Essay On Namaz In Hindi सच्ची इस्लामिक नमाज पर निबंध

नमाज पर निबंध Short Essay On Namaz In Hindi Language: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज का निबंध नमाज पर दिया गया हैं. इस्लाम के अनुयायियों के लिए नमाज एक अहम क्रियाकलाप है जिन्हें दिन में पांच वक्त अदा किया जाता हैं. आज का निबंध नमाज क्या है सच्ची नमाज कैसे पढ़ते है क्या पढ़ते है आयत और सीखने का तरीका हिंदी में दिया गया हैं. स्टूडेंट्स के लिए नमाज इन हिंदी एस्से स्पीच अनुच्छेद लेख आर्टिकल भाषण पैराग्राफ आप इस सामग्री से तैयार कर सकते हैं.

Essay On Namaz In Hindi नमाज पर निबंध

Essay On Namaz In Hindi नमाज पर निबंध

भारत बहुधार्मिक देश है जहाँ सभी नागरिकों को अपनी इच्छा के मुताबिक धर्म के पालन करने की स्वतंत्रता हैं भारत में करीब 20 करोड़ मुस्लिम धर्म अनुयायी रहते हैं इस्लाम मानने वाले एक ही ईश्वर अर्थात अल्लाह में विश्वास करते है तथा उन्ही की इबादत करते हैं. कुरान उनकी सबसे पवित्र धार्मिक किताब हैं जिनका वे जीवन में अमल करते हैं. अपने ईश्वर की इबादत के लिए एक मुसलमान दिन में पांच बार नमाज अदा करता हैं. इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान अर्थात फर्ज में से नमाज भी एक हैं.

इस्लाम में नमाज पढ़ने की प्रथा शुरुआत से मानी जाती हैं. कहते है जब 7 वीं सदी में इस्लाम का प्रदुर्भाव हुआ तभी से ही नमाज पढ़ी जाती हैं. यह एक उर्दू शब्द है जिसका आशय होता है सलाह. सलाह अरबी शब्द है जो कुरान में बार बार प्रयुक्त किया जाता हैं. सामान्य तौर पर नमाज अदा करने का स्थान मस्जिद को ही माना जाता हैं तथापि व्यक्ति अपने घरों में भी दिन की पाँचों नमाज अदा करते हैं कुरान के मुताबिक़ अल्लाह उन्हें भी कबूल मानता हैं.

नमाज अदा करने का उपयुक्त स्थान घर अथवा मस्जिद ही होता हैं. अल्लाह के फरमान के मुताबिक़ स्वयं की सम्पति पर ही नमाज अदा की जा सकती हैं. फिर चाहे वो आपका खेत हो या घर मगर जबरन किसी सार्वजनिक स्थल जैसे सड़क या पार्क को बंदी बनाकर नमाज अदा करना दीन के खिलाफ माना जाता हैं. नमाज से कुछ वक्त पहले मौलवी मस्जिद से अजान देता हैं जिसका तात्पर्य सभी इस्लाम बन्धुओं को नमाज पढ़ने के लिए तैयार हो जाने का संकेत हैं. यदि आस पडौस में मस्जिद है तो लोग वहां के लिए प्रस्थान करते है ताकि वहां संयुक्त रूप से नमाज अदा की जा सके.

स्त्री और पुरुष दोनों को ही नमाज पढ़ने की स्वीकृति हैं नमाज पढ़ने से पूर्व वजू करना जरूरी माना जाता हैं. वजू का आशय नमाज पढ़ने से पूर्व हाथ, पाँव, हथेलियाँ, नाक, कान और मुहं धोकर सिर पर गीले हाथ फेरकर कुल्ला करना माना जाता हैं जहाँ जल की कमी होती है वहां बिना जल के वजू का भी प्रावधान हैं.नमाज के लिए मस्जिद में जाने से पूर्व सभी मुसलमान वजू करते हैं. इसके बाद ही सभी एक साथ बैठकर नमाज पढ़ते हैं.

प्रत्येक मुसलमान के लिए प्रति दिन पाँच वक्त की नमाज अदा करने का विधान हैं सवेरे की पहली नमाज को नमाज़ -ए-फ़ज्र कहा जाता है जो सूर्य उदय के पूर्व ही पढ़ी जाती हैं. नमाज-ए-ज़ुहर दिन की दूसरी नमाज है जो दोपहर के समय पढ़ी जाती हैं इसके बाद तीसरी नमाज सूर्यास्त से पूर्व पढ़ी जाती है जिन्हें नमाज -ए-अस्र कहा जाता हैं चौथी नमाज सूर्यास्त के समय होती है जिन्हें नमाज-ए-मग़रिब कहते हैं. नमाज-ए-ईशा रात की एकमात्र नमाज है जो सूर्यास्त के ठीक डेढ़ घंटे बाद पढ़ी जाती हैं.

नमाज अदा करने की अलग विधि विधान हैं मस्जिद में पढ़ी जाने वाली नमाज में एक व्यक्ति आगे खड़े होकर सभी को विधि वत नमाज पढवाता हैं. नमाज में कुरान की पहली सूरा को पढ़ा जाना जरुरी माना गया हैं. प्रत्येक व्यक्ति नमाज पढ़ते समय मक्का की ओर मुख करके खड़ा होता है तथा विधान के मुताबिक़ झुककर सिर टेककर जमीन चूमता है इसे रूकू कहते हैं कुरान के मुताबिक़ नमाज बेहयाई और गुनाह से बचाने के साथ ही मोमिन की इच्छाओं को अल्लाह से मांगने का एकमात्र जरिया माना गया हैं.

इस्लाम में दिन की पांच नमाज को छोड़कर कुछ अन्य नमाजों के विधान भी हैं जिनमें शुक्रवार के दिन की नमाज को जुम्मे की नमाज कहा जाता हैं. यह सूर्यास्त के समय पढ़ी जाती है इसमें मस्जिद के इमाम का भाषण होता है जिन्हें खुतबा कझा जाता हैं इसके अतिरिक्त ईदुलफितर की नमाज विशेष है जो रमजान पूर्ण होने पर पढ़ी जाती हैं. सभी नमाजों में तहज्जुद नमाज़ को विशेष महत्व प्राप्त हैं नमाज़ जनाज़ा किसी मुसलमान की अंतिम यात्रा के समय पढ़ा जाता है.

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