राष्ट्र प्रथम पर निबंध | Essay On Nation First In Hindi

Essay On Nation First In Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं आज हम राष्ट्र प्रथम पर निबंध लेकर आए हैं. मेरा देश मेरा गौरव अथवा राष्ट्र प्रथम विषय पर अनुच्छेद, लेख, निबंध, भाषण बच्चों के लिए बता रहे हैं. सरल भाषा में लिखे इस निबंध देश पहले का उपयोग स्टूडेंट्स अपनी परीक्षा के लिए याद कर सकते हैं, चलिए इसे पढ़ते हैं.

 Essay On Nation First In Hindi

Essay On Nation First In Hindi

धर्म बड़ा है या राष्ट्र यह बहस सदा से चली आ रही हैं. दुनियां के किसी सम्पन्न एवं विकसित राष्ट्र का उदाहरण ले लीजिए, जहाँ के लोगों ने धर्म, निजी स्वार्थ से सर्वोच्च महत्व राष्ट्र को दिया हैं. धर्म राष्ट्र की सत्ता को निर्देशित कर सकता हैं मगर वह राष्ट्र को चला नहीं सकता. खाड़ी के अरब देशों अथवा पाकिस्तान का उदाहरण हमारे सामने हैं. 1947 में दो कौमी नजरिये के सिद्धांत पर बने इस देश के 7 दशक में दो टुकड़े हो चुके हैं. धर्म भीरुता एवं धार्मिक कट्टरवाद राष्ट्रीय नीति बन चुकी हैं आज भी पाकिस्तान में अलग बलूचिस्तान, सिंध देश की मांग जोरों पर हैं, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वहां के लोगों ने धर्म को राष्ट्र से पूर्व रखा.

समय समय पर भारत में भी राष्ट्र से पहले धर्म को स्थापित करने के प्रयास हुए हैं पंजाब का खालिस्तान आंदोलन इसका उदाहरण हैं. देश की आजादी के लिए जान कुर्बान करने वाले वीरों भगत सिंह, गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे सेनानी हमेशा धर्म की बजाय राष्ट्र प्रथम के विचारों के हिमायती थे. विद्यार्थी ने कानपुर में हिन्दू मुस्लिम दंगों में मुस्लिम लोगों के बचाव करते हुए शहादत पाई थी. 1857 से 20 वी सदी के प्रथम दशक तक भारत के स्वतंत्रता सेनानी राष्ट्र प्रथम के विचारों को लेकर आगे बढ़े तो अंग्रेज सरकार ने भी घुटने टेक दिए थे.

मगर जब राष्ट्र के साथ धर्म का टकराव हुआ तो मुस्लिम लीग का जन्म हुआ, जिसकी विचारधारा में धर्म सर्वोपरि था इसका ही नतीजा था कि भारत का विभाजन हुआ और देश दो भागों में बंट गया. राष्ट्र के प्रहरी सुरक्षा बलों के जवानों में राष्ट्र प्रथम एवं तिरंगे के प्रति अपने भाव जुड़े है तब तक ही राष्ट्र की सीमाएं सुरक्षित हैं. कश्मीर पर पाकिस्तानी हमले के समय अब्दुल हमीद की शहादत धर्म के विचार पर राष्ट्र की विजय का प्रतीक थी.

धर्म एवं राष्ट्र हित का टकराव समय समय पर होता रहा हैं. अपने राष्ट्र से प्रेम करने वाले प्रथम स्थान राष्ट्र को ही देते है क्योंकि धर्म व्यक्ति की निजता का मामला है वही राष्ट्र बहुजन सुखाय, बहुजन हिताय की विचारधारा रखता हैं. महाभारत का युद्ध एक ही कुल के दो परिवारों के मध्य लड़ा गया था, मगर खून के रिश्ते की बजाय जो राष्ट्र की राह में रोड़ा बना उसे वध योग्य माना गया. कुछ विचारक धर्म को अफीम मानते है, जबकि मेरे विचार में यह व्यक्ति की आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास की वस्तु है जो सम्मान का पात्र हैं. मगर उसे राष्ट्र के साथ जोड़कर अथवा उतने उच्च दर्जे तक नहीं ले जाना चाहिए. IS, तालिबान और मुजाहिद जैसे धार्मिक कट्टरवादी संगठनों ने धर्म को राज्य से सर्वोच्च स्थापित करना चाहा, जिसके नतीजे हम देश रखे हैं. भारत बहुधर्मी देश है जहाँ अक्सर राजनेता धार्मिक कार्ड खेलकर समाज को विघटित करते हैं, अंग्रेजों ने भी इसी सहुलियत का काम लिया और लोगों को विभाजित कर अपनी सत्ता मजबूत की.

देश में कई राजनीतिक दल विभिन्न वर्ग एवं जातियों की साम्प्रदायिक राजनीति करते हैं, उनके लिए राष्ट्र हित से पूर्व अपनी जाति एवं वर्ग का हित सर्वोपरि हैं. इन नेताओं का एक ही धर्म है वह है समाज को बांटकर सत्ता तक पहुंचना. युवाओं के भारत देश की सर्वोच्चता तभी स्थापित की जा सकेगी, जब प्रत्येक नागरिक अपने स्व हितों की आहुति देकर राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानेगा.

राष्ट्र एक बड़े जनसमूह की सम्मिलित भावनाओं का स्वरूप हैं. भूखंड उसका एक अंग हैं. एक नागरिक से यह अपेक्षा की जाती है कि उसके मन में सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना होनी चाहिए. यही भाव उन्हें वतन की सीमाओं की सुरक्षा के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा करती हैं. बड़ी बड़ी डींगे मारने या भाषणों से देशभक्ति सिद्ध नहीं होती हैं. बल्कि अपने स्तर पर देश के लिए कुछ कर गुजरने के भाव ही उससे राष्ट्र सपूत बनाता हैं.

एक राष्ट्र एक वृहत परिवार की अवधारणा हैं, जिस तरह हमारे परिवार के किसी सदस्य की सुरक्षा खतरे में हो अथवा उसका जीवन संकट में हो तो हम सब कुछ दांव पर लगा देते हैं. वैसे ही भारत राष्ट्र हमारा एक बड़ा परिवार हैं जिसकी अस्मिता, सुरक्षा, एकता, अखंडता एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव तन, मन, धन से सेवा करने के लिए तत्पर रहना चाहिए.

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