मेरा आदर्श गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi

मेरा आदर्श गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi: मेरा भारत सोने की चिड़ियाँ कहलाता था, जब देश का मतलब मेरे हरे भरे गाँव तथा वहां के सुखी सम्पन्न लोग थे. भारत की 80 फीसदी आबादी इन्ही गांवों में वास करती थी, मगर आज 60 प्रतिशत लोग ही गाँवों में रहते है भारत का मूल स्वरूप अब गाँवों को छोड़कर मिलियन स्मार्ट सिटी में देखा जा रहा है तभी हम पिछड़े हैं आज मैं अपने आदर्श गाँव पर भाषण निबंध आपकों बता रहा हूँ.

मेरा आदर्श गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi

Essay on my ideal village in hindi

मेरा गाँव कुछ ही घरों से बनी एक छोटी बस्ती हैं. जहाँ के घर मिट्टी के है जिनकी छतों पर खपरोल ही ठंड, गर्मी व बरसात से बचाव करते हैं. घर के आँगन में बँधी एक बैलों की जोड़ी, कुछ बकरियां व मुरगियां तथा घर के ठीक सामने लहलहाते हरे भरे खेत खलिहान, ये मेरा आदर्श एवं प्रिय गाँव है जहाँ मेरा जन्म हुआ बचपन की यादे इसी धरा में रसी बसी हैं.

ये मेरे गाँव का दृश्य है जहाँ सवेरे की शुरुआत पक्षियों की चहचाहट से होती हैं. सूर्य की लालिमा हर रोज नयें सवेरे का कुंकुम थाल लेकर स्वागत करती प्रतीत होती हैं. पेड़ों की डाल पर पंछी भौर का सत्कार करते हैं. सूरज की किरण धरती पर पड़ते ही जनजीवन अपने क्रियाकलापों में लग जाता हैं.

कृषक अपने बैलों के संग कंधे पर हल उठाए खेतों की ओर चल निकलते हैं. बैलों के गले की घंटियाँ तथा पैरों के घुंघरू एक विचित्र सरगम की तान छेड़ते हैं जो कर्णप्रिय होने के साथ साथ अपनेपन का एहसास दिलाती हैं. ऐसा सुंदर प्यारा सा हैं मेरा गाँव.

मेरे गाँव के वे सपूत तो दिन भर कड़ी धुप में अपने सुखों का नौछावर कर मिट्टी से सने शरीर के साथ खेती कर धन उपजाते है व धरा को हरी भरी बनाते हैं. उनके पसीने की सुगंध के रूप में चावल, गेहूं देशवासियों के पेट भरता हैं. गाँव के बूढ़े किसान के परि श्रम से भूखों का पेट भरता हैं, युवा शरीरो में नया रक्त प्रवाहित होता है तथा देश के प्रबुद्ध जनों के मन मस्तिष्क में नई सोच व ऊर्जा प्रदान करते हैं.

यह वर्ग देश के लोगों के लिए नई योजनाएं, नीतियाँ व समस्याओं के समाधान की राह सुझाते हैं. जिसकी बदौलत देश दुनियां में भारत की ख्याति बढ़ती हैं. इस तरह देश की तरक्की विकास तथा सम्रद्धि के साथ गाँव एवं गाँव के लोग केंद्र में होते हैं.

राजस्थान के पश्चिम इलाके में बसा मेरा गाँव फसल के लिए इंद्र देव की मेहरबानी पर ही निर्भर रहता हैं. मगर भारत सरकार तथा राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से हमारे गाँव तक नहर के पानी को पहचाने के कार्य ने ग्रामीण कृषकों को नया जीवन दिया हैं. वर्षों से सूखे पड़े खेतों में अब लहलहाती फसलें उगाई जा रही हैं. बंजर भूमि में सोना बरस रहा हैं.

ईश्वर स्वयं मानों मेरे गाँव को तरक्की के रास्ते पर लाने का जिम्मा ले चुके हैं. मुझे याद हैं कुछ वर्ष पूर्व जब गाँव में बिजली का पहला पोल लगा तो सभी ने उस दिन को दिवाली की तरह मनाया, अब हर घर रौशनी से न सिर्फ नहलाया हैं बल्कि कृषि कार्य में भी विद्युत् सहायक बनी हैं. बिजली से चलने वाली पानी की मशीनों ने इंद्र देव की निर्भरता को कुछ कम किया हैं.

गाँव के कामगार व युवा छोटा मोटा काम यही रहकर कर लेते हैं इससे बेरोजगारी कम हुई हैं. गाँव की महिलाओं को पहले पूरा दिन कई कोस दूर से पानी लाने में बिताना पड़ता था, अब तो घर के द्वार जल का नल लग चूका हैं.

हम जब कभी अपनी गाँव से दूर किसी दूसरे स्थान पर काम या नौकरी कर रहे होते हैं तब भी हमारे साथ गाँव की यादे रसी बसी रहती हैं. आदर्श गाँव का मेरा सपना हमेशा दिल में बसा रहता हैं. हर क्षण अपने गाँव अपने लोगों की कामयाबी उनकी यात्रा को लेकर मन उद्देलित हो उठता हैं. मेरी जन्मदायिनी मातृभूमि ही मेरे लिए स्वर्ग की धरा हैं जो मुझे अगाध प्रेम करती है, तथा मेरा दिल भी पूर्ण रूप से उसकी सेवा में समर्पित रहता हैं.

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