दयालुता पर निबंध | Essay on Kindness in Hindi

Essay on Kindness in Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज हम दयालुता पर निबंध बता रहे हैं. दया को ईश्वरीय गुण माना गया हैं, वर्तमान जीवन में इसके दर्शन करना बेहद कठिन लगता हैं. लोग अपने स्वार्थों को पूरा करने की होड़ में जीवन की दौड़ में लगे हैं. दयालुता के निबंध, भाषण, स्पीच, अनुच्छेद, लेख आर्टिकल में हम जानेगे कि दयालुता क्या है जीवन में इसका क्या महत्व हैं.

Essay on Kindness in Hindi

Essay on Kindness in Hindi

जिस इन्सान के चरित्र में दयालुता का गुण होता है उसे सम्पूर्ण सह्रदय मानव कहा जाता हैं. प्रत्येक व्यक्ति में आंशिक रूप से दया के भाव विद्यमान होते हैं यदि वह उन्हें सिंचित करता है तो यह प्रफुल्लित होकर उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता हैं अन्यथा यह गुण लुप्त होने लगता हैं. अक्सर दयालुता या दया के भाव दीन, हीन, अक्षम, गरीब, मरीज या पीड़ित व्यक्ति के प्रति सहानुभूति के भावों को कहा जाता है, जिसमें वह पीड़ित व्यक्ति के दुःख को अपना बनाकर कम करना चाहता हैं.

महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के प्रति भी दयालुता के भाव शीघ्र उत्पन्न हो जाते हैं. जिस व्यक्ति में दूसरे के दुःख पीड़ा का एहसास नहीं हो उसे मनुष्य कहना गलत हैं. वह व्यक्ति पशुओं से अधिक कुछ नहीं हैं जिसमें दूसरों के प्रति सहानुभूति के भाव न हो. हमें जंगली जीवों एवं जानवरों के प्रति भी दयालुता के भाव रखकर उनकी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि हमारा जीवन परोपकार आधारित हैं हम जिस तरह पेड़ पौधों एवं प्रकृति पर निर्भर है उसी भांति कई जीव हम पर निर्भर हैं.

सभी प्रमुख धर्मों में अहिंसा, प्रेम, त्याग, सहानुभूति और दयालुता की शिक्षा दी जाती हैं. धर्म व्यक्ति को वांछित गुणों से युक्त बनाने की जीवन पद्धति है जिसे अपनाकर वह अपने व्यक्तित्व का परिष्कार कर सके. हिन्दू धर्म ग्रंथों में महिलाओं, बच्चों, वृद्धों, पीड़ित, बीमार एवं शोषित लोगों के प्रति दया के भाव रखने की बात कही जाती हैं. दयालुता के लिए जीवन में साधन सम्पन्न होने की आवश्यकता नहीं है अपने ह्रदय को उदार बनाकर इसे जीवन में अपनाया जा सकता हैं. यह कार्य उतना भी सरल नहीं हैं. जीवन में व्यक्ति वही कार्य करता है जिसमें पारितोषिक रूप में उन्हें मान, सम्मान अथवा धन की प्राप्ति होती हैं जबकि दयालुता के बदले केवल दूसरों को सुख की अनुभूति कराने की संतुष्टि और पुण्य प्राप्त हो सकता है जिन्हें पाने की चाह बहुत कम लोग रखते हैं.

एक संस्कारी व्यक्ति हमेशा परपीड़ा में सहानुभूति का प्रदर्शन करता हैं. जब किसी की आवश्यकता हो तो उसकी मदद करता है वह अपनी मदद के जरिये हमेशा लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयत्न करता हैं. अपने समय में से कुछ मिनट निकालकर पक्षियों को दाना डालकर भी अपनी सोई हुई दयालुता को जागृत किया जा सकता हैं. जीवन में हम जो कुछ लोगों को देते है बदलें में हमें भी वही प्राप्त होता हैं. कई सारे लोग जीवन में जब कठिनाइयों से घिरते है तो अपनी बेचारी का राग अलापते है, जबकि कुछ लोग थोड़ी सी मुश्किल में आते है तो उनकी मदद करने वाले हाजिर हो जाते हैं. जीवन में स्थितियां बस वैसी ही है चरित्र का फर्क है पहला इन्सान निर्दयी है जो किसी की मदद नहीं करता जबकि दूसरा सह्रदय व्यक्ति है सदैव औरों को अपने साथ लेकर चलता है.

आखिर में हम आपसे विनती करना चाहेगे जीवन में हमेशा एक दूसरे के साथ दयालुता के भाव रखिये जिससे सदैव एकजुटता का भाव जन्म लेगा. अन्य लोगों के जीवन को भी समझने का प्रयास करे, किसी की मदद करते समय सदैव याद रखे कि एक दिन आपकों इस कार्य का फल कई गुणा लौटकर आएगा.

दयालुता और भलाई – Kindness and Goodness

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