भारत पर निबंध | Essay on India in Hindi Language

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भारत पर निबंध | Essay on India in Hindi Languageभारत पर निबंध | Essay on India in Hindi Language

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Essay on India in Hindi Language In 500 Words Limit

जन्म भूमि से स्वाभाविक प्रेम- 

अरुण मधुमय देश हमारा
जहाँ पहुच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा

स्वर्णिम देश है मेरा भारत, मुझे इससे गहरा प्रेम हैं. हर प्राणी को अपनी जन्मभूमि से स्वाभाविक प्रेम होता हैं. स्वदेश के अन्न, जल और वायु से ही मनुष्य को जीवन मिलता हैं. इसका इतिहास और परम्पराएं उसके सिर को गर्व से ऊँचा करती हैं. अतः मुझे भी अपने भारत से असीम प्यार हैं. मुझे भारतीय होने पर गर्व हैं.

नामकरण और भौगोलिक स्थिति- ऐसा माना जाता है कि राजा दुष्यंत और शंकुतला के प्रतापी पुत्र सम्राट भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत हुआ. भरतखंड, जम्बद्वीप, आर्यावर्त, हिंदुस्तान, इंडिया भी भारत के अन्य नाम रहे है. हमारा देश एशिया महाद्वीप के दक्षिण में स्थित हैं. इसके उत्तर में हिमालय के धवल शिखर हैं और दक्षिण में हिन्द महासागर. पूर्वी सीमा पर असम, नागालैण्ड, त्रिपुरा और पश्चिम में राजस्थान तथा गुजरात प्रदेश हैं.

इतिहास एवं संस्कृति– भारत विश्व के प्राचीनतम देशों में गिना जाता है. भारत के प्राचीन वैभव का परिचय हमें वेद, उपनिषद और पुराण आदि ग्रंथों में मिलता हैं. भारतीय संस्कृति संसार की प्राचीनतम और महानतम संस्कृति रही हैं. इस संस्कृति ने सर्वे भवन्तु सुखिनः अर्थात सभी सुखी रहें, सारी पृथ्वी के निवासी एक परिवार के समान हैं.

ऐसे महान संदेश दिए हैं. इस संस्कृति ने सत्य, अहिंसा, परोपकार, दान, क्षमा आदि श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाया हैं. दधिची, शिवि, रंतिदेव, कर्ण जैसे दानी और परोपकारी राम, कृष्ण, अर्जुन जैसे वीर हरिश्चन्द्र जैसे सत्यनिष्ठ बुद्ध और महावीर जैसे अहिंसा के पालक भारतीय संस्कृति की ही देन हैं. भारतीय संस्कृति सभी धर्मों को सम्मान देने का संदेश देती हैं. अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की ही विशेषता हैं.

प्राकृतिक वैभव- मेरी भारत भूमि पर प्रकृति ने अपार प्रेम बरसाया हैं. बारी बारी से छः ऋतुएँ इसका श्रृंगार करती हैं. मधुकंठ विहगों की अवली नित मंगलगीत सुनाती हैं. नभस्पर्शी हिमालय हरे भरे विस्तृत मैदान, बलखाती नदियाँ, दर्पण से झील ताल, वनस्पतियों से भरे वनांचल और सागर के अनंत विस्तार क्या नहीं दिया है प्रकृति ने भारत को.

वर्तमान स्थिति- आज मेरा भारत विश्व का विशालतम और स्थिर लोकतंत्र हैं. अपने बहुमुखी विकास में जुटा हुआ हैं. ज्ञान विज्ञान, व्यवसाय, शिक्षा एवं आध्यात्म हर क्षेत्र में अपनी प्रगति के परचम फहरा रहा हैं. आज हमारा देश विश्व की महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं.

हमारा कर्तव्य- भारत फिर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर विश्व गुरु के आसन पर आसीन होगा. इस महायज्ञ में हम सभी भारतवासी अपनी अपनी आहुति दे. राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार और आततायियों के विनाश के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाए और एक बार फिर आकाश में गूंज उठे वन्दे मातरम्, वंदेमातरम्. किसी कवि ने ठीक ही कहा हैं.

जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं
वह ह्रदय नहीं पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.

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