Essay On President Of India In Hindi | भारत के राष्ट्रपति पर निबंध

भारत के राष्ट्रपति पर निबंध | Essay On President Of India In Hindi : प्रिय विद्यार्थियों आपका स्वागत है आज हम भारत के राष्ट्रपति Essay President India Hindi में राष्ट्रपति के पद, स्वरूप, निर्वाचन प्रक्रिया, वेतन, शक्तियाँ व कार्य के बारे में विस्तार पूर्वक राष्ट्रपति भारत पर निबंध में यहाँ जानने वाले हैं. Essay On Indian President In Hindi का यह निबंध विद्यार्थियों के लिए विशेष उपयोगी है जो महामहिम प्रेसिडेंट के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं. तो चलिए आरम्भ करते हैं.

Essay On President Of India In Hindi

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Essay On President Of India In Hindi

भारत के राष्ट्रपति पर निबंध: सरकार के तीन अंगों में से कार्यपालिका अंग विधायिका द्वारा स्वीकृत नीतियों और कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं. लेकिन सभी देशों में एक ही प्रकार की कार्यपालिका नहीं हो सकती. मुख्यतः शासन के प्रकार के रूप में संसदात्मक एवं अध्यक्षात्मक का भेद कार्यपालिका के अलग अलग प्रकार एवं कार्यपालिका व व्यवस्थापिका के आपसी सम्बन्धों पर ही आधारित होता हैं.

जिस संविधान में कार्यपालिका अपने कार्यों एवं कार्यकाल के लिए व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह हो, कार्यपालिका के सदस्य आवश्यक रूप से व्यवस्थापिका के भी सदस्य हो एवं राष्ट्र का अध्यक्ष एवं सरकार का अध्यक्ष अलग अलग हो, इस व्यवस्था को संसदात्मक अथवा संसदीय व्यवस्था कहते हैं.

जापान जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, भारत इत्यादि संसदीय व्यवस्था के उदाहरण हैं. इसके विपरीत अध्यक्षात्मक व्यवस्था में राष्ट्रपति राज्य एवं सरकार दोनों का प्रधान होता हैं. तथा वह शासन की सारी शक्तियों का केंद्र बिंदु होता है. अमेरिका, ब्राजील आदि अध्यक्षात्मक व्यवस्था के उदहारण हैं. जबकि फ्रांस, रूस, श्रीलंका आदि अर्द्ध अध्यक्षात्मक व्यवस्था वाले देश हैं.

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कार्यपालिका का स्वरूप (Nature Of Executive): भारत में संसदीय व्यवस्था की व्यवस्था की गई है, जिसमें राष्ट्रपति कार्यपालिका का औपचारिक एवं संवैधानिक प्रधान होता हैं. तथा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्री परिषद वास्तविक कार्यपालिका होती हैं.

यदपि राष्ट्रपति का पद गरिमा एवं प्रतिष्ठा का पद माना जाता हैं. वह देश का प्रथम नागरिक माना जाता हैं तथा वरीयता क्रम में सर्वोच्च स्थान रखता हैं. संविधान का अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद की व्यवस्था करता हैं, जिसके अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा. अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी, जिसका प्रयोग वह स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा.

भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन (Election Of President Of India In Hindi)

राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रणाली का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 54 एव 55 में किया गया हैं. अनुच्छेद 54 अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाएगा जो संसद के दोनों सदनों लोकसभा एवं राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य से मिलकर बनेगा.

इस प्रकार राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता हैं. यह चुनाव एक विशेष विधि, जिसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमनीय मत विधि कहते हैं. के द्वारा गुप्त रूप से होता हैं. इस विधि में विजयी होने के लिए उम्मीदवार को कुल डाले गये वैध मतों के आधे से एक मत अधिक प्राप्त करना होता हैं.इसे न्यूनतम कोटा कहते हैं.

राष्ट्रपति का निर्वाचन पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए होता हैं. तथा पुनः चुनाव लड़ सकता हैं. राष्ट्रपति किसी भी समय उपराष्ट्रपति को संबोधित कर अपना त्याग पत्र दे सकता हैं. शक्तियों के दुरूपयोग, कदाचार, संविधान के उल्लंघन के आरोप में राष्ट्रपति को महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा पद से हटाया भी जा सकता हैं,

जिसका वर्णन संविधान के अनुच्छेद 61 में हैं. यह महाभियोग संसद के किसी भी सदन द्वारा राष्ट्रपति को कम से कम 14 दिन पूर्व सूचित कर लाया जा सकता हैं. महाभियोग के प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो तिहाई सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित होना चाहिए.

अगर राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्याग पत्र अथवा पदच्युति के कारण रिक्त हो जाए तब छः माह के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव करवाना आवश्यक हैं और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शेष बची अवधि के लिए नहीं बल्कि पांच वर्ष के लिए निर्वाचित होता हैं.

राष्ट्रपति निर्वाचित होने की योग्यताएं (Qualifications For The Election Of President)

संविधान के अनुसार राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार होने के लिए आवश्यक हैं कि

  1. वह भारत का नागरिक हो
  2. उसकी न्यूनतम आयु पैतीस वर्ष हो
  3. वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो

इसके अतिरिक्त वह सरकार के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए. गैर गम्भीर व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए निर्वाचक मंडल में से प्रस्तावकों एवं अनुमोदकों की व्यवस्था भी की गई हैं. श्री राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे, जो दो बार निर्वाचित हुए.

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया (Process of the Presidential election of India)

राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में दो बातों पर विशेष बल दिया गया हैं. प्रथम, निर्वाचक मंडल में जनसंख्या के निकटतम संभव समान प्रतिनिधित्व हो. द्वितीय समस्त विधानसभा सदस्यों द्वारा देय मतों से समता रहे. उक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु निर्वाचक मंडल के प्रत्येक सदस्य की मत संख्या निश्चित करने के लिए विशेष पद्धति अपनाई गई हैं.

राज्य विधान मंडल की मत संख्या प्राप्त करने के लिए राज्य की कुल जनसंख्या वहां के विधानमंडल के कुल चुने हुए सदस्यों में बाँट दी जाती हैं एवं उस भागफल को 1000 से बाँट दिया जाता हैं. निम्न सूत्र से स्पष्ट समझा जा सकता हैं.

विधानमंडल के सदस्यों का मत भार —राज्य की कुल जनसंख्या/राज्य विधानमंडल के निर्वाचित सदस्य ÷ 1000

इस विभाजन में यदि शेष 500 से अधिक आए तो एक माना जाता है एवं भागफल में एक जोड़ दिया जाता हैं. संसद के प्रत्येक सदस्य का मतभार निकालने के लिए राज्यों के विधानमंडल के कुल मतों को दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों में बाँट दिया जाता हैं.

निर्वाचन गुप्त मतदान द्वारा एकल संक्रमनीय आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा होता हैं. इस निर्वाचन में प्रथम, साधारण पद्धति से मतों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की जाती हैं. यदि किसी उम्मीदवार को उक्त निर्धारित मत नहीं मिलते तो चाहे उसके सबसे अधिक मत हो.

द्वितीय हार मतदाता को इतने वरीयता मत देने का अधिकार होता हैं जितने उम्मीदवार होते हैं. तृतीय उसको अपनी पसंद से वरीयता निर्धारित करने का अधिकार होता हैं. चतुर्थ यदि प्रथम गणना में किसी भी उम्मीदवार को निर्धारित संख्या में मत नहीं मिलते तो फिर दूसरी गणना प्रारम्भ की जाती हैं.

पंचम पहले उस उम्मीदवार को हटाया जा सकता है जिसकों सबसे कम मत मिले हैं. षष्ट यह क्रिया उस समय तक चलती रहती हैं. जब तक कि किसी एक उम्मीदवार को निर्धारित मत संख्या प्राप्त नहीं हो जाती. यह पद्धति निम्न उदहारण द्वारा और भी स्पष्ट की जा सकती हैं. हम मान लेते हैं कि राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में चार उम्मीदवार हैं.

वेतन/ विशेषाधिकार/ उन्मुक्तियाँ व अन्य सुविधाएं (Salary/ Privileges/ Immunities And Other Facilities)

भारत सरकार द्वारा 11 सितम्बर 2008 से राष्ट्रपति का वेतन डेढ़ लाख प्रतिमाह निर्धारित किया गया हैं. जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर आसीन है तब तक उसके विरुद्ध किसी दीवानी या फौजदारी न्यायालय में कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता हैं न तो किसी गिरफ्तारी के लिए वारंट ही जारी किया जा सकता हैं. और न ही उसे गिरफ्तार किया जा सकता हैं.

दो महीने के लिखित नोटिस देने के पश्चात राष्ट्रपति के विरुद्ध केवल दीवानी कार्यवाही की जा सकती हैं. पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने पर केवल उनकी पत्नी को सेनानिवृत राष्ट्रपति को मिलने वाली पेंशन की आधी राशि तथा सरकारी मकान आजीवन प्राप्त होगा. राष्ट्रपति भवन उनका औपचारिक आवास हैं जो रायसीना हिल्स दिल्ली में स्थित हैं.

इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के निकट छरबरा में उनका ग्रीष्मकालीन निवास स्थित हैं. जिसका नाम द रिट्रीट हैं. इसके अलावा आंध्रप्रदेश की राजधानी हैदराबाद में राष्ट्रपति निलयम में भी उनका एक अन्य आवास स्थित हैं.

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