राष्ट्रीय एकता पर निबंध

Essay On National Unity In Hindi: भारत की सभ्यता और संस्कृति अतीव प्राचीन है| भारत प्राचीन काल से अखण्ड भारतवर्ष के नाम से जाना जाता रहा है| जिसकी सीमाएँ सुदूर पूर्व से लेकर पश्चिम की अरब की खाड़ी तक जाती थी| राजनीतिक कारणों से तथा विदेशी आक्रमणों के चलते, विशेष रूप से भारत विभाजन की बड़ी घटना के बाद हमारे देश में राष्ट्रीयता बोध में कई प्रकार के बदलाव देखे और महसूस किये है भारत पर किये गये मुगलों के आक्रमणों द्धारा भारत की सभ्यता और संस्कृति पर गहरी चोट की गई जिससे भारतीय समाज में एक प्रकार की निराशा व्याप्त हो गयी थी|

राष्ट्रीय एकता पर निबंध- Essay On National Unity In Hindi

Rashtriya Ekta Par Nibandh-उस काल में भक्तिकालीन संतो, कवियों ने भारतीय समाज में एकीकरण की अलख जगाई| लेकिन ईस्ट इण्डिया कंपनी के माध्यम से अंग्रोजो हुकूमत की गुलामी के कारण हमारे देश की जनता स्वयं को और भी अधिक आहात महसूस करने लगी| जिसके परिणामस्वरूप समूचे भारत देश में आजाद का आन्दोलन फैल गया और प्रत्येक नागरिक देश को आजाद कराने के लिए एक सामान राष्ट्रीयता बोध में रम गया| गुलामी में हारी हुई मानसिकता आन्दोलन की क्रान्ति में एक नजर आने लगी| परिणामस्वरूप 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ तथा एक राष्ट्र और उसके राष्ट्रीय प्रतिको के आजाद होने का सपना साकार हुआ|

जिस भूमि पर हम जन्म लेते है पलते बड़े होते है -वह हमारी जन्मभूमि कर्मभूमि तथा हमारा राष्ट्र होती है| उसके प्रीति गहरा प्रेम ही राष्ट्र -बोध की भावना या राष्ट्रीयता की भावना होती है| हम सदैव उसके गौरव की रक्षा करे तथा साथ ही उसकी संस्कृति, उसके प्राक्रतिक संसाधनों तथा उसकी आर्थिक समर्धि में योगदान करने का दायित्व प्रत्येक नागरिक का है| यह भी आवश्यक है कि हम ऐसी किसी प्रकार की धार्मिक राजनीतिक या उच्छ्र्खल प्रवृति अथवा धारणा से बचे जिससे राष्ट्रीय एकता में बाधा पहुचती हो|

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की जनता के समक्ष आजादी की लड़ाई जैसा कोई महान लक्ष्य न होने के कारण समाज पुन;राष्ट्रबोध की कमी महसूस करने लगा है आज नागरिक के मन में राष्ट्र की सम्पति, राष्ट्र के विकास, स्वच्छता, समपर्ण जैसा राष्ट्रीय भावो में कमी आई है| जापान का उदाहरण हमारे सामने है जन्होने हिरोशिमा व नागासाकी जैसे परमाणु परीक्षण में उजाड़े हुए शहरों का परिश्रम से पुनर्निर्माण किया है

इसलिए आज भारत के प्रत्येक नागारिक को वहां के प्रत्येक संसाधन को अपने देश का, अपना मानना चाहिए तथा अपने छोटे -छोटे स्वार्थो से ऊपर राष्ट्र को मानना चाहिए तथा अपने सारे कार्य पूरी राष्ट्र निष्ठा से करने चाहिए जिससे देश दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित हो|

जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है|
वह नर नहीं, पशु है निरा और मृतक सामान है ||

Essay On National Unity In Hindi For Students

Hindi Essay: national unity and integrity, Hindi essay in the national unity Essay on National Integration in Hindi Language for students: प्राचीनकाल में भारत में अनेक सम्प्रदाय धर्म तथा गणराज्य होते हुए भी सांस्कृतिक एकता के सूत्र में सुद्रढ़ थे. लेकिन वर्तमान में राजनितिक स्वार्थ एवं धार्मिक कट्टरता के कारण हमारी राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ गई हैं.

भारत में राष्ट्रीय एकता– अनेकता में अनेकता में एकता के दर्शन भारत की अनूठी विशेषता हैं, यहाँ प्राचीनकाल से ही ज्ञान, प्रवृति, कर्म, धर्म आदि में पूर्ण समन्वय रहा हैं. इसी समन्वयी प्रवृति के कारण बाहर से आने वाली सम्पूर्ण संस्कृतियों को भी अपनाया गया हैं. वर्तमान में भारत में साम्प्रदायिकता के कारण राष्ट्रीय एकता में कमी आ रही हैं.

भाषावाद और क्षेत्रवाद के कारण अलगाव की प्रवृति बढ़ रही हैं. कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों में अलगाववाद तथा आतंकवाद पनप रहा हैं. कुछ क्षेत्रों में नक्सलवाद, जातिवाद एवं वर्गवाद बढ़ रहा हैं. फलस्वरूप आज भारत में राष्ट्रीय एकता बनाये रखना कठिन हो गया हैं.

वर्तमान में राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता-लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा तथा राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक हैं. जब तक सम्पूर्ण राष्ट्र एकता के सूत्र में नही बंधेगा और न ही आर्थिक प्रगति हो सकेगी. अतएवं प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्र प्रेम को बढ़ावा दे तथा राष्ट्रीय एकता को दृढ करे.

उपसंहार- आज भारत में राष्ट्रीय एकता का स्वर गूंजने लगा हैं. उसकी रक्षा के लिए आज राष्ट्रीय भावना की प्रबल आवश्यकता हैं. अतः हमे जाति धर्म तथा क्षेत्रवाद जैसी क्षुद्र विचारधाराओं से दूर रहकर विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए.

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