स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध | Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध | Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindiहर भारतीय का है सपना स्वच्छ हो भारत अपना. Essay On Swachata & Swachh Bharat Swasth Bharat in Hindi Pdf में आज हम स्वच्छता के लिए शुरू किये गये स्वच्छ भारत अभियान पर हिंदी निबंध (Swachh Bharat Abhiyan Essay) पढ़ेगे. क्लीन इंडिया मिशन पर यहाँ दिया गया छोटा बड़ा निबंध कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के स्टूडेंट्स के लिए हैं. वे छोटा भाषण 5 लाइन, 10 लाइन 100,150, 200,250, 300,400,500 शब्दों में स्वच्छ भारत अभियान निबंध को परिक्षा के दृष्टिकोण से याद भी कर सकते हैं.

Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi

Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi

essays on Swachh Bharat Abhiyan in easy Hindi language (स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध और भाषण) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन चलाकर देश को गुलामी से मुक्त करवाया. परन्तु क्लीन इण्डिया का उनका सपना पूरा नही हुआ. विश्व स्वास्थ्य संगठन की द्रष्टि से भारत में स्वच्छता की कमी है.इन्ही बातों का चिन्तन कर देश की वर्तमान स्थति को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान (Essay on Swachh Bharat Abhiyan) का शुभारम्भ 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के अवसर पर किया. इस अभियान से पूरे देश में सफाई एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों को गंदगी से मुक्त करवाने का संदेश दिया गया

स्वच्छ भारत अभियान निबंध | Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi In 300 Words

Essay on cleanliness in school in hindi. Swachh vidyalaya essay- हमारे देश में नगरों के आस-पास, बस्तियों में गाँवों एवं ढाणियों में शौचालय नही है विद्यालयों में भी पेयजल एवं शौचालयों का नितांत अभाव है. इससे खुले में शौच जाने से गंदगी बढ़ती है तथा पेयजल के साथ ही वातावरण भी दूषित होता है.

गंदगी के कारण स्वास्थ्य खराब रहता है और अनेक बीमारियाँ फैलती है. वर्तमान में देश में लगभग 12 करोड़ शौचालयों की आवश्यकता है. एक सर्वेक्षण के अनुसार 1.56 लाख सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में शौचालयों की व्यवस्था नही है. अतः स्वच्छता अभियान का पहला उद्देश्य शौचालयों का निर्माण करना तथा स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करना है. इस तरह देश को गंदगी से मुक्त करवाना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है.

स्वच्छ भारत अभियान का क्षेत्र

भारत सरकार ने इस अभियान को आर्थिक स्थति से जोड़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में गंदगी के कारण प्रत्येक नागरिक को बीमारियों पर औसतन सालाना बारह तेरह हजार रूपये खर्च करना पड़ता है. यह आंकड़ा गरीब परिवारों का बताया गया है.

यदि स्वच्छता रहेगी तो बीमारियों के कारण अनावश्यक आर्थिक बोझ भी नही बढ़ेगा. इस द्रष्टि से सरकार ने बीपीएल एवं लक्षित, लघु सीमांत किसान, भूमिहीन श्रमिक, एवं गरीब परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में बारह हजार रूपये ‘ स्वच्छ ग्रामीण मिशन‘ हेतु देने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, शिशु मल निस्तारण, कूड़ा कचरा एवं गंदा जल निवारण तथा विद्यालयों में शौचालयों के साथ ही साबुन के प्रयोग कर जोर दिया गया है.

स्वच्छ भारत अभियान आरम्भ होने के बाद इस व्यय वर्ष में लगभग चार सौ साठ करोड़ रूपये इस योजना पर खर्च किये जा चुके है. अभी तक विद्यालयों में साठ हजार शौचालय बन पाए है. ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है. गंगा यमुना नदियों की स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है. इस कार्य में सभी प्रदेशो की सरकारे, बड़े कार्पोरेट सेक्टर व समाज के प्रतिष्टित लोग सक्रिय सहयोग कर रहे है.

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध | Short Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi

प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आवहान पर स्वच्छता अभियान के प्रति लोगों में काफी जूनून देखा जा रहा है. इस अभियान की शुरुआत के बाद मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों पर व्यापक असर पड़ा है, जिन्होंने सफाई का काम दूसरों पर टालने की बजाय इसे स्वयं करने की दिशा में कदम बढाए है, जो इस कार्यक्रम के सकारात्मक परिणामों की तरफ संकेत करता है.

स्वच्छ भारत अभियान से लाभ- राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान से सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य के क्षेत्र में रहेगा. आम नागरिकों को अस्वच्छता जनित बीमारियों से छुटकारा मिल सकेगा. इससे दवाओं पर व्यर्थ में पैसा बहाने की आवश्यकता भी नही रहेगी. इसके साथ ही हमारा पूरा भारत स्वच्छ हो सकेगा जिससे भारत की दूसरें देशों में भी अच्छी छवि जाएगी. यदि हम अपने वातावरण को पूर्णत स्वच्छ बनाने में कामयाब हो पाए तो इससे प्रदूषण का स्तर भी गिरेगा.

जल मल की गंदगी का समुचित निस्तारण होने से हमारा पेयजल भी शुद्ध होगा. गंगा और यमुना जैसी नदियों का जल पूर्व स्थति के अनुसार अमृत जैसा हो पाएगा. सिचित कृषि उपजों में भी स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा. स्वच्छ भारत अभियान से हमारे देश का वातावरण हर दिशा में स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त हो सकेगा.

उपसंहार- स्वच्छ भारत अभियान अभी तक अपने शुरूआती चरणों में है. इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती तक चलाकर देश को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाकर प्रस्तुत करना है. भारत सरकार के इस अभियान में जनता के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता है. अभी तक स्वच्छ भारत अभियान के परिणाम अच्छे सामने आ रहे है. उम्मीद है इसी तरह सरकार का यह कार्यक्रम सफलता प्राप्त करेगा.

Clean India Mission Essay In Hindi | Essay On Swachh Bharat Abhiyan | स्वच्छ भारत अभियान हिंदी निबंध

प्रस्तावना: स्वच्छता का अर्थ है साफ़ सफाई. साफ़ सफाई से रहना मनुष्य जीवन के लिए अति आवश्यक हैं. यदि इस बात पर हम दृष्टि डाले तो हमारी माताएं सुबह सोकर उठने के बाद सबसे पहले हमारे घर को झाड़ती बुहारती हैं. और घर के सभी सदस्य नहाने धोने का काम करते हैं. यह स्वच्छता या साफ़ सफाई का काम हमारे दैनिक जीवन में एक सहज प्रक्रिया हैं, क्योंकि इसके पीछे हमारी निरोगी काया बनाये रखने की अवधारणा ही तो हैं.

स्वच्छ भारत अभियान क्या हैस्वच्छता का भाव हमारे मन से जुड़ा हुआ हैं. इसी भाव के प्रति जागरूकता सृजित करने के लिए तथा देश को साफ़ सुथरा व गंदगी से मुक्त बनाने के लिए हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी स्वच्छ भारत सुंदर भारत अभियान का औपचारिक शुभारम्भ 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के शुभ अवसर पर नई दिल्ली में वाल्मीकि बसती में झाड़ू लगाकर किया.

सुंदर भारत, स्वच्छ भारत अभियान की घोषणा स्वच्छ भारत सुंदर भारत अभियान की घोषणा वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में की थी. इसके तहत उन्होंने कहा था कि 2019 में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती तक देश को एक स्वच्छ भारत के रूप में प्रस्तुत करना हैं. उनके अनुसार यही गांधीजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, क्योंकि गांधीजी ने ही देशवासियों को क्यूट इंडिया क्लीन इंडिया का संदेश दिया था.

स्वच्छता आंदोलन का आव्हान– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता आंदोलन का आव्हान करते हुए संदेश के रूप में कहा था कि हम मातृभूमि की स्वच्छता के लिए अपने आप को समर्पित कर दे. इसके लिए प्रत्येक सप्ताह दो घंटे अर्थात सभी देशवासी प्रतिवर्ष सौ घंटे का योगदान करे.

इसके साथ ही धार्मिक और राजनितिक नेताओं, महापौरों, सरपंचों, उद्योगपतियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे शहरों, आसपास के क्षेत्रों, गाँवों, कार्य स्थलों तथा घरों की स्वच्छता की कार्य योजना बनाकर उसे क्रियान्वित करने में जुट जाए. इसके लिए उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत को 20-20 लाख रूपये सालाना अनुदान देने की घोषणा की और ग्रामीण क्षेत्रों में 11.11 करोड़ शौचालयों का निर्माण के लिए 1.34 लाख करोड़ रूपये की मंजूरी प्रदान की गई हैं.

उपसंहारस्वच्छता ही जीवन है स्वच्छ रहना, हमारा अनिवार्य कर्म और धर्म है. इस सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टि से स्वच्छ भारत सुंदर भारत अभियान एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रदान अभियान हैं. इसमें हम सबकी भागीदारी वांछनीय हैं.

Essay on Swachh Bharat Abhiyan In Hindi 500 Words For Class 8Th

स्वच्छता क्या है– निरंतर प्रयोग में आने पर या वातावरण के प्रभाव से वस्तु या स्थान मलित होता रहा हैं. धूल कण धुप कूड़ा करकट की परत को साफ़ करना, धोना, मैल और गंदगी को हटाना ही स्वच्छता कही जाती हैं. अपने शरीर वस्त्रों, घरों, नालियों, यहाँ तक कि अपने मोहल्लों और नगरों को स्वच्छ रखना हम सबका दायित्व हैं.

.स्वच्छता के प्रकार– स्वच्छता को मोटे रूप में दो प्रकार से देखा जा सकता हैं. व्यक्तिगत स्वच्छता और सार्वजनिक स्वच्छता. व्यक्तिगत स्वच्छता में अपने शरीर को स्नान आदि से स्वच्छ बनाना, घरों में झाड़ू पौछा लगाना, स्नानगृह तथा शौचालयों को विसंक्रमक पदार्थों द्वारा स्वच्छ रखना. घर और घर के सामने से बहने वाली नालियों की सफाई ये सभी स्वच्छता के अंतर्गत आते हैं. सार्वजनिक स्वच्छता में मोहल्ले और नगर की स्वच्छता आती है जो प्रायः नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों पर निर्भर रहती हैं. सार्वजनिक स्वच्छता भी व्यक्तिगत सहयोग के बिना पूर्ण नही हो सकती.

.स्वच्छता के लाभ– कहा गया है कि स्वच्छता इश्वर को प्रिय है ईश्वर का कृपापात्र बनने की दृष्टि से ही नही अपितु मानव जीवन को सुखी, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाए रखने के लिए स्वच्छता आवश्यक ही नही अनिवार्य हैं. मलिनता या गंदगी न केवल आँखों को बुरी लगती हैं. बल्कि इसका हमारे स्वास्थ्य से भी सीधा सम्बन्ध हैं. गंदगी रोगों को जन्म देती हैं. प्रदूषण की जननी हैं और हमारी असभ्यता की निशानी हैं, अतः व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने में योगदान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य हैं.

स्वच्छता के उपर्युक्त प्रत्यक्ष लाभों के अतिरिक्त कुछ अप्रत्यक्ष और दूरगामी लाभ भी हैं. सार्वजनिक स्वच्छता से व्यक्ति और शासन दोनों लाभान्वित होते हैं. बीमारियों पर होने वाले खर्च में कमी आती हैं. इस बचत को अन्य सेवाओं में उपयोग किया जा सकता हैं.

स्वच्छ भारत अभियान में हमारा योगदान– स्वच्छता केवल प्रशासनिक उपायों के बलबूते नही चल सकती. इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी परम आवश्यक होती हैं. हम अनेक प्रकार से स्वच्छता में योगदान कर सकते हैं, जो निम्नलिखित हो सकते हैं.

घर का कूड़ा करकट गली या सड़क पर न फेके. उसे सफाई कर्मी के आने पर उसकी ठेल या वाहन में ही डाले. कूड़े कचरे को नालियों में न बहाए. इससे नालियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता हैं. पोलीथिन का बिलकुल प्रयोग न करे, यह गंदगी बढ़ाने वाली वस्तु तो हैं ही पशुओं के लिए भी बहुत घातक हैं. घरों के शौचालयों की गंदगी नालियों में न बहाएं. खुले में शौच न करे तथा बच्चों को नालियों या गलियों में शौच न कराएं. नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों का सहयोग करे.

उपसंहार: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया हैं. इसका प्रचार प्रसार मिडिया के माध्यमों से निरंतर किया जा रहा हैं. अनेक जन प्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, प्रसिद्ध सेलिब्रेटी इसमें भाग ले रहे हैं. जनता को इसमें अपने स्तर से पूरा सहयोग देना चाहिए. इसके साथ ही गाँवों में खुले में शौच करने की प्रथा को समाप्त करने के लिए लोगों को घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा हैं. उसके लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही हैं. इन अभियानों में समाज के प्रत्येक वर्ग को पूरा सहयोग करना चाहिए.

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प्रस्तावना– स्वच्छता मनुष्य की पहचान हैं. अपने शरीर, वस्त्रों और परिवेश को वह साफ़ सुथरा रखना चाहता हैं. मनुष्य ही नहीं पशु पक्षी भी स्वच्छता का ध्यान रखते हैं. चिड़ियाँ अपने घोंसले में बीट नहीं करती कुत्ता भी बैठता हैं तो अपने स्थान को अपनी पूंछ से बुहार लेता हैं.

स्वच्छता और पवित्रता– भारतीय संस्कृति में पवित्रता स्वच्छता का ही पर्याय हैं धर्म व संस्कृति में लोगों को पवित्रता अपनाने का उपदेश दिया गया हैं. तन की पवित्रता तो शरीर की स्वच्छता हैं ही, मन की पवित्रता भी मन से बुरे विचारों को हटाकर उसे स्वच्छ बनाना हैं. मन्दिर मस्जिदों को पवित्र बनाए रखने का अर्थ उनको अंदर बाहर की गंदगी से मुक्त करके स्वच्छ बनाना ही हैं.

सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता– भारत में सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के प्रति उपेक्षा देखी जाती हैं. इसका कारण कुछ तो लोगों की निर्धनता है और कुछ उसका अज्ञान. हम अपने घर को झाड़कर कूड़ा सड़क पर फेकना बुरा नहीं समझते. घर का पानी हम नालियों में बहा देते हैं पर गली और सड़क को साफ़ करना तो शायद ही कोई सोचता हो, हम समझते हैं कि यह काम हमारा नहीं, नगरपालिका आदि संस्थाओं का हैं.

विदेशों में स्वच्छता– स्वच्छता प्रेम के सम्बन्ध में विदेशी हमसे आगे हैं. वे अपने नगरों को गंदा नहीं करते हैं, कूड़ा करकट इधर उधर नहीं फेकते, उन्हें स्वयं साफ़ करने में संकोच नहीं करते. अपने घर के सामने की सड़क की सफाई करना अनुचित नहीं मानते. मैंने एक विदेशी को देखा. उसने केले खरीदे, वह पैदल केले खाते हुए चल रहा था परन्तु छिलके अपने कंधे पर लटके थैले में डाल रहा था. आगे कूड़ेदान मिलने पर उसने छिलकों को उसमें डाला. इसके विपरीत भारत में हम केले के छिलकों को सड़क पर फेकना बुरा नहीं मानते.

राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान- हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत को स्वच्छ रखने का बीड़ा उठाया हैं. उन्होंने अपने हाथ में झाड़ू पकड़कर सार्वजनिक स्थानों की सफाई करके स्वच्छता अभियान का आरम्भ किया हैं. आवश्यकता है इस अभियान को जनता के जीवन में उतारने की, यदि ऐसा नहीं होता है तो यह अखबारों में छपने वाली तथा टीवी पर दिखाई जाने वाली खबर बनकर ही रह जाएगा.

स्वच्छता अभियान से पूर्व भी भारत के कई महान पुरुष अपने आचरण से स्वच्छता के उदहारण प्रस्तुत कर चुके हैं. महात्मा गांधी स्वयं अपने आश्रम की सफाई करते थे. प्रसिद्ध कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द अपने घर में स्वयं झाड़ू लगाते थे.

स्वच्छता की प्रेरणा– राष्ट्रीय स्वच्छता का अभियान लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाया गया हैं. किसी कार्य की प्रेरणा दो प्रकार से दी जाती हैं एक पुरस्कार देकर तथा दो अवहेलना के लिए दंड देकर. भारत का जनसंख्या नियंत्रण अभियान भी पुरस्कृत करने पर आधारित होने के कारण सफल न हो सका हैं. स्वच्छता अभियान को  अधिक सफलता मिलना संदिग्ध हैं. इन दोनों आंदोलनों की सफलता के लिए उन्हें कठोर दंड की व्यवस्था से जोड़ना भी जरुरी हैं. सड़क पर कूड़ा फेकने, गंदा करने, थूकने, मल मूत्र आदि पर कठोर दंड की व्यवस्था किया जाना आवश्यक हैं.

स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक भी करना चाहिए. उनको समझाया जाना चाहिए कि उनको स्वास्थ्य का स्वच्छता से गहरा सम्बन्ध हैं. स्वच्छता का उदहारण प्रस्तुत करने वालों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए तथा उनको प्रचारित करना भी आवश्यक हैं.

उपसंहार– स्वच्छता का हमारे जीवन से अभिन्न सम्बन्ध हैं. स्वच्छ तन, स्वच्छ मन, स्वच्छ परिवेश, स्वच्छ स्वदेश हमारा संकल्प होना चाहिए. स्वच्छता रखने से ही देशवासी स्वस्थ रह सकेगे और आनन्दपूर्ण जीवन जी सकेगे. अतः अंतर बाह्य स्वच्छता को जीवन का लक्ष्य बनाने की महत्ती आवश्यकता हैं.

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