लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती पर निबंध 2019 – Essay On Tilak Jayanti In Hindi

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लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती पर निबंध 2019 - Essay On Tilak Jayanti In Hindi

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती पर निबंध 2019 – Essay On Tilak Jayanti In Hindi

भारत मां के अमर सपूत जिन्होंने वतन की आजादी के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया था, ऐसे ही वीर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की आज जयंती हैं. उग्रवादी चेतना, विचारधारा, साहस, बुद्धि और अपनी अटूट देशभक्ति के कारण ये जनप्रिय नेता थे, तिलक ही पहले भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने प्रथम बार ब्रिटिश हुकुमत से भारत के पूर्ण स्वराज्य की मांग उठाई थी. इनका जन्म 23 जुय 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था. इन्हें बचपन से मराठा वीरों की कहानियां सुनने का शौक था. तिलक के दादाजी उन्हें भारत के स्वतंत्रता सेनानी व 1857 क्रांति के नायक तांत्या टोपे, नाना साहब और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की गाथाएं सुनाते तो इनका रोम रोम खड़ा हो जाता था.

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर रहूंगा का नारा लोकमान्य तिलक ने दिया, यह मात्र जन उद्देलन नहीं था बल्कि तिलक के विचार  उनके जोश व जूनून तथा  आजादी की खातिर कुर्बान होने वाले वीरों  के उदगार बन गये थे.   समाज सुधारक, राष्ट्रीय नेता, भारतीय इतिहास, संस्कृत, हिन्दू धर्म, गणित और खगोल विज्ञान पर इनकी गहरी पकड़ थी, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के जनक के रूप में तिलक के व्यक्तित्व को हर देशवासी आज स्मरण कर रहा हैं.

Lokmanya Bal Gangadhar Tilak Jayanti Essay In Hindi

तिलक की आरम्भिक शिक्षा रत्नागिरी में हुई इसके पश्चात पिताजी के स्थानान्तरण के साथ ही ये पूना चले गये. सोलह साल की आयु में जब ये मेट्रिक में थे, इनका विवाह सत्यभामा के साथ हुआ, तिलक के बचपन का नाम बलवंत राव था संगे सम्बन्धी व मित्र इन्हें बाल के नाम से ही पुकारते थे, इनके पिताजी का नाम गंगाधर था, इसलिए ये बाल गंगाधर तिलक कहलाएं. इन्होने अंग्रेजी हुकुमत के कच्चे चिट्टों को अपनी दो पत्रिकाएँ केसरी व मराठा से प्रकाशित करने लगे.

वर्ष 1890 से 1897 तक इनके कार्यों की ख्याति देशभर में फ़ैल गई, वकालत करने वाले तिलक अब छात्रों के मार्गदर्शन व समाज सुधार के कार्यों में लग गये. इन्होने बाल विवाह रोकने तथा विधवा विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए ज्न्जाग्र्ण के कार्यक्रम भी चलाये.

वर्ष 1906 में तिलक को रेंड मामले में ब्रिटिश सरकार ने 6 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई. तिलक ने जेल की कालकोठरी में गीता रहस्य नामक पुस्तक की रचना की, इससे इनकी धर्म के प्रति समझ व विद्वता का परिचय मिलता हैं. तिलक ने हिन्दू समाज को जोड़ने के लिए उत्सवो का सहारा लिया, इन्होने गणेश व् शिवाजी इन उत्सवों की शुरुआत की, 1 अगस्त 1920 खराब स्वास्थ्य के चलते भारत का यह अमूल्य रत्न परलोक को सिधार गया. तिलक जयंती 2019 के अवसर पर ऐसे राष्ट्र भक्त स्वतंत्रता सेनानी को हम भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

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