सड़क दुर्घटना पर निबंध Essay On Road Accident in Hindi

Essay On Road Accident in Hindi: वह दिन बहुत बुरा होता हैं जब कोई अपना बिछड़ जाए अथवा अपनी आँखों के समक्ष ही कोई सड़क दुर्घटना हो जाए तो दिल पसीज जाता हैं. भारत ही नहीं आज दुनिया भर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं एक चिंता का विषय हैं आज के सड़क दुर्घटना पर निबंध के इस आर्टिकल में कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों व स्टूडेंट्स के लिए Road Accident Essay in Hindi आपकों सरल भाषा में बता रहे हैं.

सड़क दुर्घटना पर निबंध Essay On Road Accident in Hindi (100 शब्द)

सड़क दुर्घटना पर निबंध Essay On Road Accident in Hindi

आए दिन भारत में निरंतर सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं. जिसके चलते सैकड़ों नागरिक छोटी सी चूक से नित्य मारे जा रहे हैं. इस लिहाज से आज सड़क सुरक्षा तथा यातायात के नियमों का ढंग से पालन आज की आवश्यकता हैं. आज से तीन दशक पूर्व तक जहाँ हमारे देश में सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों की अनुमानित संख्या 3 करोड़ के आस पास थी जो आज बढ़कर 20 करोड़ हो चुकी हैं. इसका आशय यह हुआ कि हर घर में गाड़ी हैं.

बढ़ते वाहनों की संख्या एक बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं. महानगरों में आए दिन ट्रेफिक जाम और बड़े सड़क हादसे तो आम बात हो चुकी है. सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि का मुख्य कारण हैं यातायात के नियमों की अनदेखी करना, तेज गति से ड्राइविंग, नशा करके वाहन चलाना, बिना हेलमेट के सवारी तथा नियत संख्या से अधिक लोगों को वाहनों पर बिठाने के कारण अधिकतर घटनाएं होती हैं,

एक वर्ष में भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 3 लाख लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं वही तकरीबन एक मिलियन लोग घायल हो जाते हैं अथवा अपने अंग खो देते हैं. ९० प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं वाहन चालकों की लापरवाही के कारण घटित होती हैं. हमें इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क के नियमों का पालन करने के साथ ही यातायात पुलिस को व्यवस्था बनाने में सहयोग करना होगा.

सड़क दुर्घटना पर निबंध, road accident short essay in hindi (200 शब्द)

हम ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ भाग्यवाद को सब कुछ माना जाता हैं. हम प्रत्येक बात को भाग्य में लिखी बात कहकर टाल जाते हैं, बहुत बार मैंने सुना हैं कि अमुक के भाग्य में लिखा था इसी कारण उसका रोड़ एक्सीडेंट हुआ था. ऐसा कहने के साथ ही न सिर्फ हम अपनी जागरूकता को छुपाते हैं बल्कि उस गलती को भी नजरअंदाज कर जाते हैं जिसके चलते अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. हर घटना के मूल में कारण होता हैं. सड़क दुर्घटना में लोगों की मृत्यु होती हैं तो उसमें किसी एक व्यक्ति की लापरवाही अवश्य होती हैं. जिसके फल बहुत से निर्दोष लोग अपनी जान गवाते हैं.

प्रायः देखा गया हैं कि बाइक से गिरने, टक्कर लगने या वाहन से टकराने पर मरने वाले लोग यदि हेलमेट पहने होते तो उनकी जान बच सकती थी. मगर दुर्भाग्य की बात हैं कि हम अपनी गलतियों को भाग्य का नाम देकर बच निकलते हैं. आज ट्रेफिक नियमों का पालन न करना कूल समझा जाने लगा हैं. सड़क पर धीमी गति से हेलमेट पहने कोई बाइक चलाता हैं तो लोग उन्हें कई उपनाम दे देते हैं, वही अपनी गाड़ी की सम्पूर्ण गति में भगाने वालों को हीरों कहने वाले भी हम ही हैं. इन तमाम तरह की सोच का बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा हाथ हैं.

समाज हमारा अपना हैं जो कुछ धारणाएं समाज में व्याप्त होती हैं उन्हें सही गलत के तराजू में तोलकर समाज के समक्ष रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व हैं. सड़क दुर्घटनाओं की इस राक्षसी समस्या को हम केवल सावधानी बरतकर ही समाप्त कर सकते हैं.

सड़क पर चलने या वाहन चलाने वाला प्रत्येक व्यक्ति जल्दबाजी की बजाय सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करे तो आज ही ९० प्रतिशत सड़क हादसे कम हो जाएगे. लाखों लोगों के जीवन को बचाया जा सकता हैं. हमारा दायित्व बनता हैं कि हम अपने बच्चों को समाज के अन्य लोगों को सड़क सुरक्षा के विषय में अवगत करवाएं तथा अपनी सुरक्षा अपनी जिम्मेदारी का एहसास करवाएं.

सड़क दुर्घटना पर निबंध, Essay On Road Accident in Hindi (500 शब्द)

प्रस्तावना

ऑफिस जाना हो या बाजार से दूध सब्जी आटा लेने जाना हो हम इसी आश से साथ घर से निकलते हैं कि दस मिनट में आया, मगर क्या हम कभी सोचते हैं कि मैं आज वापिस नहीं आउगा, कोई नहीं ऐसा नकारात्मक भाव नहीं मन में लाता, वे लाखों लोग भी ऐसा नहीं सोचते जो हर साल सड़क हादसों में मारे जाते हैं. आज चाहे फुटपाथ पर पैदल चलना हो, बाइक, बस, रेल, हवाई किसी से भी यात्रा करना खतरे से खाली नहीं रहा हैं. आमतौर पर सड़क परिवहन के नियमों की अनदेखी करने के कारण बड़ी सड़क दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं.

आँखों देखी सड़क दुर्घटना

अपने गाँव से मुझे शहर जाना था, इसलिए मैंने एक बस को पकड़ा. बस में बहुत भीड़ थी पैर रखने तक की जगह नहीं थी. लोग एक दूसरे स्थान पर जाने के लिए बस में सवार हुए थे. दोपहरी का समय था लोग गप्पे मार रहे थे. मुझे भी बस में एक दोस्त मिल गया, मैं भी उसके साथ गप्पे लगाने में व्यस्त हो गया.

हमारी बस काफी तेज गति से चल रही थी, अचानक क्या हो गया कि एक जोर के धक्के से बस पलटी खा गई और यात्री एक दूसरे पर गिर गये. चीखने पुकारने की आवाजे शुरू हो गई.

आस-पास के लोगों की मदद से सभी को बस से बाहर निकाला गया. बड़ी संख्या में लोगों को चोटें आए. जब मैं अपने होश हवाश में आया तो मुझे पता चला कि सामने से आ रहे एक ट्रक ने बस को टक्कर मार दी थी. लोगों ने ट्रक के ड्राईवर को पकड़ा तो पाया कि वह अभी भी नशे में धूत था.

हृदय-विदारक दृश्य

सड़क पर उस समय जो नजारा था देखने भर से कलेजा पसीज उठता था. दो लोगों को बस के दर्पण बुरी तरह घर लगे. सड़क खून से लथपथ थी. आस पास के लोगो के द्वारा पुलिस व एम्बुलेंस को फोन किया, कुछ ही समय में एम्बुलेंस के पहुचने पर घायलों को अस्पताल भेजा गया.

भगवान का शुक्र रहा कि काल का साक्षात नजारा देखने के बाद भी अधिकतर यात्री को कोई चोट नहीं आई, जिनमें मैं भी एक था. पुलिस के आने के बाद ट्रक के ड्राईवर को पकड़ कर थाने ले जाया गया. इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि एक व्यक्ति की लापरवाही के चलते कितने लोगों की जान जा सकती थी, यदि हम सड़क नियमों का पालन करे तो ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण लगा सकते हैं.

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