विज्ञान वरदान या अभिशाप पर निबंध | Essay on Science Blessing or Curse in Hindi

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Essay on Science Blessing or Curse in Hindi

Essay on Science Blessing or Curse in Hindi

प्रस्तावना– मनुष्य ही इस सृष्टि का एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके पास विवेक बुद्धि हैं. विवेक द्वारा वह  उचित  अनुचित  का निर्धारण कर उचित को ग्रहण करता है और अनुचित से बचता हैं. बुद्धि उसको नवीन बातें सोचने की क्षमता देती हैं. इसी कारण सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान आदि का विकास हुआ हैं. विज्ञान प्रस्तुत शताब्दियों की ऐसी मानव उपलब्धि है, जिसने संसार का स्वरूप ही बदल दिया हैं.

कल्पवृक्ष विज्ञान– आज विज्ञान मानव जीवन के लिए हर मनोकामना की पूर्ति करने वाला कल्पवृक्ष बना हुआ हैं. विज्ञान ने मानव को प्रकृति पर निर्भरता से मुक्त करके उसे अकल्पनीय सुख सुविधाएँ और सुरक्षा उपलब्ध कराई हैं. वही रासायनिक खादों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों, बांधों, नहरों और कृत्रिम वर्षा से मानव के कृषि भंडार को भर रहा हैं. वही नाना प्रकार की गृह निर्माण सामग्री और शैल्पिक ज्ञान से मानव के विलास भवनों की रचना कर रहा हैं.

वही मानव तन को मन मोहक, कृत्रिम और परम्परागत वस्त्रों से अलंकृत कर रहा हैं. क्षय, कैंसर, कुष्ट तथा एड्स जैसे रोगों पर विजय पाने यह संघर्षरत हैं. जीन से लेकर क्लोन बनाने तक की मंजिल तय करके वह जीवन के रहस्य को ढूढ़ रहा हैं.प्लास्टिक सर्जरी के कुरूपों को सुरूप बना रहा हैं. मस्तिष्क, ह्रदय और गुर्दों की पुनः स्थापना कर रहा हैं.

भीमकाय यंत्रों को उसी की विद्युत् शक्ति घुमा रही हैं वही जल, थल, नभ में नाना प्रकार के वाहनों में दौड़ लगवा रहा है अंतरीक्ष और ब्रह्मांड के कुंवारे पथों को नाप रहा हैं. मोबाइल फोन, टेलीफोन, टेलीविजन और इंटरनेट जैसे उपकरणों से उसने सारे विश्व को सिकोड़कर छोटा कर डाला हैं. रेडियो दूरबीनों से यह ब्रह्मांड की छानबीन कर रहा है, वसुंधरा के गर्भ में झाँक रहा हैं,  सागरों के अतल तल को माप रहा हैं. मनोरंजन के अनेक साधनों के साथ व्यापार के क्षेत्र में भी उसने  ई  मेल, ई  बैंकिंग  जैसे   साधन उपलब्ध कराएं हैं.

विज्ञान का अभिशाप– विज्ञान की उपर्युक्त वरदात्री छवि के पीछे उसका अभिशापी चेहरा भी छिपा हुआ हैं. विज्ञान द्वारा अनेक महाविनाशकारी अस्त्र शस्त्रों का आविष्कार हुआ हैं. परमाणु हथियार विध्वंसक गैसें, जीवाणु विषाणु बम आदि मनुष्य का थोक में विनाश करने में सक्षम हैं. हिरोशिमा और नागासाकी जैसे नगरों को विश्व के मानचित्र से मिटाने का श्रेय  भी  विज्ञान  को  ही जाता हैं. विज्ञान की कृपा से ही आज का यह जगमगाता प्रगतिशील विश्व बारूद के ढेर पर बैठा हुआ हैं.

मानव मूल्यों का हास– विज्ञान के कारण श्रेष्ठ मानव मूल्य ध्वस्त हो गये हैं. प्रेम, त्याग, परोपकार, अहिंसा आदि गुणों को कोई पूछ नहीं पूछ रहा. कवि दिनकर ने विज्ञान की विभूति पर इठलाने वाले आज के मानव को सावधान किया हैं.

सावधान मनुष्य यदि विज्ञान है तलवार
तो इसे दे फेंक तजकर मोह स्मृति के पार
हो चुका है सिद्ध है तू शिशु अभी नादान
फूल काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान

उपसंहार– ज्ञान का ही रूप है विज्ञान, नहीं वह अभिशाप या वरदान. एक ही वस्तु एक पक्ष से देखने पर वरदान प्रतीत होती है और वही दूसरे पक्ष से देखने पर अभिशाप प्रतीत होती हैं. औषधि के रूप में जो विष जीवन रक्षक है, वही विष के रूप में प्राण घातक हैं. एक ही लोहे से बधिक की तलवार और शल्य चिकित्सक की छुरी बनती है, किन्तु इसमें विष या लोहे को दोषी नहीं बताया जा सकता. ज्ञान का उपयोग ही उसके परिणाम को निश्चित करता हैं. विज्ञान भी विशिष्ट और क्रमबद्ध ज्ञान ही हैं. हम चाहें तो उसे सत्य, शिव और सुंदर की अर्चना बना दें और चाहें तो उसे महाविनाश, अमंगल और कुरूपता का उपकरण बना दे.

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