संचार के साधनों पर निबंध | Essay On Means Of Communication In Hindi

Essay On Means Of Communication In Hindi नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है आज हम संचार के साधनों पर निबंध लेकर आए हैं. प्राचीन समय और आधुनिक समय में इन संचार साधनों में मूलभूत अंतर देखा जा सकता हैं. हमारा निबंध, भाषण, अनुच्छेद, पैराग्राफ सभी संचार साधनों के बारें में संक्षिप्त रूप में जानकारी देगा.

संचार के साधनों निबंध Essay On Means Of Communication In Hindi

संचार के साधनों निबंध Essay On Means Of Communication In Hindi

अपने भावों, विचारों, संदेशों एवं सूचनाओं को दूसरे तक प्रेषित करना संचार कहलाता हैं. एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश समाचार और सूचना भेजने के लिए प्रयुक्त साधन ही संचार के साधन कहलाते हैं. सही संचार के लिए आवश्यक हैं कि संदेश पाने वाला व्यक्ति उस संदेश का वही अर्थ समझे जो कि संदेश देने वाले का हैं. साथ ही संदेश के महत्व के अनुसार उसे उचित समय पर पहुंचाना भी संचार का मुख्य उद्देश्य हैं.

डाकतार, टेलीफोन, समाचार पत्र, कम्प्यूटर, फैक्स, रेडियो, टेलिविज़न आदि संचार के प्रमुख साधन हैं. वर्तमान में संचार के साधनों में नयें आविष्कार हो रहे हैं. जिन्होंने हमारे जीवन में क्रन्तिकारी परिवर्तन ला दिया हैं. आज हम एक स्थान पर बैठकर दुनियां जहान की बातें कर सकते है सुन सकते है और देख सकते हैं. संचार के साधनों को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता हैं.

  1. व्यक्तिगत संचार के साधन- डाक, तार, टेलीफोन, इन्टरनेट, सोशल मिडिया आदि
  2. जनसंचार के साधन – रेडियो, अखबार, टेलीविजन आदि

डाकतार सेवा

डाकघर दूरस्थ स्थानों पर संदेश के साथ वस्तुएं व धन प्रेषण की सुविधा प्रदान करता हैं. भारत में आधुनिक डाक प्रणाली सन 1837 में प्रारम्भ की गई. पहला डाक टिकट 1852 में कराची में जारी किया गया. डाक विभाग लार्ड डलहौजी के समय 1 अक्टू 1854 को स्थापित किया गया. 15 अगस्त 1972 को पिनकोड, 1986 में स्पीड पोस्ट सेवा और 2004 में ई पोस्ट सेवा प्रारम्भ की गई. भारत में विश्व का सबसे बड़ा पोस्टल नेटवर्क हैं.

भारत को 8 विभिन्न डाक क्षेत्रों में बांटा गया हैं. पिनकोड छः अंकों की संख्या हैं. पहला अंक डाक क्षेत्र दर्शाता हैं पहले तीन अंक एक साथ वह यूनिट दर्शाते है जिसके अंतर्गत डाकघर पड़ता हैं. अंतिम तीन अंक छटाई यूनिट के अंतर्गत विशेष वितरण डाक घर दर्शाते हैं. डाकघर संदेश भेजने के लिए पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र, लिफाफा आदि सुविधाएं प्रदान करता हैं. पोस्टकार्ड जन सामान्य के लिए समाचार भेजने का सबसे सस्ता माध्यम हैं.

सामान्यतः समाचार कम हो तथा गोपनीय प्रकृति के न हो तो पोस्टकार्ड उपयोगी हैं. अधिक समाचार लिखने के लिए अंतर् देशीय पत्र तथा विस्तृत समाचार अलग कागज पर लिखकर भेजने के लिए लिफ़ाफ़े काम में लिए जाते हैं. अति महत्वपूर्ण पत्रों, कानूनी और व्यापारिक प्रलेखों को सुरक्षित भेजने के लिए रजिस्टर्ड पत्र की सुविधा उपलब्ध हैं. जल्दी डाक पहुंचाने के लिए स्पीड पोस्ट की सुविधा भी डाकघर ने उपलब्ध करवाई हैं.

वस्तु प्रेषण

हल्की और मूल्यवान वस्तुएं पार्सल द्वारा भेजी जा सकती हैं. ये पार्सल पंजीकृत व अपंजीकृत दोनों प्रकार से भेजे जा सकते हैं. इसका शुल्क पार्सल के वजन के आधार पर लगता हैं. अधिक मूल्यवान वस्तुएं या कागजात होने पर डाकघर इनके बीमा कराने की सुविधा भी उपलब्ध करवाता हैं. बुक पोस्ट के माध्यम से पत्रिकाएँ, पुस्तकें नमूने के पैकेट, बुक पैटर्न आदि को भेजा जा सकता हैं. यदि पार्सल प्राप्तकर्ता से उस वस्तु की कीमत भी सुपुर्दगी के समय वसूल करनी है तो इसे वीपीपी के माध्यम से भेजा जा सकता हैं.

धन प्रेषण

डाकघर द्वारा धन प्रेषण के लिए पोस्टल आर्डर, मनीआर्डर तथा बीमापत्र की सुविधा प्रदान की जाती हैं.

तार सेवाएं 

आवश्यक संदेश संक्षिप्त रूप में शीघ्र पहुंचाना हो तो तार सेवा का प्रयोग किया जाता हैं. देश की प्रथम तार लाइन 1851 में कलकत्ता और डायमंड हार्बर के मध्य शुरू की गई थी. इसमें शब्द के हिसाब से पैसे लगते थे. इसलिए संदेश में विभक्ति चिह्न न लगाकर संक्षेप में लिखते थे. तार सेवा की खोज वर्ष 1837 में सेमुअल मोर्स द्वारा की गई थी.

वायरलेस

बिना तार के सूचना पहुँचाना वायरलेस कहलाता हैं. वायरलेस विशिष्ट तरंग दैधर्य पर कार्य करता हैं. इसका उपयोग मुख्यतया हवाई जहाज संचालन, ख़ुफ़िया विभाग एवं पुलिस विभाग में तत्काल सूचना आदान प्रदान करने में होता हैं. मिलिट्री में प्रमुखता वायरलेस ही कारगर संचार व्यवस्था सिद्ध हो रही हैं.

टेलेक्स सेवा

वर्ष 1963 में राष्ट्रीय टेलेक्स सेवा आरम्भ की गई. प्रथम देवनागरी टेलेक्स का शुभारम्भ 1969 में दिल्ली में हुआ. टेलेक्स के माध्यम से संदेश टेली प्रिंटर मशीन से सीधे गन्तव्य पर भेजे जाते हैं. प्राप्तकर्ता के टेलेक्स पर बने कागज पर मुद्रित हो जाता हैं.

टेलीप्रिंटर

वर्तमान में तार भेजने हेतु टेलीप्रिंटर मशीन की सहायता ली जाती हैं. यह तार संदेश भेजने की आधुनिक एवं नवीन साधन हैं यह एक प्रकार का टेलीग्राफ ट्रांसमीटर यंत्र है जिसकी सहायता से 60 से भी अधिक शब्दों को प्रति मिनट एक साथ कई स्थानों पर भेजा जा सकता हैं.

टेलीफोन

टेलीफोन व मोबाइल के माध्यम से एक कमरे में बैठा व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से बात कर सकता हैं. एक राज्य में बात करने से दूसरे राज्य में बात करने के लिए एसटीडी व विदेशों में बात करने के लिए ISD की सुविधा उपलब्ध हैं. टेलीफोन में रिसीवर, माइक्रोफोन, ट्रांसमीटर आदि होते हैं. माइक्रोफोन हमारी आवाज को विद्युत् तरंगों में बदल देता हैं जिन्हें ट्रांसमीटर द्वारा गंतव्य तक भेजा जाता हैं. गन्तव्य पर टेलीफोन का ट्रांसमीटर उन तरंगों को प्राप्त कर रिसीवर में भेजता हैं जो उन्हें पुनः ध्वनि तरंगों में परिवर्तित कर देता हैं. टेलीफोन का आविष्कार ग्राहम बेल ने वर्ष 1856 में किया था.

फैक्स

यह टेलीफोन लाइन से जुड़ा एक छोटा सा यंत्र हैं. जो किसी प्रपत्र पर लिखित मुद्रित व चित्रित संदेश टेलीफोन लाइन की सहायता से कुछ ही क्षणों में दूसरे स्थान पर प्रेषित कर देता हैं.भेजे गये स्थान पर स्थित फैक्स मशीन उसे उसी रूप में मुद्रित एवं चित्रित कर देता हैं.

मोबाइल फोन

मोबाइल फोन के आविष्कार ने सूचना के क्षेत्र में क्रांति ला दी हैं. अब हम चलते फिरते यात्रा के दौरान कही भी किसी भी समय एवं स्थान से मोबाइल फोन के माध्यम से अन्य व्यक्ति से सम्पर्क कर अपनी बात कह सुन सकते हैं. यह आकार में बहुत छोटा होने कारण आसानी से जेब में रखा जा सकता हैं. यह फोन बेतार के तार व रेडियो तकनीक पर काम करता हैं.

मोबाइल सेवा का उपयोग करने हेतु हमें मोबाइल फोन सेवा प्रदान करने वाली कम्पनी से सिम कार्ड लेना पड़ता हैं. जिसे मोबाइल सेट में निर्धारित स्थान पर लगाने के बाद फोन से बातचीत की जा सकती हैं. अब तो मोबाइल फोन के माध्यम से लिखित संदेश, फोटो, पिक्चर आदि भी शीघ्रता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जा सकते हैं.

विडियो कांफ्रेसिंग

इंटरनेट के माध्यम से अलग अलग स्थान पर बैठकर कई व्यक्ति एक साथ बिना एक दूसरे के सामने बैठे हुए विचार विमर्श कर सकते हैं. वे एक दूसरे की तस्वीरे भी देख सकते हैं. इसे विडियो कांफ्रेसिंग कहते हैं.

इंटरनेट

इंटरनेट व्यापक कंप्यूटर नेटवर्क हैं. इंटरनेट कंप्यूटर में संग्रहित सूचना को विश्वभर में वितरित करने तथा दूरस्थ स्थित विभिन्न कंप्यूटर उपभोक्ताओं के मध्य सूचनाओं के आदान प्रदान का महत्वपूर्ण साधन हैं. इसके लिए कंप्यूटर को टेलीफोन से जोड़ना पड़ता हैं. विश्व के विभिन्न देशों में इन्टरनेट कनेक्शन के लिए इंटरनेट नियत्रण संगठन ने प्रत्येक देश में कुछ इंटरनेट सेवा प्रदायक नियुक्त किये हैं. भारत में विदेश संचार निगम लिमिटेड को इस हेतु नियुक्त किया गया हैं. इन्टरनेट सर्वर पर उपभोक्ता को आवंटित स्थान वेबसाइट कहा जाता हैं.

ई मेल

कंप्यूटर के माध्यम से किसी व्यक्ति के निश्चित पते पर संदेश भेजने अथवा प्राप्त करने की क्रिया को ई मेल या इलेक्ट्रॉनिक मेल कहते हैं. संक्षेप में ई मेल किसी कंप्यूटर नेटवर्क पर उपलब्ध डाक व्यवस्था हैं.

समाचार पत्र व पत्रिकाएँ

समाचार पत्र व पत्रिकाएँ लोगों को समाचार, संदेश, लेख, खेल समाचार, बाजार भाव व मौसम की जानकारी मिलती हैं. जहाँ रेडियो और दूरदर्शन की सुविधा नहीं हैं. वहां अखबार और पत्र पत्रिकाओं का महत्व बढ़ जाता हैं.

रेडियो

रेडियो के द्वारा समाचार कुछ ही सैंकंड में विश्व के सभी कोनों में पहुचाये जा सकते हैं. रेडियो में ध्वनि तरंगों को विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के माध्यम से प्रसारित किया जाता हैं जो आसानी से गन्तव्य तक पहुँच जाता हैं. ये विद्युत् चुम्बकीय तरंगे वायुमंडल में प्रसारित होने के बाद आयन मंडल ए टकराकर वापस आती हैं. जिन्हें रेडियो का ट्रांसमीटर पकड़कर ध्वनि तरंगों में परिवर्तित कर देता हैं. रेडियो द्वारा कोई समाचार सैंकडस में दुनिया के सभी कोनों में भेजा जा सकता हैं.

टेलीविजन (दूरदर्शन)

टेलीविजन द्वारा ध्वनि के साथ चित्र भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रसारित की जाती हैं. इसमें संदेश देने वाला टेलीविजन पर संदेश देता हुआ दिखाई देता हैं. जैसे हमारे सामने बैठकर बात कर रहा हो. वर्तमान में टेलीविजन प्रसारण कृत्रिम उपग्रहों की सहायता से किया जाता हैं. इसमें फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव से बिम्बों का प्रकाश तरंगों को विद्युत् चुम्बकीय तरंगों में परिवर्तित कर सुदूर स्थानों पर कृत्रिम उपग्रहों की सहायता से प्रसारित किया जाता हैं. ये तरंगे गन्तव्य पर टेलीविजन सेट द्वारा प्राप्त कर पुनः ध्वनि एवं चित्रों में बदल जाती हैं. और हमें हुबहू आवाज एवं चित्र दिखाई देते हैं.

प्रसार भारती

प्रसार भारती देश के सार्वजनिक प्रसारण सेवा हैं और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन इसके दो घटक हैं. प्रसार भारती का गठन 23 नवम्बर 1997 को किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों को सूचना, शिक्षा तथा मनोरंजन प्रदान करने और रेडियो तथा टेलीविजन पर प्रसारण कर संतुलित विकास सुनिश्चित करना हैं. प्रसार भारती का मुख्यालय दिल्ली में हैं.

आकाशवाणी

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1920 के दशक में हुई. पहला कार्यक्रम 1923 में बम्बई के रेडियो क्लब द्वारा प्रसारित किया गया. 1957 में आल इंडिया रेडियो का नाम बदलकर आकाशवाणी कर दिया गया.

दूरदर्शन

भारत में दूरदर्शन का पहला प्रसारण 15 सितम्बर 1951 को प्रयोगात्मक आधार पर किया गया. आकाशवाणी के भाग के रूप में टेलीविजन सेवा की नियमित शुरुआत दिल्ली 1956 मुंबई 1972 कोलकाता 1975 और चेन्नई में 1975 में हुई. दूरदर्शन की स्थापना 15 सितम्बर 1976 को हुई. उसके बाद रंगीन प्रसारण की शुरुआत नई दिल्ली में एशियाई खेलों के दौरान हुई.

कृत्रिम उपग्रह

कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित कर दिए जाते हैं. ये पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाते हैं. इनसे हमें कई तरह की सूचनाएं प्राप्त होती हैं. इन उपग्रहों से दुर्गम स्थानों पर दूरदर्शन और टेलीविजन सेवाओं का विस्तार सम्भव हो सका हैं. संचार उपग्रह से मौसम सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होती हैं.

भारत का पहला कृत्रिम उपग्रह आर्यभट्ट था जो 19 अप्रैल 1975 को बैकानूर से प्रक्षेपित किया गया. इसरो ने 1983 में इनसेट प्रणाली स्थापित की. इसरो ने संचार उपग्रह जीसेट 10 का 29 सितम्बर 2012 को प्रक्षेपण किया. इनसेट 2 बी 23 जुलाई 1994 को प्रक्षेपित किया जिसने देश में संचार सुविधाओं की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1994 से दूरदर्शन पर मैट्रो चैनल व अन्य क्षेत्रीय चैनलों की शुरुआत इनसेट 2 बी के माध्यम से की हैं.

ई कॉमर्स

ई कॉमर्स का अर्थ है इंटरनेट के माध्यम से व्यापार करना अर्थात वस्तुओं एवं सेवाओं का इंटरनेट के जरिये क्रय विक्रय करना ही ई कोमर्स कहलाता हैं. ई बैंकिंग, ई शॉपिंग एवं ई बिजनेस इत्यादि ई कोमर्स के भाग हैं.

संचार के साधनों का जीवन शैली पर प्रभाव (Effect of Communication on Lifestyle)

  • संचार व यातायात के साधनों ने आज सम्पूर्ण विश्व को बहुत निकट ला दिया हैं.
  • यातायात के साधनों से जहाँ शीघ्र आवागमन सम्भव हुआ तो संचार के साधनों ने विश्व को आपस में शीघ्र ही सम्पर्क योग्य बना दिया. आज अंतरिक्ष में भी व्यक्ति धरती पर बैठे व्यक्ति से बात कर सकता हैं.
  • यातायात व संचार के साधन वैश्विकरण का आधार हैं.
  • शिक्षा के क्षेत्र में संचार के माध्यम से आज नवीन से नवीन ज्ञान एवं जानकारियों का ज्ञान तुरंत सभी स्थानों पर प्राप्त हो जाता हैं. शिक्षण सूत्र में विभिन्न दृश्य एवं दृश्य श्रव्य माध्यम अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं.
  • तकनीकी क्षेत्र में दूरदर्शन एवं इन्टरनेट की सहायता से प्रायोगिक ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सकता हैं. सभी यंत्रों एवं उपकरणों के प्रयोग को प्रत्यक्ष रूप से प्रयोगशालाओं के अतिरिक्त दूरदर्शन व इंटरनेट पर देखा जा सकता हैं. एवं उनका व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता हैं.
  • परिवहन एवं संचार साधनों के विकास ने मानव जीवन को सरल एवं सुविधाजनक तो बना दिया है लेकिन इसके कारण वातावरण में प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है, जो मानव जीवन के लिए हानिकारक हैं.
  • वर्तमान में कंप्यूटर एवं गणक मशीनों के प्रयोग ने हमें उन पर आश्रित बना दिया हैं. इससे हमारी मानसिक दक्षता का हास हुआ हैं. जो गणनाएं पहले बच्चें स्वयं आराम से कर लेते थे वे अब बिना केलकुलेटर की सहायता के करना असम्भव सा हो गया हैं.
  • रोग निदान की अत्याधुनिक तकनीकों के प्रयोग ने चिकित्सा विज्ञान को काफी उन्नत बना दिया हैं. अब घातक रोगों के ईलाज में सुविधा हो गई हैं. परन्तु इन तकनीकों यथा MRI एक्सरे कीमोथेरेपी रेडियो थैरेपी आदि के प्रयोग से मानव शरीर में अन्य घातक प्रभाव परिलक्षित होने लगते हैं जो अन्य रोगों को जन्म देते हैं.
  • संचार के नवीनतम साधनों यथा इंटरनेट आदि से हमें हर प्रकार की जानकारी घर बैठे कंप्यूटर पर बहुत ही कम खर्च में उपलब्ध हो जाती हैं.

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