Essay On Old Age Homes In Hindi | वृद्धाश्रम पर निबंध

Essay On Old Age Homes In Hindi वृद्धाश्रम पर निबंध: पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव भारत को तेजी से गिरफ्त में लेकर हमारे संस्कारों तथा व्यवस्थाओं को समाप्त कर रहा हैं. vrudhashram essay in hindi में हम वृद्धाश्रम पर हिंदी निबंध यहाँ साझा कर रहे हैं. इससे आप अच्छी तरह समझ पाएगे कि वृद्धाश्रम योजना क्या है आवश्यकता उपयोगिता महत्व निबंध पर जानियें.

Essay On Old Age Homes In Hindi (वृद्धाश्रम पर निबंध 100 शब्द में)

Essay On Old Age Homes In Hindi

old age homes essay in hindi: भारत भूमि के संस्कार ने हमेशा बड़े बुजुर्गों को सम्मान दिया हैं. हमारी संस्कृति यह सिखाती हैं कि बड़ो की इज्जत करों उनका कहना मानों. वृद्धावस्था में माता पिता की सेवा करों तथा उनकी हर ख्वाइश को पूरा करना एक संतान का दायित्व हैं. किसी अच्छे कर्म की शुरुआत से पूर्व बड़े बूढों का आशीर्वाद लेना हमारी परम्परा रही हैं.

वृद्धाश्रम वह स्थान होता हैं जहाँ उम्रः दराज लोगों को लोग छोड़ आते हैं. किसी गैर सरकारी संगठन अथवा संस्था उसको चलाती हैं. तथा लोग एक निश्चित रकम चुकाकर अपने वृद्ध माता पिता को छोड़ आते हैं. भारतीय समाज में वृद्धाश्रम की इस सामाजिक कुरीति का सम्बन्ध हमारे इतिहास व मूल्यों से नहीं हैं बल्कि यह इनके विरुद्ध हैं पश्चिम की सभ्यता से ली गई विकृत मनोभाव की ये प्रथाए हमारे प्रबुद्ध लोगों के लिए अपमान की बात हैं.

Essay On Old Age Homes In Hindi वृद्धाश्रम पर निबंध 500 शब्दों में

hindi essay on old age home: तेजी से बदलते वक्त के साथ भारतीय समाज में भी कुछ नई प्रथाएं एवं विकृतियाँ जुड़ी हैं. इस सामाजिक आर्थिक बदलाव के दौर में अब स्त्री और पुरुष दोनों घर से निकलकर काम पर जाने लगे हैं. 10 घंटे तक काम के काम के बाद वृद्ध माता पिता की देखभाल के लिए उनके पास वक्त नहीं रहता हैं.  जीवन की अपनी मुश्किलों के  चलते बुजुर्गों से घ्रणा करने लगते हैं.

आज के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दौर में हर व्यक्ति अपने निर्णय स्वयं लेता हैं जिसके चलते वृद्ध माता पिता से  लोग  बिना सलाह लिए काम करते हैं इससे आपसी रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ता हैं. अतः उन्हें अपना घर भी पराया लगने लगता हैं तथा जिन सन्तान को उसने पाल पोसकर बड़ा किया वह आज उन्हें डांटकर चुप कराए तो स्वाभाविक ही हैं  उनके  दिल  पर  क्या गुजरती हैं.

इस लिहाज से रिश्तों के इस संकट का समाधान वृद्धाश्रम हो सकता हैं. भले ही ये हमारी संस्कृति का हिस्सा न हो, आज की आवश्यकता यह हैं कि वृद्ध माता पिता और लोभी बेटों के रिश्तों के संकट और नित्य घुट घुटकर जीवन जीने से अच्छे वृद्धा श्रम हैं. वृद्धाश्रम को आज अपनाने की आवश्यकता हैं. सरकार यह कार्य अपने हाथ में लेकर अच्छी सफाई और सुविधा के साथ इन्हें चलाएं.

जहाँ बुजुर्ग लोग संग मिलकर जीवन के अपने अंतिम पड़ाव को चैन से काट सके. दादा दादी, माता पिता, नाना नानी का हमारे परिवार में बड़ा महत्व माना गया हैं. हमारा यह कर्तव्य हैं कि हमें इन्हें सम्मान दे तथा उम्रः के इस पडाव में उनकी बात माने उनकी आवश्यकताओं का ख्याल करे तथा इनके आशीर्वाद से ही जीवन जीए तो हर सपने को साकार किया जाना संभव हैं.

हम इस बात का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं. कि कितनी मुश्किल से मेहनत कर अपने जीवन की सम्पूर्ण पूंजी बेटे व बेटियों को पढ़ाने उनकी अच्छी नौकरी लगाने तथा उनकी शादी करवाने खफा देते हैं. मगर यही सन्तान बड़ी होकर दुनियां की मोहमाया में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वृद्ध माँ बाप इन्हें बोझ लगने लगते हैं तथा वह किसी तरह उनसे छुटकारा पाने के लिए वृद्धों के लिए बने वृद्धाश्रम में ठूस आते हैं.

माँ बाप और संतानों के बिच रिश्तों के इस खालीपन की वजह पूर्ण रूप से पश्चिमी प्रभाव ही हैं. हमारे भारत की संस्कृति में तो माँ बाप के बाद भगवान् का दर्जा होता हैं उन्हें ईश्वर से उच्च स्थान दिया गया हैं. जब देवताओं में श्रेष्टता की पहचान के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन होता हैं तथा निर्णय यह निकलकर आता हैं कि जो देवता सबसे पहले पृथ्वी का चक्कर लगाकर आएगा वही श्रेष्ट होगा और उसी की सबसे पहले पूजा होगी.

सभी अपने अपने वाहन पर सवार होकर निकल पड़े जबकि भगवान् गणपति ने अपने माता व पिता शिव पार्वती की परिक्रमा की. वे बताते हैं कि माता पिता मेरे लिए इस लोक से बढ़कर हैं. मैं जो कुछ हूँ उन्ही वजह ये ही हैं. हमें फिर से इंडियन की बजाय भारतीय बनने की आवश्यकता हैं हमे अपने मूल्यों को फिर से समझने तथा जागरूकता फैलाने की आवश्यकता हैं. जिससे वृद्ध माता पिता अपना मन मसोसकर वृद्धाश्रम में जाने की बजाय ख़ुशी से अपने बेटे व बेटियों के साथ रहे.

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