इस्लाम का भारतीय समाज व संस्कृति पर प्रभाव पर निबंध | Essay on the impact of Islam on Indian society and culture In Hindi

इस्लाम का भारतीय समाज व संस्कृति पर प्रभाव पर निबंध | Essay on the impact of Islam on Indian society and culture In Hindi: भारत में इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद सर्वाधिक मुस्लिम रहते हैं. भारत में इस्लाम का उदय सातवीं सदी से माना जाता हैं. मगर मुगलों के बाद से अरब के देशों से इस्लाम भारतीय उपमहाद्वीप में तेजी से फैला, यहाँ के मूल निवासियों को जबरदस्ती से इस्लाम मजहब में लिया गया. आज के निबंध स्पीच भाषण में हम भारत के समाज पर इस्लाम के प्रभाव परिणाम को समझने का प्रयास करेंगे.

Essay on impact of Islam on Indian society and culture In Hindi

Essay on the impact of Islam on Indian society and culture In Hindi

इस्लाम का भारतीय समाज व संस्कृति पर प्रभाव– इस्लाम के भारतीय समाज व संस्कृति पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े.

भारतीय समाज पर इस्लाम का प्रभाव (Impact of Islam on Indian Society)

स्त्रियों की स्थिति में गिरावट (Decline in the status of women)

मुसलमानों के प्रभाव के फलस्वरूप हिन्दू स्त्रियों की दशा में गिरावट आती गई. मुसलमान हिन्दू कन्याओं का अपहरण और उनसे बलात विवाह करते थे. अतः स्त्रियों की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई और उन्हें घर की चारदीवारी में बंद रहने के लिए बाध्य कर दिया गया.

जाति व्यवस्था का कठोर होना (Caste system hardening)

मुसलमानों से अपना धर्म तथा समाज की रक्षा के उद्देश्य से हिन्दुओं ने जाति प्रथा के बन्धनों को कठोर बना दिया. नियमों का उल्लंघन करने वालों को जाति से निष्काषित कर दिया जाता था.

बाल विवाह (child marriage)

मुसलमानों द्वारा अपहरण के भय से हिन्दू लोग अपनी कन्याओं का विवाह बाल अवस्था में ही कर देते थे. भारतीय समाज में बाल विवाह का प्रचलन इस्लाम के प्रभाव की ही देन हैं.

पर्दा प्रथा (Purdah system)

भारतीय समाज में पर्दा प्रथा को भी इस्लामी सभ्यता की देन माना जाता हैं.

बहु विवाह (Multi marriage)

इस्लाम के प्रभाव के कारण बहु विवाह प्रथा को भी प्रोत्साहन मिला.

सती प्रथा तथा जौहर प्रथा (Sati system and Jauhar system)

मुसलमानों के आगमन के पश्चात सती प्रथा का प्रचलन बढ़ता चला गया. मुस्लिम शासन की स्थापना के बाद जब तुर्क शासकों का आक्रमण राजपूत राज्यों पर होने लगा तो राजपूत रानियाँ व अन्य स्त्रियाँ अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर द्वारा प्राण त्याग देती थी.

दास प्रथा (Slavery)

भारतीय समाज में दास प्रथा इस्लाम के प्रवेश से पहले से ही थी, परन्तु मुस्लिम शासन की स्थापना के बाद दास प्रथा अधिक विकसित हुई.

स्त्री शिक्षा के विकास में बाधा (Hindrance in the development of female education)

स्त्रियों का कार्यक्षेत्र घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया गया जिससे उन्हें शिक्षा से वंचित रहना पड़ा.

वेशभूषा पर प्रभाव (Effect on costumes)

मुसलमान पायजामा, शेरवानी, अचकन तथा कर्ता आदि पहनते थे. मुसलमानों के सम्पर्क में आने वाले भारतवासियों ने भी इस प्रकार की वेश भूषा को अपना लिया.

खान पान के क्षेत्र में प्रभाव (Influence in the area of food and drink)

मुस्लिम प्रभाव के कारण भारत में बालूशाही, कलाकंद, गुलाब जामुन, इमरती आदि मिठाइयों का प्रचलन हुआ. इसके अतिरिक्त भारतीयों में मांस का सेवन करने की प्रवृति बढ़ी.

इस्लाम का हिन्दू धर्म पर प्रभाव (Islam’s influence on Hinduism)

धार्मिक कट्टरता का जन्म (Birth of religious fanaticism)

इस्लाम के आघातों से हिन्दू धर्म को बचाने के लिए रूढ़िवादिता तथा धार्मिक कट्टरता का जन्म हुआ.अतः धार्मिक नियमों तथा रीति रिवाजों में कठोरता लाने का प्रयास किया जाने लगा.

एकेश्वरवादी भावना (Monotheistic spirit)

इस्लाम की एकेश्वरवाद की भावना ने हिन्दू विचारकों को भी प्रभावित किया तथा हिन्दू धर्म में भी एकेश्वरवाद की भावना प्रबल होने लगी.

मूर्ति पूजा में अविश्वास (Mistrust of idol worship)

इस्लाम धर्म मूर्ति पूजा का कट्टर विरोधी हैं. जब मुसलमान आक्रमणकारी भारत आये तो उन्होंने हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियों का खंडन करना शुरू कर दिया गया. हिन्दुओं का मूर्ति पूजा पर से धीरे धीरे विश्वास उठने लगा.

भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement)

यदपि भक्ति आंदोलन इस्लाम के प्रभाव के फलस्वरूप प्रारम्भ नहीं हुआ था. परन्तु जब वह इस्लाम से प्रभावित अवश्य हुआ था. मुसलमान शासकों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दू जनता में निराशा की भावना उत्पन्न हो गई तथा उन्हें सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति में ही अपनी सुरक्षा दिखाई देने लगे.

विभिन्न सुधार (Various improvements)

इस्लाम के फलस्वरूप धार्मिक सुधारों का प्रादुर्भाव हुआ. कबीर, नानक, दादू, रैदास आदि सुधारकों ने जातिप्रथा, छुआछूत, धार्मिक पाखंडों तथा बाह्य आडम्बरों का विरोध किया तथा शुद्ध आचरण, ईश्वर की एकता ह्रदय की शुद्धता आदि पर बल दिया.

आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव (Economic impact)

भारत का प्रशांत महासागर और भूमध्य सागर के देशों तक फ़ैल गया. भारत में वस्त्र, अनाज, नील, हाथीदांत का सामान अफीम आदि का निर्यात किया जाता था तथा ऊंट, घोड़े, शराब आदि का आयात किया जाता था, कृषि के साधनों में पर्याप्त उन्नति के कारण उपज बढ़ गई.

शासन पर प्रभाव (Influence on governance)

इस्लाम के प्रभाव से भारत के छोटे छोटे राज्य शासन से एकसूत्र के अंतर्गत आ गये. जिससे प्रशासनिक एकता के साथ साथ भारत के बहुत बड़े भाग में शान्ति स्थापित हो गई. मुसलमानों के बढ़ते हुए अत्याचारों से हिन्दू जनता में संगठन की भावना उत्पन्न हुई. दक्षिण में विजयनगर नामक हिन्दू राज्य की स्थापना की.

कला के क्षेत्र में प्रभाव (Influence in the field of art)

मुगलकाल के हिन्दू राजाओं के महलों पर मुगल निर्माण शैली का बहुत प्रभाव पड़ा. इसके सबसे सुंदर उदहारण आमेर की इमारतें, बीकानेर के राजमहल, जोधपुर और ओरछे के महली किले, दतिया के महल तथा डींग के भवन हैं. भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना के बाद धीरे धीरे हिन्दू तथा मुस्लिम कला तत्वों का सम्मिश्रण हुआ तथा भवन निर्माण की एक नवीन शैली का विकास हुआ, जिसे इंडो सैनिक शैली अथवा पठान शैली के नाम से पुकारा जाता हैं. इस शैली की इमारतों में कुतुबमीनार, अलाई दरवाजा, जौनपुर की अटाला मस्जिद, मांडू की अदीना मस्जिद आदि उल्लेखनीय हैं.

मुगलों की चित्रकला के विषयों, तकनीक और विविध अंगों को प्रभावित किया. मुगल चित्रकला के इस प्रभाव ने राजपूत चित्रकला शैली को पूर्ण रूप से परिवर्तित कर दिया. इसके फलस्वरूप 18 वीं सदी में कांगड़ा शैली का प्रादुर्भाव हुआ.

संगीत में ईरानी एवं हिन्दू रागों के सम्मिश्रण से नयें राग रागनियों का आविष्कार हुआ. प्राचीन भारतीय वीणा और ईरानी तम्बूरे के सम्मिश्रण से सितार का आविष्कार हुआ. मृदंग को तबले का रूप देने का श्रेय अमीर खुसरो को ही हैं. आधुनिक युग में कव्वाली तथा गजल मुस्लिम सभ्यता की ही देन हैं.

साहित्य एवं भाषा पर प्रभाव (Effect on literature and language)

भारतीय भाषाओं पर भी फ़ारसी, अरबी और तुर्की भाषाओं का प्रभाव पड़ा और इन भाषाओं से बहुत से शब्द हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, राजस्थानी आदि भाषाओं में अपना लिए गये. मुस्लिम भाषाओं के सम्पर्क और उनके क्रमिक सम्मिश्रण से उर्दू भाषा का प्रादुर्भाव हुआ.

भारतीय युद्ध प्रणाली पर प्रभाव (Impact on Indian War System)

हिन्दुओं ने मुसलमानों से तापखाने तथा बारूद का प्रयोग सीखा. बाबर ने हिन्दुओं को तुलुगमा युद्ध प्रणाली सीखी. तोपों के प्रयोग ने एक नई युद्ध प्रणाली का प्रादुर्भाव किया तथा हिन्दू राजाओं के रक्षात्मक युद्ध के तरीकों में क्रांति ला दी.

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