आरक्षण नीति पर निबंध | Essay On Reservation System In Hindi

Essay On Reservation System In Hindi: भारतीय संविधान द्वारा पिछड़े तबके को ऊपर उठाने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था. मगर आज आरक्षण की समस्या ने समानता को ताक पर रखी दिया. आरक्षण का दुष्परिणाम, नुकसान हमारे सामने है समाज दो भागों में विभाजित हो गया हैं. आज समय की आवश्यकता है कि आरक्षण : देश के लिए वरदान या अभिशाप विषय पर इसके लाभ हानि कारणों पर फिर से डिबेट की जानी चाहिए तथा पक्ष विपक्ष के तर्कों के आधार पर आरक्षण की परिभाषा को पुनः परिभाषित कर एक नयें अर्थ देने की आवश्यकता हैं. आज हम बच्चों के लिए आरक्षण नीति पर हिंदी निबंध Essay On Reservation System In Hindi लेकर आए हैं. चलिए जानते है रिजर्वेशन एस्से स्पीच को.आरक्षण नीति पर निबंध | Essay On Reservation System In Hindi

आरक्षण नीति पर निबंध | Essay On Reservation System In Hindi

यदि आरक्षण का उद्देश्य देश के संसाधनों, अवसरों एवं शासन प्रणाली में समाज के प्रत्येक की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, तो यह बात अब निर्णायक रूप से कही जा सकती हैं कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था असफल हो चुकी हैं. सामाजिक न्याय का सिद्धांत वास्तव में वहीँ लागू हो सकता हैं, जहाँ समाज के नेतृत्व की नियत स्वच्छ हो, विशिष्ट सामाजिक बनावट के कारण भारत जैसे देश में सामाजिक न्याय के सिद्धांत को जिस तरीके से लागू किया गया हैं, उसमे तो असफल होना ही था.

भारत में आरक्षण नीति क्या है (Problem of Reservation System in India in Hindi)

भारतीय संविधान में पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान इस प्रकार किया गया हैं- अनुच्छेद 15- समानता का मौलिक अधिकार द्वारा राज्य के किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल जाति, धर्म, मूल वंश, लिंग या जन्म स्थान इनके आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा, लेकिन 15 (4) के अनुसार इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड 2 में की कोई बात राज्य को शैक्षिक अथवा सामाजिक दृष्टि से पिछड़े नागरिकों के किन्ही वर्गों अथवा अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था बनाने से नहीं रोक सकती.

अर्थात राज्य चाहे तो इनके उत्थान के लिए आरक्षण या शुल्क में कमी अथवा अन्य उपबन्ध कर सकती हैं, जिसे कोई भी व्यक्ति उसकी विधि मान्यता पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता कि वह वर्ग विभेद उत्पन्न करते हैं.

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में आरक्षण लागू हैं. मंडल आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद 1993 से ही अन्य पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियों में आरक्षण लागू हैं. 2006 के बाद से केंद्र सरकार के शिक्षण संस्थानों में भी अन्य पिछड़े वर्षों के लिए आरक्षण लागू हो गया हैं. महिलाओं को भी विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण की सुविधा का लाभ मिल रहा हैं कुल मिलाकर समाज के अत्यधिक बड़े तबके को आरक्षण की सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो रहा हैं, लेकिन आरक्षण की निति का परिणाम क्या निकला?

aarakshan niti par nibandh- Essay on Reservation in Hindi Language

अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए आरक्षण लागू होने के ७२ साल से अधिक समय हो चूका है और मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद भी लगभग तीन दशक पूरे हो गये हैं लेकिन क्या सम्बन्धित पक्षों को उसका पर्याप्त फायदा मिला हैं. सत्ता एवं सरकार अपने निहिर्थ स्वार्थ के कारण आरक्षण की नीति की समीक्षा नहीं करती.

अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की समीक्षा तो संभव नहीं हैं क्योंकि इससे सम्बन्ध वास्तविक आंकड़े पता नहीं हैं चूँकि आंकड़े नहीं हैं. इसलिए योजनाओं का कोई लक्ष्य भी नहीं हैं. आंकड़ों के अभाव में देश के संसाधनो अवसरों और राजकाज में किस जाति और जाति समूह की कितनी हिस्सेदारी हैं, सैम्पल सर्वे के आंकड़ों इसमें कुछ मदद कर सकते हैं, लेकिन इतने बड़े देश में चार पांच हजार नमूना सर्वेक्षण से ठोस नतीजे निकाले जा सकते हैं.

सरकार ने १०४ वें संविधान संशोधन के द्वारा देश के सरकारी विद्यालयों के साथ साथ गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों में भी अनुसूचित जातियों/ जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के अभियर्थियों को आरक्षण का लाभ प्रदान कर दिया हैं.

सरकार के इस निर्णय का समर्थन और विरोध दोनों हुआ. वास्तव में निजी क्षेत्रों में आरक्षण लागू होना अत्यधिक कठिन हैं. क्योंकि निजी क्षेत्र लाभ से समझौता नहीं कर सकते, यदि गुणवत्ता प्रभावित होने से ऐसा होता तो. पिछले कई वर्षों में आरक्षण के नाम पर राजनीति हो रही हैं.

आए दिनों कोई न कोई वर्ग अपने आरक्षण की मांग कर बैठता हैं एवं इसके लिए आन्दोलन पर उतारू हो जाते हैं. इस तरह देश में अस्थिरता एवं अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं. आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर निम्न तबके के लोगों के उत्थान के लिए उन्हें सेवा एवं शिक्षा में आरक्षण प्रदान करना उचित हैं. लेकिन जाति एवं धर्म के आधार पर आरक्षण को कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं.

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