | Essay on If I were the Prime Minister in Hindiयदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता पर निबंध | Essay on If I were the Prime Minister in Hindi

Hello And Welcome Guys Here We Share Essay on If I were the Prime Minister in Hindi Language Short & Long Length Essay For School Students & Kids, Let’s Read.

Essay on If I were the Prime Minister in Hindi In 500 Words

प्रस्तावना- भारत में प्रधानमंत्री का पद अति महत्वपूर्ण हैं. इसलिए प्रधानमंत्री बनना किसी भी भारतीय नागरिक के लिए गौरव की बात हैं. प्रधानमंत्री का पद जितना महत्वपूर्ण हैं उतना ही अधिक जिम्मेदारी भरा भी, इसके बावजूद लगभग हर भारतीय का सपना प्रधानमंत्री बनने का होता हैं. यदि मैं भी जीवन में किसी पद पर पहुचने में कामयाब रहा तो यह मेरे लिए गौरव की बात होगी, यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अपनी समस्त क्षमताओं का उपयोग राष्ट्र की उन्नति के लिए करता.

राष्ट्र के प्रति कर्तव्य– भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मेरी राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों में निम्नलिखित प्राथमिकताएं होती-

  • शिक्षा का उचित प्रसार- देश के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे पहले मैं भारत में शिक्षा के उचित प्रसार पर ध्यान देता. किसी भी देश का आर्थिक विकास इस बात पर निर्भर करता हैं कि उसके नागरिक कितने शिक्षित हैं. मैं शिक्षा द्वारा उत्पादकता बढ़ाने के लिए विज्ञान की शिक्षा, कार्यानुभव एवं व्यवसायिक शिक्षा पर जोर देता.
  • आंतरिक सुरक्षा सुद्रढ़ करना- एक देश तब ही प्रगति की राह पर अग्रसर रह सकता हैं, जब उसके नागरिक अपने देश में सुरक्षित हो. असुरक्षा की भावना न केवल नागरिकों का जीना दूभर कर देती हैं. बल्कि इससे देश की शांति एवं सुव्यवस्था के साथ साथ इसकी प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं. साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद, आतंकवाद, अलगाववाद, भाषावाद, नक्सलवाद इत्यादि भारत की आंतरिक सुरक्षा को सुद्रढ़ करने का प्रयास करता और देश की अखंडता सुरक्षित रखता.
  • राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा- राष्ट्र की आंतरिक शांति तथा सुव्यवस्था और बाहरी दुश्मनों से रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक हैं. यदि हम भारतवासी आपसी मतभेदों में ही उलझे रहे तो अन्य देश हमारी स्वतंत्रता को हड़पने का प्रयास करेगे इसलिए मैं भारत की सबसे बड़ी विशेषता विविधता में एकता को महत्व देते हुए भारत की राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने का प्रयास करता.
  • आर्थिक चुनौतियों का समाधान– जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विषमता, भ्रष्टाचार, गरीबी, सामाजिक शोषण, बेरोजगारी अशिक्षा, औद्योगिकीकरण की मंद प्रक्रिया इत्यादि भारत की आर्थिक विकास की कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं. प्रधानमंत्री के रूप में मैं इन आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश करता.
  • भारतीय विदेश नीति में सुधार– अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में किसी भी देश की स्थिति तभी सुद्रढ़ हो सकती हैं, जब उसकी विदेश नीति सही हो. भारत एक शांतिप्रिय देश हैं. दुनियाभर में शांति को बढ़ावा देने एवं परस्पर सहयोग के लिए मैं भारतीय विदेश नीति में सुधार करता.

युवा पीढ़ी के प्रति कर्तव्य- किसी भी देश की शक्ति उसकी युवा पीढ़ी ही होती हैं. आज भारत की युवा पीढ़ी को बेरोजगारी का दंश बहुत बुरी तरह से झेलना पड़ रहा हैं. जिसके कारण युवा वर्ग हताशा से भरकर नशा, चोरी तथा आपराधिक कृत्यों को करने लगा हैं. मैं प्रधानमंत्री के रूप में रोजगार के अनेकों अवसर पैदा करता. जिससे युवा शक्ति का सुनियोजन भली प्रकार हो पाता.

बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य– बुजुर्ग राष्ट्र का अनुभव होते हैं. उनके अनुभवों का लाभ देश को मिलता रहे, ऐसी व्यवस्था करता. साथ ही वृद्धावस्था की कुछ चुनौतियों जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, पेंशन आदि की भली प्रकार व्यवस्था करके बुजुर्गों के जीवन को खुशहाल बनाने का प्रयास करता.

उपसंहार– स्पष्ट है कि यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो देश एवं देश की जनता को सामाजिक, राजनीतिक आर्थिक एवं शैक्षिक स्तर पर सुद्रढ़ कर भारत को पुर्णतः विकसित ही नहीं खुशहाल देश बनाने का अपना सपना साकार करता.

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