Essay On Tourism In Hindi Language | पर्यटन पर निबंध

Essay On Tourism In Hindi Language पर्यटन पर निबंध: देशाटन अथवा पर्यटन किसी भी देश की प्रगति के लिए आवश्यक क्षेत्र हैं. Essay On Tourism में हम जानेगे कि भारत में पर्यटन का स्तर  स्थिति देशाटन के लाभ हानियाँ प्रमुख दर्शनीय स्थल आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे. पर्यटन के महत्व पर निबंध में कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए यहाँ निबंध बता रहे हैं.

Essay On Tourism In Hindi Language पर्यटन पर निबंध

Essay On Tourism In Hindi Language पर्यटन पर निबंध

मानव प्रवृत्ति और पर्यटन– मानव मन कौतुहल एवं जिज्ञासा नामक वृतियों से आक्रान्त रहता हैं. इन वृतियों के कारण वह नवीन वस्तुओं को देखने, समझने, नवीन स्थलों के प्रति आकृष्ट होने एवं नवीन स्थानों की सैर करने के लिए सचेष्ट रहता हैं. इस प्रकार नवीन स्थानों तथा विभिन्न भू भागों में भ्रमण करना ही पर्यटन कहा जाता हैं. पर्यटन करने से मनुष्य को भिन्न भिन्न भौगोलिक परिवेशों को देखने को सुअवसर प्राप्त होता हैं. और उनके ज्ञान की वृद्धि होती हैं.

पर्यटन की व्यवस्था-पर्यटन मानव की स्वच्छंद एवं उन्मुक्त जीवन पद्धति का एक अंश हैं. इसकी व्यवस्था प्रत्येक व्यक्ति की रूचि एवं देश विशेष के आधार पर हो सकती हैं. वर्तमान युग में पर्यटन की व्यवस्था का काफी प्रसार हो गया हैं. और सारे विश्व के देशों का भ्रमण आसानी से किया जा सकता हैं.

फिर भी प्रत्येक यात्री के लिए यह आवश्यक हैं कि वह जिस देश की यात्रा पर जा रहा हो, वहां की रीती नीति, भाषा, खान पान तथा शिष्टाचार आदि का उसे ज्ञान हो. उसे वहां के दर्शनीय स्थानों, ऐतिहासिक स्मारकों का भी ज्ञान होना चाहिए. इसके लिए उसे उस स्थान का मानचित्र एवं वहां की परिचयात्मक पुस्तिका अपने पास रखनी चाहिए.

यात्रा के लिए कुछ आवश्यक सामान साथ में ले जाना चाहिए. धन की व्यवस्था भी पूर्णरूप से होनी चाहिए. इस तरह की आवश्यक व्यवस्था हो जाने पर यदि कोई साथी या परिचित सहयात्री मिल जाए तो उसकी भी व्यवस्था करनी चाहिए. सहयात्री मिल जाने पर बहुत सी सहायता मिल जाती हैं एवं मार्ग की परेशानियों का सामना किया जा सकता हैं.

पर्यटन से लाभ– मनुष्य को पर्यटन से अनेक लाभ होते हैं. इससे मनुष्य के ज्ञान का विस्तार होता हैं. विद्यार्थी जिन धार्मिक अथवा ऐतिहासिक स्थानों का वर्णन पुस्तकों में ही पढ़ पाते हैं. उन स्थानों को प्रत्यक्ष रूप से देखने पर ज्ञान और अधिक बढ़ जाता हैं. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर हड़प्पा और सारनाथ के भग्नावशेष अजन्ता और एलोरा की गुफाएं आगरा का ताज महल, दिल्ली का लाल किला, जयपुर का हवा महल एवं जंतर मन्तर आदि का साक्षात ज्ञान पर्यटन से ही किया जा सकता हैं.

विभिन्न भागों के रीती रिवाज खान पान सामाजिक परम्परा सभ्यता एवं प्राकृतिक वातावरण आदि समस्त बातों का ज्ञान पर्यटन से ही हो सकता हैं. पर्यटन से मनोरंजन भी होता हैं. तो नयें लोगों से परिचय भी बढ़ता हैं. इससे अनुभव परिपक्व होता हैं. इस तरह पर्यटन काफी लाभकारी रहता हैं.

उपसंहार– इस नश्वर संसार में आकर मनुष्य ने यदि भिन्न भिन्न भागों को नहीं देखा, प्रकृति के सौन्दर्य का नजदीकी से अवलोकन नहीं किया, तो उसका अमूल्य जीवन वास्तव में व्यर्थ हैं. पर्यटन से ऐसे कई नवीन मित्र बन जाते हैं. जो जीवन भर सहायता सहयोग करते रहेगे. अतः हमे चाहिए कि हम अपनी आर्थिक शक्ति तथा पारिवारिक स्थिति के अनुसार पर्यटन करें, अपना लोकानुभव निरंतर बढाते रहे. जीवन की सफलता के लिए पर्यटन परमावश्यक हैं.

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शिक्षा के प्रसार ने लोगों में विश्व के अलग अलग हिस्सों में जाकर वहां की जानकारी एकत्र करने की प्रबल इच्छा पैदा की. नयें अनुभव एवं ज्ञान का तो कारण हैं ही साथ ही हवाई परिवहन में प्रगति एवं पर्यटक सुविधाओं में विकास ने भी सीमाओं से बाहर निकलकर विचरण करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया हैं.

विशेष रूप से दूरस्थ एव पिछड़े क्षेत्रों में आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन के तंत्र के रूप में पर्यटन के महत्व को विश्व भर में पहचान मिली हैं. सकल राजस्व के साथ साथ विदेशी मुद्रा आय के मामले में यह सम्पूर्ण विश्व में एक वृहत सेवा उद्योग हैं.

पर्यटन के कई लाभ हैं. पर्यटन से न सिर्फ मनोरंजन होता हैं बल्कि यह शिक्षा एवं अनुभव प्राप्त करने का भी एक अच्छा साधन है. इसलिए स्कूल कॉलेजों में हर वर्ष छात्रों को पर्यटन के लिए किसी न किसी स्थान पर ले जाया जाता हैं. पर्यटन से व्यक्ति में नवजीवन का संचार होता हैं.

इसलिए लोग वर्ष में एक बार पर्यटन के लिए अवश्य समय निकालते हैं. जिन्दगी की इस भागदौड़ में पर्यटन का महत्व भी बढ़ गया हैं. प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यस्ततम जीवन में से समय निकालकर किसी न किसी स्थान पर घूमने के लिए जाते रहना चाहिए. इससे उस व्यक्ति के जीवन का वातावरण में भी बदलाव आता हैं.

ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटन की स्थिति में इसका महत्व और भी बढ़ जाता हैं. इससे ऐतिहासिक घटनाओं को अनुभव करने का आभास होता हैं, जिन बातों का अनुभव हम ताजमहल और कुतुबमीनार को देखकर कर सकते हैं. उसे किसी भी किताब के माध्यम से बताया नहीं जा सकता.

पर्वत, पठारों, झीलों, नदियों की तस्वीरों या पाठ्यसामग्रियों से हमें इसके वास्तविक स्वरूप का ज्ञान नहीं हो सकता. नदी के पानी को छूकर देखने, पहाड़ों की सैर करने झीलों में नौका विहार का आनन्द लेने के बाद इनके बारे में जो अनुभव होता हैं, वह विभिन्न प्रकार की किताबों से भी प्राप्त नहीं हो सकता.

आधुनिक समय में पर्यटन का एक और लाभ यह हैं कि यह रोजगार का अच्छा साधन बन चुका हैं. भारत में भी यह एक बड़े सेवा उद्योग का रूप ले चुका हैं. इसका योगदान देश के सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में 6.23 प्रतिशत हैं एवं कुल रोजगार में 8.78 प्रतिशत हैं. भारत में हर वर्ष 50 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं तथा 50 लाख से अधिक घरेलू पर्यटक भी पर्यटन के लिए आते हैं.

पर्यटन के दृष्टिकोण से पहाड़ी क्षेत्र समुद्री तट एवं जंगल काफी महत्वपूर्ण एवं आनन्ददायक होते हैं. समुद्री तट की सैर एवं सूर्य स्नान का अपना अलग ही आनन्द हैं. जंगल के विविध प्राणियों को देखने का रोमांच ही अलग होता हैं. गर्मी के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों की सैर का आनन्द दुगुना हो जाता हैं.

भारत में प्रायः हर राज्य पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. आंकड़े बताते हैं कि आगरा का ताजमहल देखने प्रतिवर्ष लाखों देशी विदेशी पर्यटक आते हैं.

लोगों के पर्यटन के प्रति रुझान के कारण ही पर्यटन मंत्रालय ने भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2002 ई में अतुल्य भारत इनक्रेडिबल इंडिया की शुरुआत की थी. इसके अंतर्गत अतुल्य भारत सम्बन्धी विज्ञापन जन संचार के माध्यमों में प्रकाशित एवं प्रसारित किया जाता हैं.

इसमें भारतीय पर्यटन की विशेषताओं का उल्लेख किया जाता हैं. विश्वभर में इस प्रचार अभियान ने भारत को एक ऐसे पर्यटन स्थल के रूप में दर्शाया है जिसमें कलाप्रेमियों, संस्कृति प्रेमियों, फिल्म प्रेमियों और रोमांच की तलाश में निकले पर्यटकों की खासी दिलचस्पी हुई.

दुनियाभर के पर्यटकों के समक्ष भारत को एक उत्कृष्ट पर्यटक स्थल के रूप में पेश करने वाले इस अतुल्य भारत विज्ञापन अभियान को ब्रिटेन द्वारा सर्वाधिक सृजनात्मक मीडिया अभियान के रूप में सम्मानित किया गया.

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने पुरानी हवेलियों, किलों, दुर्गों के अलावा 1950 से पूर्व निर्मित आवासीय भवनों में चल रहे होटलों के लिए हेरिटेज होटल नाम का नया वर्ग बनाया हैं. इसके अलावा भारत सरकार ने 2002 में नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति घोषित की हैं, जिसमें देश को इस क्षेत्र में एक ग्लोबल ब्रांड बनाने की बात कही गई थी.

बहरहाल भारत मनमोहक दृश्यों, ऐतिहासिक महत्व के स्थानों तथा शानदार शहरों, सुनहरें तटों, धुंध वाले पर्वतों, रंग बिरंगे लोगों, सम्रद्ध संस्कृति और त्योहारों का देश हैं. यह विदेशी यात्रियों के लिए लोकप्रिय गन्तव्य के रूप में अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी पहचान बना रहा हैं.

भारत की यात्रा पर्यटकों के लिए असाधारण होती है, क्योंकि आश्चर्यों से भरे इस देश में दक्षिण के सुंदर समृद्ध तट उत्तर में प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष, विशाल पर्वत, लम्बी घाटियाँ, हरे भरे मैदान एवं उष्णकटिबंधीय वर्षावन जैसे दिलकश नजारे लोगों का मन मोहते हैं.

इसलिए कहा जाता हैं कि यदि आप विश्वभ्रमण कर चुके हैं, तो आपने अब तक केवल आधी दुनियां ही देखी है, और यदि आपने भारतीय उप महाद्वीप का भ्रमण कर लिया हैं. तो आपने पूरी दुनियां देख ली हैं. अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और परम्परागत आध्यात्मिकता के कारण भारत प्राचीन काल से ही विश्वभर के उत्साही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा हैं.

पर्यटन को एक उद्योग का दर्जा दिए जाने के बाद भारत में इस क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई हैं. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में भी भारत की साख बढ़ी हैं. इस तरह पर्यटन के दृष्टिकोण से भारत वास्तव में दुनिया में अतुल्य हैं. आने वाले कुछ वर्षों में भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में निसंदेह और वृद्धि होगी.

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