Essay on Joint Family in Hindi & संयुक्त परिवार पर निबंध

Essay on Joint Family in Hindi – संयुक्त परिवार पर निबंध : नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज हम संयुक्त परिवार पर हिंदी निबंध (Joint Family Essay) अथवा जॉइंट फॅमिली एस्से आपके साथ उपलब्ध करवा रहे हैं. आज के आर्टिकल के माध्यम से आप जानेगे कि संयुक्त परिवार क्या है, संयुक्त परिवार के फायदे, संयुक्त परिवार का अर्थ मीनिंग व परिभाषा के बारे में इस निबंध में विस्तार से हम चर्चा करेगे.Essay on Joint Family in Hindi & संयुक्त परिवार पर निबंध

Essay on Joint Family in Hindi – संयुक्त परिवार पर निबंध

Hindi Essay on Joint Family: क्या आप संयुक्त परिवार का अर्थ जानते हैं. यदि नही तो चलिए जानते हैं. जॉइंट फॅमिली को अन्य शब्दों में अविभाजित परिवार, संयुक्त परिवार, विस्तारित परिवार व्यवस्था के रूप में भी जाना जाता हैं. यह एक ऐसा परिवार होता हैं जिसमें एक से अधिक पीढियां साथ रहती हैं.

माता-पिता, दादा दादी, चाचा-चाची, नाना नानी, बुआ आदि सभी एक ही छत के नीचे, जिनके लिए एक ही घर का चूल्हा हो उस परिवार को हम संयुक्त परिवार कहते हैं. परिवार के दो स्वरूप होते हैं. पहला संयुक्त तथा दूसरा एकल. संयुक्त परिवार प्राचीन भारतीय समाज का मूल स्वरूप है जो समय के बदलाव के साथ खंडित होकर वर्तमान के एकल परिवारों के रूप में सामने आया हैं.

Essay on Joint Family in Hindi

संयुक्त परिवार के कई सारे लाभ है जिनमें परिवार के सभी सदस्यों की वित्तीय भागीदारी होती हैं तथा जिसका मुखिया परिवार के सबसे बड़े व्यक्ति को माना जाता हैं. घरेलू सम्पति पर सभी सदस्यों का समान अधिकार होता हैं. एक ही रसोईघर में सभी का खाना पकता है तथा परिवार का मुखिया ही सभी की जरूरतों को पूरा करता हैं.

आधुनिक परिवारों में जिस तरह बड़ा बेटा शादी के बाद अपने बीबी बच्चों के साथ अलग हो जाता हैं. संयुक्त परिवार में वह विवाह के पश्चात पत्नी के साथ उसी घर में रहता हैं. परिवार में अधिकतर निर्णय बड़े व्यक्ति अर्थात परिवार के मुखिया द्वारा ही लिए जाते हैं.

संयुक्त परिवार में व्यक्ति को कम परेशानियों का समाना करना पड़ता हैं उनमें एक सामूहिक सुरक्षा का भाव रहता है जो उसके विकास में कारगर होता हैं. परिवार में एक अलिखित संविधान अर्थात कानून कायदे होते हैं जिसका पालन सभी को करना पड़ता हैं.

सभी के साथ सहयोग तथा समायोजन के साथ जीवन जीने का असली स्वरूप संयुक्त परिवार में ही देखने को मिलता हैं. बच्चों के लिए यह भरा पूरा परिवार होता हैं. जिनमें उनके खेलने के लिए साथी तथा पढने के लिए सहपाठी सहजता से मिल जाते हैं. लड़ाई झगड़ा होने पर बड़े उन्हें समझा बुझाने का कार्य करते हैं.

परिवार में कोई बड़ा कार्य शादी आदि की जिम्मेदारी किसी एक की न होकर सभी सदस्यों की होती हैं. तथा परिवार के इस स्वरूप में सभी की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा जाता हैं. बड़ो का सम्मान तथा छोटे से प्यार के गुण संयुक्त परिवार का मूल आधार होता हैं आपसी विश्वास तथा सहयोग से ही इस प्रकार के परिवार चलते हैं.

आधुनिक समय में घर से दूर नौकरी, शहरों की ओर पलायन, अधिक स्वेच्छा तथा स्वतंत्रता से जीवन जीने की तमन्ना के चलते संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं. शहरों में तो ये पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं जबकि कुछ गाँवों में आज भी ऐसे परम्परागत परिवार रहते है जिनमें 30-50 सदस्य एक साथ मिलजुलकर रहते हैं.

एक तरफ संयुक्त परिवार के कई फायदे है तो इसके कुछ नुक्सान भी हैं. अक्सर परिवार के इस तरह के स्वरूप में कुछ लोग परजीवी बनकर रह जाते हैं. जो दूसरों की कमाई पर ही अपना जीवन जीना पसंद करते हैं. कई बार बड़े परिवार में अच्छा कार्य करने वाले अथवा बड़े लोगों की यातना सभी को सहनी पड़ती हैं.

आपसी द्वंद्व के चलते माँ बाप अपने बच्चे को अच्छे विद्यालय में स्वेच्छा से दाखिला नहीं दिलवा पाते हैं. परिवार में अधिकतर अहम निर्णय बड़े लोगों द्वारा ही लिए जाते है

जिनमें प्रति सदस्य की सहमति एवं सहभागिता नहीं होती हैं. इन तमाम बातों के बावजूद संयुक्त परिवार कई मायनों में एकल परिवारों से बेहतर हैं. हमें चाहिए कि हम लुप्त होते परिवार के इस स्वरूप को बचाएं तथा आपसी सहयोग तथा विश्वास के साथ इस प्रकार के परिवार का निर्माण करे जिसमें सभी का सहयोग तथा संतुलन से सफलतापूर्वक जीवन को जिया जा सके.

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