दिल्ली की सैर पर निबंध – Essay on Visit to Delhi in Hindi

Essay on Visit to Delhi in Hindi : नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत करता हूँ आज हम दिल्ली की सैर, भ्रमण, यात्रा पर हिंदी निबंध बता रहे हैं. दिल्ली की ट्रिप जर्नी में दिल्ली के इतिहास व महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करेगे, भारत की राजधानी दिल्ली पर निबंध पढ़े.

दिल्ली की सैर पर निबंध – Essay on Visit to Delhi in Hindi

दिल्ली की सैर पर निबंध - Essay on Visit to Delhi in Hindi

Short Essay On Indian Capital New Delhi Visit Essay In Hindi Language: मेरी दिल्ली की सैर बहुत ही यादगार रही. मैं दादाजी के साथ दिल्ली गया था. उन्होंने मुझे बताया कि पांडवों ने दिल्ली को इंद्रप्रस्थ का नाम दिया गया था पृथ्वीराज चौहान दिल्ली के एक गौरवशाली राजा रहे हैं दिल्ली को हिंदुस्तान का दिल भी कहते हैं.

इसके सौन्दर्य और वैभव की कहानी चारों ओर बने सुंदर भवनों और रमणीय स्थलों को देखकर पता चल जाती हैं. सबसे पहले हमने लाल किला देखा. लाल पत्थरों से बने इस किले को शाहजहाँ ने बनवाया था. इसमें दीवान ए आम, दीवान ए खास, सावन भादों और संग्रहालय देखने योग्य हैं. इसके निकट ही जामा मस्जिद हैं. हुमायूं का मकबरा, हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह, कुतुबमीनार सब कुछ हमने देखा. दादाजी ने बताया कि कुतुबमीनार को कुतुबमीनार को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया था, इसके निकट ही लौह स्तम्भ हैं. इसमें आज तक जंग नहीं लगा हैं.

फिर हम जन्तर मन्तर गये. जन्तर मन्तर भारतीय नक्षत्र विज्ञान का अद्भुत स्मारक हैं. फिर हमने दिल्ली का पुराना किला देखा. पुराना किला दिल्ली के सबसे प्राचीन अवशेषों में से हैं. कहते है इसे पांडवों ने बनवाया था. पुराने किले के पास ही प्रगति मैदान हैं. दादाजी ने बताया कि इसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ आयोजित होती हैं. यहाँ विश्व पुस्तक मेला भी लगता हैं.

फिर हमने इण्डिया गेट देखा, जिसे प्रथम विश्व युद्ध में 90 हजार से अधिक शहीद भारतीय सिपाहियों की याद में बनवाया गया था. यह 42 मीटर ऊँचा हैं. यहाँ अनजान शहीदों की स्मृति में हमेशा अमर जवान ज्योति जलती रहती हैं. इसके अतिरिक्त हमने बिरला मन्दिर और लोटस टेम्पल भी देखा. जिसे बहाई धर्म के मानने वालों ने बनवाया हैं. उसके बाद हमने कनाट प्लेस की चमक दमक भी देखी. यहाँ का गोलाकार बाजार भी देखा, जो मुझे सबसे अच्छा लगा.

इसके अलावा हमने करोल बाग़, सदर बाजार और चाँदनी चौक भी देखा. चाँदनी चौक में दही भल्ले भी खाए जहाँ काफी भीड़भाड़ थी. दूर से हमने संसद भवन और उच्चतम न्यायालय भी देखा. हालांकि जनसंख्या वृद्धि ने दिल्ली का रंग रूप बिगाड़ दिया है, इसके बावजूद दिल्ली देश की धडकन हैं. प्रत्येक देशवासी यहाँ आने का सपना देखता हैं क्यों न देखे दिल्ली है ही खूबसूरत.

दिल्ली की सैर करके मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा था. फिर हम रात होने तक अपने घर वापिस चलने के लिए बस में बैठ गये दिल्ली की यादें अपने दिल में बसाए हुए.

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