मूल्य वृद्धि पर निबंध | Essay on The Problem of Inflation in Hindi

मूल्य वृद्धि पर निबंध Essay on The Problem of Inflation in Hindi: आज विश्व भर में मध्यम वर्ग महंगाई और तेजी से बढ़ते मूल्य वृद्धि की समस्या सामने आ रही हैं. भारत भी मूल्य वृद्धि की समस्या से अछूता नहीं हैं. महंगाई डायन खाये जात हैं कहावत से सभी परिचित हैं. किस तरह एक आदमी का गुजारा करना कितना मुश्किल हो चुका हैं  भले ही  आवाम को अंग्रेजों से स्वतंत्र हो गई मगर आज वह मूल्य वृद्धि की प्रताड़ना झेल   रही हैं. मूल्य वृद्धि की समस्या और समाधान का निबंध यहाँ जानेगे.

मूल्य वृद्धि पर निबंध Essay on The Problem of Inflation in Hindi

मूल्य वृद्धि पर निबंध Essay on The Problem of Inflation in Hindi

बढ़ रहे हैं मूल्य तो क्या बढ़ रहा है देश
गिर रहे अधिकांश तो क्या उठ रहे हैं शेष

मुक्त बाजार, भूमंडलीकरण का दुष्प्रचार, विनिवेश का बुखार, छलांगे लगाता शेयर, बाजार, विदेशी निवेश के लिए पलक पावड़े बिछाती हमारी सरकार, उधार बांटने को बैंकों के मुक्त द्वार इतने पर भी गरीब और निम्न मध्यम वर्ग पर महंगाई की मार,यह विकास की कैसी विचित्र अवधारणा हैं. हमारे कर मंत्री नए नए करों की जुगाड़ में तो जुटे रहते हैंकिन्तु महंगाई पर अंकुश लगाने में उनके सारे हाईटेक कुंद हो रहे हैं.

महंगाई की विनाश लीला– हमारे देश में महंगाई एक निरंतर चलने वाली समस्या बन चुकी हैं. इसकी सबसे अधिक मार सिमित आय वाले परिवार पर पड़ती हैं. लोगों की आय बाजार के अनुरूप नहीं बढ़ रही हैं. अनाज, चीनी, तेल, ईधन, दाल, सब्जी, पेट्रोल, डीजल सभी के भाव आसमान को छू रहे हैं. पारिवारिक बजट गडबडा रहे हैं. निम्न वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग का जीना दूभर होता जा रहा हैं.

महंगाई के कारण– महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं.

  • उत्पादन कम और मांग अधिक
  • जमाखोरी की प्रवृति
  • सरकार की अदूरदर्शी नीतियाँ तथा भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और भ्रष्ट व्यवसायियों की सांठ गाँठ
  • जनता में वस्तुओं के संग्रह की प्रवृति
  • अंध परम्परा और दिखावे के कारण अपव्यय
  • जनसंख्या में निरंतर हो रही वृद्धि
  • सरकारी वितरण व्यवस्था की असफलता

महंगाई का स्वरूप– महंगाई सुरसा के मुख की तेजी से बढ़ रही हैं. सर्वाधिक मूल्य वृद्धि खाने पीने की वस्तुओं पर हो रही हैं. इससे गरीब लोग बुरी तरह त्रस्त हैं. उनका स्वास्थ्य गिर रहा है तथा शरीर निर्बल हो रहा हैं. गेहूँ भंडारण के अभाव में भीगकर सड़ जाता हैं परन्तु सरकार उसे जरूरतमंदों में बाँट नहीं पाती.

महंगाई के प्रभाव– महंगाई ने भारतीय समाज को आर्थिक रूप से जर्जर किया है. आवश्यक जरूरतों की पूर्ति भी साफ़ और सर्वविदित आमदनी से तो सम्भव नहीं हैं. परिणामस्वरूप समाज में अनैतिकता और भ्रष्टाचार पनप रहा हैं. महंगाई के कारण ही अर्थव्यवस्था में स्थिरता नहीं आ पा रही हैं. समाज में चोरी, छीना झपटी, डकैती आदि अपराध पनप रहे हैं. मूल्य वृद्धि सामाजिक अशांति का कारण भी बन सकती हैं.

महंगाई रोकने के उपाय– महंगाई को रोकने के लिए आवश्यक है कि बैंक अति उदारता से ऋण देने पर नियंत्रित करें. इससे बाजार में मुद्रा प्रवाह बढ़ता हैं. जीवन स्तर  और  प्रदर्शन के नाम पर  धन का अपव्यय रोका जाना  चाहिए. जमाखोरी और आवश्यक वस्तुओं के  वायदा कारोबार पर रोक लगनी चाहिए. आयात  और  निर्यात व्यापार में संतुलन बनाया जाना चाहिए. उच्च पदाधिकारियों द्वारा गैर जिम्मेदारीपूर्ण बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए. इस दिशा में अंतिम उपाय जनता द्वारा सीधी कार्यवाही हैं. जमाखोर व्यापारियों और भ्रष्ट अधिकारियों का घेराव और सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए.

उपसंहार– अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ भी एक सीमा पर महंगाई के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन इनकी आड़ लेकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती. रिजर्व बैंक और सरकार के तकनीकी जादू टोनों से अगर महंगाई रूकनी होती तो कब की रूक जाती. मगर यहाँ तो हालत ये हैं मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की, जब तक मुक्त व्यापार के पाखंड की दुहाई देना छोड़ कर सरकार की बड़ी कार्यवाही नहीं करेगी, महंगाई नहीं रूकेगी.

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