इस्लाम धर्म पर निबंध | Essay on Islam In Hindi

Essay on Islam In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आज के लेख में हम इस्लाम धर्म पर निबंध आपके साथ साझा कर रहे हैं. मुसलमान अथवा इस्लाम धर्म को दुनियां के बड़े धर्मों में गिना जाता हैं. इस्लाम रिलिजन एस्से हिंदी में आज कक्षा 1,2,3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, तथा 10 के छात्रों के लिए 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में इस्लाम पर हिंदी निबंध आपकों यहाँ बता रहे हैं.

इस्लाम धर्म पर निबंध | Essay on Islam In Hindiइस्लाम धर्म पर निबंध | Essay on Islam In Hindi

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Essay on Islam In Hindi Language

इस्लाम दुनिया के नवीनतम धर्मों में से एक हैं. इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव ६२२ ई में मोहम्मद पैगम्बर ने किया. आज दुनिया की लगभग 1.5 अरब आबादी इस्लाम के अनुयायियों की हैं. दुनिया की कुल आबादी का पांचवा भाग मुस्लिम हैं. भौगोलिक दृष्टि से विश्व के केन्द्रीय भू भाग पर इस्लाम का आधिपत्य हैं.

इस्लाम पूर्व से पश्चिम तक एक जाल की तरफ फैला हुआ हैं. मोरक्को से मिडानाओं तक प्रचारित इस्लाम में उत्तर के उपभोक्ता देशों से लेकर दक्षिण के वंचित देश शामिल हैं. यह अमेरिका, यूरोप और रूस को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सामरिक चौराहे पर स्थित हैं.

वहीँ दूसरी तरफ अश्वेत अफ्रीका, भारत और चीन तक इस्लाम का बोलबाला हैं. इस्लाम किसी एक राष्ट्रीय संस्कृति व राष्ट्रीय सीमा की परिधि में बंधा हुआ धर्म नहीं है बल्कि एक सार्वभौमिक शक्ति के रूप में पूरी दुनिया में फैला हुआ हैं. ६२२ ई में इस्लाम की उत्पत्ति से लेकर अब तक इस्लाम धर्म के अनुयायियों में लगातार वृद्धि हो रही हैं.

इस्लाम का आविर्भाव सातवीं शताब्दी में एक छोटे से समुदाय के रूप में मक्का व मदीना में हुआ था. अपने दो अनुयायियों के साथ मोहम्मद पैगम्बर ने इस धर्म की नीव रखी. अपने उद्भव के कुछ ही वर्षों में इस्लाम के बैनर तले सभी अरबी जातियों को एकजुट कर दिया गया. अपने प्रादुर्भाव की पहली दो शताब्दियों के भीतर इस्लाम का प्रभाव वैश्विक स्तर पर फ़ैल गया.

इस्लाम ने अपने निरंतर विजय अभियान के माध्यम से सम्पूर्ण मध्य पूर्व उत्तरी अफ्रीका, अरेबियन प्रायद्वीप, ईरानी भूभाग, मध्य एशिया और सिन्धु घाटी के क्षेत्र को अपने प्रभाव क्षेत्र में ले लिया. यह विजय प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रही और बाद में इस्लाम को प्राचीन मिश्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताएं विरासत में प्राप्त हुई.

इस्लाम ने यूनान के दर्शन और विज्ञान को स्वीकार कर अपनी सुविधा के अनुसार सुधार करते हुए उसका इस्लामीकरण कर दिया. फारस की शासन कला की बारीकियों को सीखते हुए उन्होंने यहूदियों के कानून की तार्किकता और ईसाई धर्म के तरीको को भी अपनाया. पारसी द्वैतवाद और मेनेशिया की युक्तियों को इस्लाम में आत्मसात कर लिया गया.

इस्लाम मे अपनी पूर्वी विजय यात्रा मे महायान बौद्धों और भारतीय दर्शन और विज्ञान को स्वीकारने से कोई परहेज नही किया। इस्लाम के महान महानगरिय केंद्र बगदाद, काहिरा, कोरडोबा, दमिश्क और समरकन्द ऐसी भट्टियों मे परिवर्तित हो गए जिसमें इन सन्स्क्रतिक परंपरा की ऊर्जा को नए धर्म और राजनीति मे रूपांतरित किया जाने लगा।

इस्लाम धर्म के आध्यात्मिक और लौकिक, अलौकिक और व्यवहारिक, धार्मिक और धर्म निरपेक्ष में भेद नहीं करता। पश्चिमी ईसाई राजनीतिक विचारधारा में धर्म और राजनीति दोनों की समांतर सत्ता को स्वीकार किया गया हैं। इस्लाम धर्म और राजनीति के मध्य कोई भेद नहीं बल्कि दोनों को एक दूसरे से गुथा हुआ मानते हैं। इस्लाम राज्य व शासन शक्ति व सत्ता नियम और वफादारी में व्यापक विविधता को स्वीकार करता हैं।

यह एकता के सिद्धान्त पर आधारित हैं। हालांकि इस्लाम मे ऐसी राजनीतिक सोच की कार्ययोजना को अभी तक तैयार करना संभव नहीं हो सका हैं। जो इसके विभिन्न सान्स्क्रतिक प्रस्तरो के ऊपर खड़ा हो। पश्चिम के विपरीत धर्म और राज्य के संबन्धित क्षेत्र एक दूसरे से आच्छादित हैं। धर्म की राजनीति मे और राजनीति की धर्म मे झलक सभी इस्लामी संस्क्रती वाले देशों मे दिखाई देती हैं।

इस्लाम मे स्वतन्त्रता और अधिकार सत्ता और कर्तव्य हावी हैं। सभी इस्लामिक राज्यों मे व्यक्तिगत स्वतन्त्रता राज्य की सत्ता व शक्ति द्वारा मर्यादित हैं। इस्लामिक राजनीतिक चिंतन न केवल शासन के मामलों, राजनीति और राज्य से संबंध रखता है बल्कि यह व्यक्ति के स्वीकार्य व्यवहार व शासक और शासित दोनों की ईश्वर के प्रति नैतिकता व निष्ठा पर भी बल देती हैं।

इस्लामी राजनीतिक चिंतन को न तो परंपरागत भारतीय मानदंडों और न ही पाश्चात्य राजनीतिक मानदंडों से नापा जा सकता हैं। इस्लाम को केवल इस्लामी परंपरा की प्रष्ठभूमि मे ही समझा जा सकता हैं।

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