गरीबी पर निबंध इन हिंदी | Essay on Poverty in Hindi

गरीबी पर निबंध इन हिंदी | Essay on Poverty in Hindi:-गरीबी अर्थात निर्धनता वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति को अपने जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहता है. गरीबी किसी भी देश के लिए अभिशाप से कम नहीं है. वैसे तो विश्व के अधिकतर देशों में कुल जनसंख्या का कम या अधिक भाग निर्धनता की स्थिति में जीने को विवध है. किन्तु एशिया एवं अफ्रीका के देशों में निर्धनता बहुत पाई जाती है. निर्धनता गरीबी की परिभाषा सभी देशों के लिए एक सी नहीं हो सकती, क्योंकि निर्धनता का आधार जीवन स्तर को माना जाता है और विकसित देशों में सधार्ट व्यक्ति कही ऊँचे जीवन स्तर पर जी रहा है. Poverty Essay & Garibi Hatao Essay In Hindi में हम गरीबी निबंध आपकों बता रहे हैं.

Essay on Poverty in HindiEssay on Poverty in Hindi

विकसित देशों में जिसके पास अपनी गाड़ी न हो, उसे निर्धन माना जाता है, जबकि विकासशील देशों में निर्धनता की माप का यह पैमाना उपयुक्त नहीं कहा जा सकता. वैसे तो भारत में अनेक अर्थशास्त्रियों एवं संस्थाओं ने निर्धनता के निर्धारण हेतु अपने अपने प्रमाप बनाए है, किन्तु इस समय देश में निर्धनता रेखा का निर्धारण भोजन में कैलोरी के आधार पर किया गया हैं.

भारत में गरीबी पर निबंध, कारण, प्रभाव, तथ्य Essay on Poverty in India Hindi with Causes, Effects and Facts

भोजन में कैलोरी की मात्रा को आधार बनाकर निर्धनता रेखा का निर्धारण करने के इस तरीके को दांडेकर रथ फार्मूला कहा जाता हैं. भारत में इसका प्रयोग 1971 से हो रहा है. इसके अनुसार शहरी क्षेत्रों में भोजन प्रतिदिन 2100 कैलोरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी न पाने वालों को निर्धनता रेखा से नीचे माना जाता है. योजना आयोग राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन सर्वेक्षणों के आधार पर ही निर्धारित रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या का आंकलन करता है.

पिछले कुछ वर्षों से निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की पहचान का यह तरीका विवादापस्द बना हुआ हैं, इसलिए नए फ़ॉर्मूले से इसके निर्धारण हेतु अपने फोर्मूलें में प्रति व्यक्ति उपयोग व्यय के आधार बनाते हुए इसे अधिक व्यवहारिक बताया.

इसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 356 प्रतिमाह से कम एवं शहरी क्षेत्रों में 538 प्रतिमाह से कम उपयोग व्यय करने वाले व्यक्ति को निर्धनता रेखा से नीचे माना जाता है. इस फ़ॉर्मूले का प्रयोग कर दिसम्बर 2009 में इस समिति ने योजना आयोग को अपनी रिपोर्ट सौपी, जिसमें 2004-05 के दौरान 37 प्रतिशत जनसंख्या को निर्धनता रेखा से नीचे बताया गया. जबकि पहले वाले फोर्मूलें की सहायता से किये गये आंकलन में 27 प्रतिशत जनसंख्या को ही निर्धनता रेखा से नीचे बताया गया था.

तेंदुलकर समिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में 2004-05 में 41.8 प्रतिशत लोगों को निर्धनता रेखा से नीचे बताया, जबकि पहले वाले फोर्मुले से यह 28.3 प्रतिशत आकलित था.

Poverty essay in Hindi गरीबी एक अभिशाप पर निबंध

भारत में सर्वाधिक निर्धनता उड़ीसा में है, जहाँ 46.4 प्रतिशत लोग निर्धनता रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है. इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छतीसगढ़, झारखंड देश के ऐसे राज्य है जहाँ पर अत्यधिक गरीबी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, केरल आदि प्रान्तों में निर्धनता की स्थिति अपेक्षाकृत कम है.

हमारे देश में निर्धनता के कई कारण है, जनसंख्या में तेजी से हो रही वृद्धि इसका एक सबसे बड़ा कारण है. बढ़ती जनसंख्या के जीवन निर्वहन हेतु अधिक रोजगार स्रजन की आवश्यकता होती है. ऐसा न होने पर बेरोजगारी में वृद्धि के फलस्वरूप निर्धनता की स्थिति में भी वृद्धि होती हैं. भारत में व्यवहारिक के बजाय सैद्धांतिक शिक्षा पर जोर दिया जाता है. फलस्वरूप व्यक्ति के पास उच्च शिक्षा की उपाधि तो होती हैं.

लेकिन न तो वह किसी भी काम में कुशल है और न ही वह व्यक्तिगत व्यवसाय शुरू करने में रूचि रखता है। इस तरह, दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली के कारण, लोग अपनी आजीविका कमाने और गरीबी में रहने में असमर्थ हैं। इससे पहले, अधिकांश ग्रामीण कॉटेज अपनी आजीविका चलाने के लिए इस्तेमाल करते थे।

ब्रिटिश सरकार की घरेलू-घरेलू नीतियों के कारण, वे देश में गिर गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण बेरोजगारी में वृद्धि के कारण गांवों की अर्थव्यवस्था का क्षरण हुआ और देश में गरीबी में वृद्धि हुई। हमारा देश प्राकृतिक संसाधनों के साथ संपन्न है, लेकिन कृषि की पिछड़ेपन के कारण, औद्योगीकरण की धीमी प्रक्रिया के कारण लोग वर्षों से रोजगार नहीं पा रहे हैं, तेजी से बढ़ती आबादी के लिए रोजगार प्रदान करना संभव नहीं है, और अधिकांश लोग गरीबी की स्थिति में रहने के लिए लगातार।

गरीबी के कई प्रतिकूल प्रभाव हैं। गरीबी के कारण, भुखमरी की समस्या उत्पन्न होती है। गरीबी के कारण, मानसिक अशांति के लोग चोरी, चोरी, हिंसा और अपराध के प्रति अपराध के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहते हैं। अपराध और हिंसा में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण गरीबी और बेरोजगारी है। कई बार, गरीबी की भयानक स्थिति में परेशान होने के बावजूद, लोग आत्महत्या करते हैं।

गाँवों के निर्धन लोगों का लाभ उठाकर एक ओर जहाँ स्वार्थी राजनेता इनका दुरूपयोग करते हैं वही दूसरी ओर धनिक वर्ग इनका शोषण करने से भी नही चूकते. ऐसी स्थिति में देश का राजनीतिक एवं सामाजिक वातावरण अत्यंत दूषित हो जाता हैं.

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