रेल दुर्घटना पर निबंध | Essay on Train Accident in Hindi

रेल दुर्घटना पर निबंध | Essay on Train Accident in Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम रेल दुर्घटनाओं पर लेकर आए हैं. स्कूल के स्टूडेंट्स सरल भाषा में निबंध, भाषण, अनुच्छेद बता रहे हैं. दुर्घटना कितनी भयावह होती है फिर यदि वह 100 किमी प्रति घंटा गति से दौड़ती रेलगाड़ियों की दुर्घटना हो तो कितनी भयावह हो सकता है, कितने दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इस निबंध में आज हम जानेगे.

Essay on Train Accident in Hindi

Essay on Train Accident in Hindi

स्थल मार्गों पर यातायात व माल ढुलाई के विकल्प के रूप में रेल इस सदी के सबसे अधिक उपयोगी साधन के रूप में उभरा हैं. लम्बी दूरी व अधिक मात्रा में सामान व यात्रियों के परिवहन हेतु इससे सस्ता साधन और कोई नहीं हैं. परन्तु रेल मार्गों पर बढ़ते दवाब ने दुर्घटनाओं की सम्भावनाओं को भी बढ़ा दिया हैं.

अकेले भारत में प्रतिवर्ष लगभग पन्द्रह हजार लोग रेल दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. रेल दुर्घटनाओं के लिए तकनीकी खराबी व रेल संचालन से जुड़े लोगों की लापरवाही ही अधिकतर मामलों में जिम्मेदार होती हैं. आजकल गलत शंटिंग, आतंक वादी व तोड़ फोड़ की कार्यवाही भी दुर्घटना का एक मुख्य कारण बनती जा रही हैं.

रेलवे फाटक पर सदैव ध्यान से क्रोसिंग करें. कभी भी फाटक के नीचे से न निकले. रेल में ज्वलनशील सामग्री लेकर न चले. रेल गाड़ी में दरवाजे पर खड़े न रहें. चलती ट्रेन से चढ़ने उतरने का प्रयास न करें. रेलगाड़ी में बीड़ी सिगरेट न पीए. आपातकालीन जंजीर आवश्यकता होने पर ही खींचे.

अक्सर लोग लम्बी यात्राओं के लिए रेल से सफर करना ही पसंद करते हैं. रेल एक सस्ता एवं विश्वसनीय परिवहन साधन तो है मगर कुछ लोगों की गलती अथवा शरारती तत्वों की कार्यवाही के चलते रेल दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं. तेज गति से पटरी पर भागती गाड़ी का पटरी से उतर जाना, राह में मलबा आ जाना, सामने आ रही गाड़ी से टकरा जाना, क्रोसिंग पर फंसे किसी वाहन या भीड़ से टकराना या किसी तकनीकी खराबी से ट्रेन में आग लग जाने से बड़े रेल हादसे हो जाते हैं.

इन हादसों में सैकड़ों की संख्या में लोगों की जाने चली जाती हैं. रेल दुर्घटना के शिकार लोग न केवल द्रदांत मृत्यु प्राप्त करते है बल्कि जो लोग घायल होते है वे बड़ी शारीरिक क्षति, किसी अंग का कट जाना आदि को जीवन भर भुगतते हैं. दशहरे के मौके पर अमृतसर शहर में रेल दुर्घटना की यादें सभी के जेहन में ताज़ी होगी. जब पूरा देश सिहर उठा था इस रेल दुर्घटना में सैकड़ों लोग मारे गये, जो दशहरा के रावण दहन के नजारे को देखते हुए पटरी पर आ गये थे.

यह दुर्घटना ट्रेन चालक की गलती से मानी गई थी, यह बुरा संयोग ही था कि ड्राईवर जब गाड़ी को गोलाई से लेकर आगे बढ़ रहा था तो अकस्मात लोगों के हुजूम को वह पहले से नहीं देख पाया और यह दुर्घटना घटित हो गई. यदि स्थानीय प्रशासन दूरदर्शी सोच रखते तथा रेलवे लाइन के पास रावण दहन का उत्सव की अनुमति नहीं देते तो सैकड़ों जानों को बचाया जा सकता था. हमें इस तरह की दुर्घटनाओं से सीख लेनी चाहिए ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो.

अधिकतर रेल दुर्घटनाओं के पीछे का कारण मानवीय गलती ही होती हैं. भारतीय रेल विश्व का सबसे बड़ा परिवहन तन्त्र हैं इसके पास पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बल एवं अन्य रखरखाव कर्मचारी होने के उपरान्त भी कई बार दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं.

हमारे देश का रेल तन्त्र विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में गिना जाता हैं. एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में चलने वाली रेल गाड़ियों में हर रोज सवा करोड़ लोग यात्रा करते है, इससे रेलवे के आम जीवन में महत्व को भली भांति समझा जा सकता हैं. वही रेल परिवहन की दुर्घटनाओं का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला हैं. हमारे देश में प्रत्येक वर्ष लगभग 250 से 300 छोटी बड़े रेल हादसे होते हैं.

रेलवे सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही के कारण अथवा ट्रेन चालक की नींद या थकान के कारण भी छोटी सी गलती लोगों के जीवन को खत्म करने वाली साबित होती हैं. भविष्य में भारत में रेल परिवहन के क्षेत्र में अपार सम्भावनाएं है. रेलवे बोर्ड को चाहिए कि वह कम से कम मानव जनित त्रुटियों को कम से कम करे जिससे रेल दुर्घटनाओं को रोका जा सके और सफर करने वाला प्रत्येक यात्री सुरक्षा के भाव महसूस कर सके.

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