जैन धर्म की भारतीय संस्कृति को देन पर निबंध | Essay on Jainism Contribution To Indian culture In Hindi

Essay on Jainism Contribution To Indian culture In Hindi: जैन धर्म विश्व के प्राचीन धर्मों से एक हैं. ईसा पूर्व के भारतीय धर्मों में हिन्दू, बौद्ध तथा जैन धर्म मुख्य थे. महावीर स्वामी, ऋषभदेव समेत 24 तीर्थकर हुए आज के निबंध में हम जैन धर्म की भारतीय संस्कृति समाज को देन व योगदान के विषय में पढ़ेगे.

Essay on Jainism Contribution To Indian culture In Hindi

Essay on Jainism Contribution To Indian culture In Hindi

जैन धर्म का शाब्दिक अर्थ होता हैं जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म हैं. अर्थात जो जिन को मानने वाले हैं उन्हें जैन कहा जाता हैं. संस्कृत की जिन धातु से जैन बना हैं जिसका अर्थ जीतना होता हैं. इसका आशय होता है स्वयं के मन, वाणी, काय को जीतना. जैन धर्म में कर्म की प्रधानता हैं मनुष्य अपने कर्मों का ही फल पाते हैं.

जैन धर्म की भारतीय संस्कृति को देन

भारतीय संस्कृति को जैन धर्म की देन को अग्रलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता हैं.

आचरण की शुद्धता का प्रसार (Accuracy of conduct)

जैन धर्म ने आचरण की शुद्धता पर बल दिया और अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, सत्य आदि पंच महाव्रतों को जीवन का आवश्यक कर्तव्य बतलाया. इससे भारतीय संस्कृति में मानवतावादी विचारधारा का प्रसार हुआ.

संघ व्यवस्था (sangh vyavastha)

जैन धर्म में गृहस्थों तथा वीतरागियों के अलग अलग संघ थे. वीतरागी श्रमण कहलाते थे. तथा गृहस्थ श्रावक श्राविका कहलाते थे. गृहस्थों का यह कर्तव्य यह था कि वे श्रमण मुनियों का आदर करें और धर्म प्रचार में उनका सहयोग करें. इस व्यवस्था ने धर्म प्रचार के लिए नई शैली को जन्म दिया.

दार्शनिक प्रभाव (Philosophical influence)

जैन आचार्यों में स्यादवाद, अनेकांतवाद, ज्ञान सिद्धांत , दस धर्म लक्षणों आदि सिद्धांतों का प्रतिपादन करके दार्शनिक क्षेत्रों में नवीन विचारों को जन्म दिया. स्यादवाद के रूप में जैन धर्म ने भारतीय संस्कृति को एक अमूल्य दार्शनिक सिद्धांत दिया हैं. यह सिद्धांत बौद्धिक उदारता तथा सहिष्णुता का परिचायक हैं.

समानता एवं सहिष्णुता (Equality and tolerance)

जैन धर्म में श्रमण और श्रावक संघों में सभी को समान महत्व दिया गया. इससे समाज में समानता की भावना का प्रसार हुआ. जैन धर्म ने जाति प्रथा तथा ऊंच नीच के भेदभाव का विरोध किया और सामाजिक समानता पर बल दिया. इसके परिणाम स्वरूप हिन्दू धर्म में प्रचलित जाति प्रथा के बंधन ढीले पड़ने लगे तथा ब्राह्मणों के प्रभुत्व में कमी आई. जैन धर्म में क्षमा, त्याग, तृष्णा मुक्ति, नम्रता आदि दस धर्मों के पालन पर महत्व दिया गया तथा संयमशील रहकर सहिष्णुता का उपदेश दिया गया.

अहिंसावादी और संयमशीलNon-violent and sobering

जैन धर्म ने समाज में अहिंसा और कठोर संयम का प्रसार किया. अहिंसा परमो धर्म के वास्तविक जन्मदाता जैन ही हैं. यह सिद्धांत भारतीय समाज के लिए बड़ा लाभकारी सिद्ध हुआ. महावीर स्वामी ने पांच महाव्रतों के रूप में सामाजिक जीवन के उच्च आदर्श समाज के सामने प्रस्तुत किये.

साहित्य सम्बन्धी देन (Literary contribution)

प्राकृत तथा अपभ्रंश साहित्य के विकास में जैन लेखकों की देन उल्लेखनीय हैं. प्राकृत भाषा में रचित उनका साहित्य अत्यंत विस्तृत हैं. उस युग की बोलचाल की भाषाओं को उन्होंने साहित्यिक रूप प्रदान किया. जैन धर्म के मूल धार्मिक ग्रंथ 12 अंग, 12 उपांग, 10 प्रकीर्ण आदि प्राकृत भाषा में ही लिखे गये. जैन विद्वानों ने संस्कृत में भी अनेक ग्रंथों की रचना की. गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ में भी जैन विद्वानों ने रचनाएं लिखी.

जैनियों ने संस्कृत भाषा में भी उच्च कोटि के ग्रंथ लिखे. व्याकरण, काव्य, कोश, छंद, शास्त्र तथा गणित जैसे विशिष्ट तकनीकी विषयों पर भी इसके ग्रंथों का अभाव नहीं हैं.

कला के क्षेत्र में देन (In the field of art)

जैन धर्म ने भारतीय कला के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. जैनों ने अनेक मन्दिरों, स्तूपों, मठों, गुफाओं एवं मूर्तियों का निर्माण करवाया. जैनों ने अनेक गुफाओं का निर्माण करवाया, जिनमें उद्यागिरी तथा एलोरा की गुफाएँ उल्लेखनीय हैं.

मध्यप्रदेश में खजुराहो के जैन मन्दिर, काठियावाड़ की गिरनार तथा पालिताना की पहाड़ियों पर बने जैन मन्दिर, रणकपुर तथा पारसनाथ के मन्दिर स्थापत्य कला के श्रेष्ठ उदाहरण हैं. राजस्थान में आबू पर्वत पर बने देलवाड़ा के जैन मन्दिर वास्तुकला के द्रष्टिकोण से अत्यंत उच्चकोटि के माने गये हैं. मैसूर के श्रवण बेलगोला से प्राप्त गोमतेश्वर की मूर्ति बड़ी सुंदर और प्रभाव शाली हैं.

वैदिक धर्म पर प्रभाव (Influence on Vedic religion)

जैन धर्म के प्रभाव के कारण वैदिक धर्म में पशुबलि की प्रथा समाप्त होने लगी और जाति बंधन तथा ब्राह्मणों के प्रभुत्व में कमी आई.

समाज सेवा की भावना (Spirit of social service)

जैनों ने अनेक औषधालयों, धर्मशालाओं, पाठशालाओं, अनाथालयों आदि का निर्माण करवाया. इससे समाज पर अच्छा प्रभाव पड़ा और लोगों में दीन दुखियों, अनाथों, असहायों आदि की सहायता करने तथा उन्हें दान देने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला.

नारी स्वतंत्रता (Female freedom)

महावीर स्वामी ने नारियों की दशा सुधारने पर भी बल दिया. उन्होंने घोषित किया कि पुरुषों की भांति स्त्रियों को भी निर्वाण प्राप्त करने का अधिकार हैं. स्त्रियों को जैन संघ में प्रविष्ट होने का अधिकार दिया गया. इस प्रकार जैन धर्म में नारी स्वतंत्रता को बल मिला.

राजनीतिक क्षेत्र में योगदान (Contribution to the political field)

जैन धर्म के अहिंसा के सिद्धांत ने भारतीय शासकों को शांतिपूर्ण नीति अपनाने एवं जनता की भलाई के लिए प्रयत्नशील रहने की प्रेरणा दी.

यह भी पढ़े

आशा करता हूँ दोस्तों Essay on Jainism Contribution To Indian culture In Hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा, जैन धर्म के प्रभाव देन योगदान पर दिया गया निबंध भाषण आपकों पसंद आया हो तो अपने फ्रेड्स के साथ जरुर शेयर करे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *