राजनीतिक दल पर निबंध | Essay on Political Parties in India in Hindi

Essay on Political Parties in India in Hindi: नमस्कार साथियों आपका स्वागत हैं आज हम भारत के राजनीतिक दल पर निबंध लेकर आए हैं. भारतीय गणतन्त्र की प्रगति और विकास इन्ही दलों के चरित्र, कार्यक्रमों पर निर्भर करती हैं. आज के इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद में हम दलीय व्यवस्था, राजनीतिक दल का अर्थ कार्य तथा चुनौतियों के बारें में यहाँ जानकारी दे रहे हैं.

Essay on Political Parties in India in Hindi

Essay on Political Parties in India in Hindi

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को बनाने, संविधान रचने, चुनावी राजनीति और सरकार के गठन तथा संचालन में राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होती हैं.

राजनीतिक दल का अर्थ (Meaning of political party)

राजनैतिक दल ऐसे लोगों का संगठित समूह है जो समान दृष्टिकोण रखते हैं और जो राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करते हैं. समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर यह समूह कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता हैं. इन नीतियों के आधार पर वे लोगों का समर्थन पाकर चुनाव जीतने के बाद उन नीतियों को लागू करने का प्रयास करते हैं. इस प्रकार दल किसी समाज के बुनियादिफ राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं, किसी दल की पहचान उसकी नीतियों और सामाजिक आधार से तय होती हैं.

राजनीतिक दलों के कार्य (Functions of political parties)

  1. दल चुनाव लड़ते हैं.
  2. दल अलग अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं.
  3. दल देश के कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
  4. दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं.
  5. चुनाव हारने वाले दल शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं.
  6. जनमत निर्माण में भी दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वे मुद्दों को उठाते है और उन पर बहस करते हैं.
  7. शासन और जनता के मध्य मध्यस्थ का कार्य
  8. दल ही सरकारी मशीनरी और सरकार द्वारा चलाए जाने वाले कल्याण कार्यक्रमों तक जनता की पहुँच बनाते हैं.

अगर राजनीतिक दल न हो तो सारे उम्मीदवार स्वतंत्र और निर्दलीय होंगे. तब इनमें से कोई भी बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से चुनावी वायदे करने की स्थिति में नहीं होगा. सरकार बन जाएगी और उसकी उपयोगिता संदिग्ध होगी. लेकिन देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा.

बड़े समाजों के लिए प्रतिनिधित्व आधारित लोकतंत्र की जरूरत होती हैं. जब समाज बड़े और जटिल हो जाते है तब उन्हें विभि न्न मुद्दों पर अलग अलग विचारों को समेटने और सरकार की नजर में लाने के लिए किसी माध्यम या एजेंसी की जरूरत होती हैं. उन्हें सरकार का समर्थन करने या उस पर अंकुश रखने, नीतियाँ बनवाने और नीतियों का समर्थन अथवा विरोध करने के लिए उपकरणों की जरूरत होती हैं. प्रत्येक प्रतिनिधि सरकार की ऐसी जो भी जरूरते होती हैं राजनीतिक दल उन्हें पूरा करते हैं. इस प्रकार राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं.

दलीय व्यवस्था (The party system)

  • एक दलीय शासन व्यवस्था– जब सिर्फ एक ही दल सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती है तो उसे एकदलीय शासन व्यवस्था कहते हैं. चीन में सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी को शासन चलाने की अनुमति हैं.
  • दो दलीय शासन व्यवस्था– वह राजनीतिक व्यवस्था जिसमें सिर्फ दो ही दल बहुमत पाने और सरकार चलाने के प्रबल दावेदार हैं अमेरिका और ब्रिटेन में ऐसी ही दो दलीय व्यवस्था हैं.
  • बहुदलीय व्यवस्था– जब अनेक दल सत्ता के लिए होड़ में हो और दो दलों से ज्यादा के लिए अपने दम पर या दूसरों से गठबंधन करके सत्ता में आने का ठीक ठाक अवसर हो तो इसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं. भारत में ऐसी ही बहुदलीय व्यवस्था हैं इस व्यवस्था में कई दल गठबंधन बनाकर भी सरकार बना सकते हैं. जब किसी बहुदलीय व्यवस्था में अनेक पार्टियाँ चुनाव लड़ने और सत्ता में आने के लिए आपस में हाथ मिला लेती है तो इसे गठबंधन या मौर्चा कहा जाता हैं. भारत में वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में तीन प्रमुख गठबंधन थे.
  1. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन भाजपा और सहयोगी दल
  2. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन कांग्रेस और सहयोगी दल
  3. वाम मौर्चा माकपा, भाकपा आदि कम्युनिस्ट दल

राजनीतिक दलों के लिए चुनौतियाँ (Challenges for political parties)

  1. पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का न होना
  2. वंशवाद की चुनौती
  3. पैसा और अपराधी तत्वों की बढ़ती घुसपैठ
  4. पार्टियों के बीच विकल्पहीनता की स्थिति हैं. सार्थक विकल्प का तात्पर्य है कि विभिन्न पार्टियों की नीतियाँ और कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण अंतर हो. हाल ही के वर्षों में दलों के बीच वैचारिक अंतर कम होता गया हैं और यह प्रवृत्ति दुनियाभर में दिखती हैं.

राजनीतिक दलों और नेताओं के सुधारने के प्रयास (Efforts to improve political parties and leaders)

दल बदल कानून- भारत में 52 वें संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा सांसदों और विधायकों द्वारा जीतने के बाद एक राजनीतिक दल से दूसरे दल में दल बदल को रोकने का प्रावधान किया गया हैं. विधायिका के लिए किसी दल विशेष से निर्वाचित प्रतिनिधि का उस दल को छोड़कर किसी अन्य दल में चले जाना दल बदल कहलाता हैं. इस कानून से दल बदल में कमी आई हैं. पर इससे पार्टी में विरोध का स्वर उठाना और भी मुश्किल हो जाता हैं. पार्टी नेतृत्व जो फैसला करता हैं, सांसद और विधायक को उसे मानना पड़ता हैं.

शपथ पत्र देना अनिवार्य– उच्चतम न्यायालय ने पैसे और अपराधियों का प्रभाव कम करने के लिए एक आदेश द्वारा चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी सम्पति का और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का ब्यौरा एक शपथ पत्र के माध्यम से अनिवार्य कर दिया हैं.

सांगठनिक चुनाव कराना और आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य– राजनीतिक दलों में अंदरूनी लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव आयोग ने एक आदेश के जरिये सभी दलों के सांगठनिक चुनाव कराना और आयकर का रिटर्न भरना अनिवार्य बना दिया हैं.

राजनीतिक दलों में सुधार हेतु सुझाव (Suggestions for reform of political parties)

  • राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए.
  • सभी दल अपने सदस्यों की सूची रखे व अपने संविधान का पालन करें.
  • पार्टी में विवाद की स्थिति में एक स्वतंत्र प्राधिकारी को पंच बनाए और सबसे बड़े पदों के लिए चुनाव कराएं.
  • राजनीतिक दल महिलाओं को एक न्यूनतम अनुपात में जरुर टिकट दे, इसी प्रकार दल के प्रमुख पदों पर भी महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए.
  • चुनाव का खर्च सरकार उठाए यह मदद पेट्रोल कागज पैन वगैरह के रूप में हो सकती हैं या फिर पिछले चुनावों में मिले मतों के अनुपात में नकद पैसा दिया जा सकता हैं.
  • राजनीतिक दलों पर लोगों द्वारा दवाब बनाया जाना चाहिए. यह काम चिट्टियाँ लिखने, प्रचार करने और आन्दोलन के जरिये किया जा सकता हैं. आम नागरिक, दवाब समूह, आंदोलन और मिडिया के माध्यम से यह काम किया जा सकता हैं.
  • सुधार की इच्छा रखने वालों को खुद राजनीतिक दलों में शामिल होना.
  • नागरिकों को भी दलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चंदा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. ऐसे चंदे पर आयकर में छूट मिलनी चाहिए.

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