चाय पर निबंध | Essay On Tea In Hindi

Essay On Tea In Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज चाय पर निबंध लेकर आए हैं. हमारे देश में चाय आम जीवन का एक अहम हिस्सा है अब लोगों के दिन की शुरुआत सूरज की पहली किरण से नहीं बल्कि चाय के घूट से शुरुआत होती हैं. आज के चाय पर निबंध, भाषण, अनुच्छेद, लेख में हम चाय के इतिहास, आत्मकथा / ऑटोबायोग्राफी, लाभ हानि, भारत में चाय के बागान आदि पर चर्चा इस निबंध में करेंगे.

Essay On Tea In Hindi

Essay On Tea In Hindi

चाय भारत ही नहीं संसार में एक लोकप्रिय पेय है जो चाय के पौधे की पत्तियों को उबालकर तैयार की जाती हैं. स्फूर्ति के लिए शुरू शुरू में चाय का सेवन किया जाता हैं बाद में इसकी लत लग जाती हैं. भारत में चाय का इतिहास कोई सौ दो वर्ष पुराना ही है मगर विशेषकर चीन में सदियों से उपयोग होता रहा हैं. भारत में चाय लाने का श्रेय ईस्ट इंडिया कम्पनी को जाता हैं आज यह हमारी सभ्यता का अहम हिस्सा हो चुकी हैं. 70 प्रतिशत भारतीय दिन में दो से अधिक बार चाय पीते हैं, घर में मेहमान के आने पर चाय पिलाना अहम रिवाज बन चुका हैं.

History of Tea, Who & Where invented, Paragraph in Hindi

भारत दुनियां का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश हैं, चाय का जन्म चीन में हुआ और आज तक चीन में सर्वाधिक मात्रा में चाय का उत्पादन होता हैं वहीँ निर्यात के मामले में श्रीलंका पहले स्थान पर हैं. जिसका लगभग सम्पूर्ण विदेशी व्यापार चाय पर निर्भर करता हैं. भारत में चाय के सम्बन्ध में एक हैरान करने वाला तथ्य यह है कि दौ सो वर्ष पूर्व यहाँ कोई व्यक्ति चाय से परिचित नहीं था मगर एक योजना के तहत सड़कों पर चाय के ड्रम रखे गये आने जाने वाले लोगों को मुफ्त में चाय पिलाई गई और इसका नतीजा यह हुआ कि आज एक अरब भारतीयों के दिन की शुरुआत चाय की प्याली से ही होती हैं.

चाय के आविष्कार और इसकी पत्तियों की पहचान से जुड़ी रोचक कहानी चीन के एक शासक शेन की हैं. कहते है कि वे हमेशा उबला हुआ पानी ही पीया करते थे. उनका निजी रसोइया ली उनके लिए पानी तैयार करता था. एक दिन अनायास ही जब वह पानी को उबाल रहा था तो पास ही उगी झाड़ी की कुछ पत्तियां उसमें आ गिरी, और उबलते जल में वे भी उबल गई और पानी का रंग बदल गया.

जब शेन ने वह पानी पिया तो तुरंत ली को आवाज दी गई, वह अपनी गलती से परिचित था अतः डरते डरते शेन के पास गया तो उसे दंड की बजाय पुरूस्कार दिया गया. शेन को उस पत्तियों से युक्त जल बेहद मनभावन लगा और उसी दिन से वे उस पेड़ की पत्तियों वाले उबले जल को ही पीने लगे. वे पत्तियां चाय की थी और इस तरह शेन चाय पीने वाले पहले चीनी शासक थे. बाद में इसमें शक्कर और दूध मिलाकर पीया जाने लगा. आज हम काली, अदरक, तुलसी, ग्रीन टी के रूप में भी चाय का सेवन करते हैं.

चाय की आत्मकथा निबंध Essay on Autobiography of Tea

आज चाय प्रत्येक देश में उपयोग ली जाने वाली पेय बन चुकी हैं. चाय की विकास यात्रा चीन से शुरू होकर ब्रिटेन पहुंची और वहां से सभी देशों में. चाय को औद्योगिक आधार बनाकर ब्रिटिश कम्पनियों ने अपने उपनिवेशों का विस्तार किया तथा वहां की उपजाऊ जमीनों पर चाय की खेती करवानी शुरू कर दी.

चीन के एक राजदूत ने भेट स्वरूप रानी एलिजाबेथ को उपहार में चाय की पत्तियां भेजी. रानी को यह भेट बहुत पसंद आई और उसने इंग्लैंड जापान आदि में इसे प्रसारित करवाया. उस समय चाय की कीमत १०० रूपये प्रति पौंड थी. ब्रिटेन में चाय का चलन शुरू ही हुआ था कि ईस्ट इंडिया कम्पनी ने चाय का व्यापार आरम्भ कर दिया. यह कम्पनी चीन से चाय की खरीद करती तथा अधिक दामों में बेचने लगी. मगर १८३४ में चीनी सरकार ने चाय की बिक्री पर रोक लगा दी तदोपरान्त इंग्लैंड व औपनिवेशिक देशों में चाय के बागान बनाए गये.

ईस्ट इण्डिया कम्पनी ही भारत में चाय लेकर आई और कुमाऊ व असम के सादिया में इसकी खेती की जाने लगी. तब से धीरे धीरे भारतीयों को इसकी लत लगानी शुरू की गई और देखते ही देखते कम्पनी ने भारत की जमीन पर चाय पैदाकर भारतीयों को ऊँचे दाम में बेचनी शुरू कर दी. दार्जलिंग जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी चाय की खेती बड़े पैमाने पर की जाती हैं. चाय के पौधे की मुख्यतया चार किस्में पाई जाती हैं. उपयुक्त स्थान व जलवायु में इसे उगाया जाता हैं. १० से ३० फीट तक ऊँचे चाय के झाड़ होते हैं. जिन पर २ से १० इंच लम्बी पत्तियां लगती है उनका उपयोग चाय बनाने के लिए किया जाता हैं.

चाय के बागानों में अधिकतर स्त्रियाँ ही काम करती हैं जो अपनी पीठ पर बड़ी टोकरी बांधकर उनमें चाय की पत्तियों को बिनती हैं जिनके परिष्करण के बाद पैकिंग के रूप में यह हमारे बाजारों में उपलब्ध होती हैं. चाय का हमारे देश में बड़ा कारोबार हैं यहाँ रहने वाले अधिकतर लोग सवेरे और दिन में कई समय चाय पीते हैं. ढाबे, रेस्तरा और बड़ी होटलों में चाय आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं साथ ही यह प्रत्येक घर में भी बनती हैं. करोड़ों लोगों की आजीविका चाय पर निर्भर हैं ये बागान के मालिक, मजदूर, व्यापारी, उद्योग पति, दुकानदार या चाय बेचने वाले के रूप में अपना रोजगार कमाते हैं.

चाय बनाने का भारतीय तरीका

सामग्री

  • 1 प्याला पानी।
  • 1 चम्मच चाय पत्ती।
  • 1 चम्मच चीनी।
  • थोड़ी सी इलायची या अदरक को कूटकर डाल दे

विधि

  • एक कप पानी में चाय पत्ती डालकर चूल्हे पर उबाले
  • अब उसमें पानी के जितना दूध डाले
  • थोड़ी देर उबलने के बाद इलायची या अदरक डाले
  • अब आपकी चाय तैयार हैं.

चाय और हमारा स्वास्थ्य Impact of Tea in our Health

हमारे दादा और परदादा के जमाने में चाय जैसी कोई चीज नहीं थी, मगर हम तो उसके आदी बन चुके हैं. सुबह की पहली चाय के बाद ही हमारे शरीर में स्फूर्ति आती हैं. यदि घर पर कोई मेहमान आए तो चाय पिलाना अहम रीवाज बन चूका हैं. हम एक गुणवान वस्तु की नजर से चाय को इसलिए देखते है क्योंकि यह स्फूर्ति लाने, नींद व आलस दूर करने में मदद करती हैं मगर इसके भयानक दुष्परिणाम भी है जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए घातक हैं. चाय में पाए जाने वाले तीन मूल विष यह हैं.

  • थीनेन– शुरू शुरू में हमें चाय पीने में जो आनन्द की प्राप्ति होती है इसका कारण थीन तत्व है जो एक तरह का घातक विष है तथा दिमाग को बुरी तरह प्रभावित करता हैं.
  • टनीन– चाय में पाया जाने वाले यह सबसे घातक विष हैं. इसका उपयोग चमड़े आदि को नर्म बनाने के लिए आमतौर पर उपयोग में लिया जाता हैं. टनीन हमारे शरीर में जाकर पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता हैं यह भोजन पचाने वाली कोशिकाओं को निष्प्रभावी कर देता है जिसके कारण कब्ज और गैस बनने की समस्या देखी जाती हैं. यह नींद को भी मिटा देता है तथा मादक विष होने के कारण तुरंत चाय के सेवन पर ताजगी का एहसास दिलाता है मगर इसका प्रभाव कम होने पर शरीर में थकावट आ जाती हैं.
  • केफेन– केफेन निकोटिन की तरह लत पैदा करने वाला विष है जिसके कारण कुछ दिन सेवन करने के बाद हम चाय के आदि बन जाते हैं. यह न केवल लत लगाता है बल्कि व्यक्ति के शरीर को दीमक की भांति खोखला कर देता हैं. दर्द, गुर्दों तथा हृदय से जुड़े रोगों को जन्म देता हैं. चाय के आदि व्यक्ती को बार बार पेशाब करने की समस्या होती हैं साधारण व्यक्ति से तीन गुणा अधिक पेशाब करने की समस्या केफेन खड़ी कर देता हैं.

चाय पीने के फायदे और नुकसान Advantages Disadvantages of Drinking Tea in Hindi

फायदे

  • नींद को दूर करती है
  • बढ़ती उम्र को कम दिखाती है
  • चाय पीने से ऊर्जा मिलती है
  • वजन कम करती है
  • याददाश्त बढ़ाती है
  • एलर्जी दूर करते हैं
  • हार्ट की समस्याओं में मददगार
  • कम कैलोरी का पेय पदार्थ
  • बॉडी हाइड्रेट बनी रहती है
  • संक्रमण रोधी

नुकसान

  • लत लगना
  • शुगर की मात्रा में वृद्धि
  • पीले दांत
  • पेट का अल्सर
  • प्रोस्टेट कैंसर की सम्भावना प्रबल
  • पेट में कब्ज या गैस
  • नींद आने की समस्या
  • बार बार मूत्र विसर्जन
  • भूख कम हो जाना
  • हड्डियों की कमजोरी व दर्द
  • गर्भपात का खतरा
  • पेट में सूजन

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों Essay On Tea In Hindi का यह निबन्ध आपको पसंद आया होगा. चाय पर निबंध में दी गई जानकारी आपकों कैसी लगी हमें कमेंट कर जरुर बताएं.

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