essay on uttar pradesh in hindi उत्तर प्रदेश पर निबंध

essay on uttar pradesh in hindi उत्तर प्रदेश पर निबंध: नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत हैं आज के निबंध में हम भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे. इस निबंध भाषण में उत्तरप्रदेश यूपी की राजधानी, इतिहास, पर्यटन केंद्र आदि के बारे में संक्षिप्त में जानेगे.

essay on uttar pradesh in hindi

essay on uttar pradesh in hindi

गंगा यमुना दोआब– इसे प्राचीन काल में अंतवेदी कहा जाता था. भारत की संस्कृति एक लम्बे समय के लिए गंगा यमुना के क्षेत्र में फलती फूलती रही, कई ऐतिहासिक स्थल हस्तिनापुर, मथुरा, कन्नौज, कौशांबी, प्रयाग चन्द्रवंशी शासकों के साम्राज्य का विस्तार यहाँ के ब्रह्मवर्त जो पवित्र और आदर्श प्रदेश माना गया हैं. धार्मिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का महत्वपूर्ण राज्य हैं.

देश का महत्वपूर्ण प्रदेश– प्राचीनकाल काल के कई राजनैतिक एवं व्यापारिक केंद्र उत्तर प्रदेश में थे. जो देश के कला एवं संस्कृति के मूल केंद्र माने गये. गंगा एवं सरयू के बीच पंचाल, अयोध्या, काशी, वाराणसी, रुहेलखण्ड, लखनऊ, अयोध्या आदि मुख्य ऐतिहासिक स्थल हैं जिनका इतिहास सदियों वर्ष प्राचीन हैं.

सरयू नदी के आसपास का क्षेत्र- यह क्षेत्र मुख्य रूप से ब्राह्मण धर्म के विकास की जननी के रूप में विकसित हुआ. इसमें बहराइच, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर और देवरिया, नेपाल के तराई के भाग में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी वन में हुआ था.

हमारा राज्य उत्तर प्रदेश– देश के उत्तरी भाग में स्थित उत्तरप्रदेश जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से चौथा सबसे राज्य भी हैं. 24 जनवरी 1950 को स्थापित उत्तरप्रदेश को ब्रिटिश शासन में यूनाईटेड प्रोविंस के नाम से जाना जाता था. इसकी आबादी 20 करोड़, राजधानी लखनऊ तथा उच्च न्यायालय प्रयागराज में हैं. प्रशासन के लिहाज से राज्य को 75 जिलों एवं 18 मंडलों में विभक्त किया गया हैं. हिंदी यहाँ की राज्यभाषा हैं.

यमुना नदी का दक्षिण– राज्य में गंगा तथा यमुना दो बड़ी नदियाँ बहती हैं. यमुना के किनारे पर ही दुनियां का सातवाँ अजूबा कहे जाने वाला ताजमहल स्थित हैं. बुंदेलखंड का झाँसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा और मिर्जापुर इसके दक्षिण में स्थित हैं. विन्ध्य पर्वत श्रेणी भारत के इतिहास के गुप्त काल और चन्देल काल में स्थापत्य कला का प्रमुख केंद्र रहा हैं. इसके मन्दिर एवं ऐतिहासिक अवशेष समृद्ध परम्परा की महानता को दिखाते हैं. मिरजापुर, बांदा, मानिकपुर की ऐतिहासिक गुफाएँ और उसमें बने पाषाण चित्र ताम्र युग के चित्र उस समय के शासकों के कला प्रेम को दर्शाते हैं.

उत्तर प्रदेश के इतिहास में गुप्तकाल को स्वर्णकाल माना गया हैं. इस काल के दौरान प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक, कला संस्कृति तथा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई. संगीत तथा कृषि के क्षेत्र में भी राज्य अग्रणी रहा. यूपी की धरा पर श्रीराम, कृष्ण, बुद्ध जैसे महापुरुषों की जन्मस्थली रही हैं. वर्तमान में प्रभु श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या में रामायण संग्रहालय तथा सर्किट का निर्माण करवाया जा रहा हैं, भविष्य में यह संग्रहालय ऐतिहासिक शोधों के लिए मददगार साबित होगा.

भारत को पांच महान प्रधानमंत्री इस प्रदेश ने दिए हैं. कई महान देशभक्तो की जन्म स्थली यह प्रदेश रहा हैं जिनमें लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, नेहरु, रफी अहमद, अटल बिहारी वाजपेयी, चरणसिंह, मदन मोहन मालवीय, लाल बहादुर शास्त्री तथा इंदिरा गाँधी की जन्म भूमि तथा कर्मभूमि यह प्रदेश रहा हैं.

उत्तर प्रदेश भारत के समृद्ध ट्यूरिज्म डेस्टिनेशन राज्य में गिना जाता हैं. यहाँ कई ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल है इन मुख्य पर्यटन स्थलों में ताजमहल, सारनाथ, बिठूर, गंगा यमुना सरस्वती का त्रिवेणी संगम, कौशाम्बी, हस्तिनापुर, मेरठ, सीतापुर, प्रयागराज तथा अयोध्या प्रमुख हैं.

राज्य ने कई बड़े संस्कृत के विद्वान्, मातृभाषा हिंदी के कवि लेखक तथा दार्शनिक दिए हैं. जिन्होंने दुनियाभर में तिरंगे का मान सम्मान बढ़ाया हैं. इन महान विभूतियों में प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, महावीर प्रसाद द्वेदी, रामचन्द्र शुक्ल सरीखे सैकड़ों महान कवियों विद्वानों ने जन्म लिया.

हमारे देश की कल्पना हमारे उत्तर प्रदेश के बिना नहीं की जा सकती हैं. हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति के महान ग्रंथ वेद, उपनिषद, दर्शन, पुराण, आयुर्वेद और ज्योतिष की रचना तथा विभिन्न तपस्वियों की कर्मस्थली यह प्रदेश रहा हैं. बनारस अर्थात काशी हिन्दू धर्म की आस्था का मूल केंद्र रहा हैं. बनारस की साड़ियाँ देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं.

वृन्दावन– पूज्य योगेश्वर श्रीकृष्ण की लीलाओं की पावन भूमि, पूर्वी, उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी कला संस्कृति का केंद्र रहा है तथा सभी के दिलों में विराजमान कृष्ण जी की जन्म भूमि का दर्शन करने तथा गौवर्धन परिक्रमा के लिए हर साल करोड़ों भक्त मथुरा आते हैं.

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