महिला शिक्षा पर निबंध | Essay On Women Education

Essay On Women Education: भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आदर का भाव प्राचीन काल से ही रहा है| शिक्षा की भूमिका स्त्रियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण रही है| आजादी के बाद से,विशेष रूप से पिछले दो -ढाई दशको से केंद्र सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्धारा चलाए जा रहे सतत साक्षरता अभीयांन तथा 6 से 14 वर्ष सभी बालक -बालिकाओं (importance of girl education )को प्राथमिक शिक्षा दिलाने की अनिवार्यता ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. साथ ही प्रोढ़ शिक्षा कार्यक्रम में भी इसमे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं.

महिला शिक्षा पर निबंध / MAHILA SHIKSHA PAR NIBANDH

(Essay On Women Education)

यदि हम देखे तो पायेगे कि भारत के अतीत में विशेष रूप से वैदिक काल उत्तर वैदिक काल में

स्त्रियों को पुरुषो के समान ही शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार प्राप्त था.

गार्गी, मैत्रेयी, लोपमुद्रा आदि कतिपय विदुषी नारियां स्त्री शिक्षा के सर्वोतम उदहारण हैं,

जिनका उल्लेख प्राचीनतम साक्ष्यो में मिलता हैं.

इसी क्रम में बौधकाल में भी स्त्रियों को संघ में प्रवेश लेने व शिक्षा प्राप्ति का अधिकार था.

कालान्तर में अनेक विदेशी आक्रंताओ के आने से स्त्री सुरक्षा का प्रश्न स्त्री शिक्षा की

तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया.

तथा स्त्रियों पर बहुत से सामाजिक बंधन बढ़ने लगे.

परिणाम स्वरूप समाज में स्त्रियाँ हर क्षेत्र में पिछड़ गईं तथा समाज पुरुष प्रधान हो गया

जिससे शिक्षा की द्रष्टि से स्त्रियों और पुरुषो में विषमता फ़ैल गईं.

पर्दा प्रथा, सती प्रथा, दास प्रथा आदि कुरीतियों ने स्त्रियों की स्थति में गिरावट लाने का ही काम किया.

आधुनिक काल में भारत में आए सामाजिक नवजागरण के साथ ही स्त्रियों की शिक्षा व्यवस्था का नया सूत्रपात हुआ.

तथा राजा राममोहन राय, स्वामी द्यान्न्त सरस्वती जैसे समाज सुधारको की प्रेरणा से तथा साथ ही कुछ मशीनरियो द्वारा बालिका शिक्षा के लिए कुछ विद्यालय स्थापित किये.

1904 में श्रीमती एनीबेसेंट ने बनारस में केन्द्रीय हिन्दू बालिका विद्यालय की स्थापना की.

आजादी के बाद भारतीय सविधान में सभी जाति धर्म सम्प्रदाय के स्त्री-पुरुषो को समान रूप से शिक्षा प्रदान करने का अधिकार सभी नागरिको को दिया गया.तथा स्त्री शिक्षा के प्रचार के लिए राष्ट्रिय महिला शिक्षा समिति राष्ट्रिय महिला शिक्षा परिषद हंसा मेहता समिति आदि का गठन कर स्त्री शिक्षा के क्षेत्र महत्वपूर्ण कार्य हुआ.

आज ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रो में समान रूप से बालिका शिक्षा का प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से बढ़ रहा हैं.

सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रो जैसे चिकित्सा, अभियांत्रिकी, तकनिकी, विज्ञान, खेल, प्रबंध, भूगर्भ, विज्ञान, अन्तरिक्ष विज्ञान, राजनीति तथा समाज सेवा के क्षेत्रो में अनेक शिक्षित महिलाओं ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए,

राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया हैं. कहते हैं, एक पुरुष के शिक्षित होने केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता हैं.

जबकि एक महिला के शिक्षित होने पर पूरा परिवार शिक्षित होता हैं.

हमारी वर्तमान भारत सरकार ने भी बालिका शिक्षा को लेकर कई उपक्रम चलाए हैं

तथा अनेक शिक्षण संस्थान स्त्रियों के लिए विशेष रूप से स्थापित किये गये हैं.

आज शिक्षा के हर क्षेत्र में स्त्रिया पुरुषो से आगे निकल रही हैं.

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