नारी/महिला सुरक्षा पर निबंध | Essay On Women’s Safety In Hindi

Essay On Women’s Safety वर्तमान में भारत में नारी शिक्षा का काफी प्रचार हुआ है. नारियां डॉक्टर, शिक्षक, अधिकारी उद्यमी आदि अनेक क्षेत्रों में कार्यरत है. राजनितिक और समाज सेवा में भी नारी की पर्याप्त सहभागिता है. तथा अनेक क्षेत्रों में स्त्रियों को रोजगार में सरक्षण मिल रहा है. इतना सब कुछ होने पर भी वर्तमान में नारियाँ असुरक्षित है, उनका उत्पीड़न शोषण हो रहा है. तथा दुराचारी लोगों के अमानवीय आचरण से नारियों का जीवन खतरे में पड़ गया है.

नारी/महिला सुरक्षा पर निबंध | Essay On Women’s Safety In Hindi

नारी समाज का शोषण और उत्पीड़न-: समाज में कुछ असभ्य लोग नारियों के साथ दुर्व्यवहार करते है. तथा उनके साथ जोर जबरदस्ती करते है. सरेआम नारियों के पर्स छिनना, गले की चैन झपटना, युवतियों से छेड़खानी करना, गलत नियत से जान-पहचान कर उनका यौन शोषण करना आदि अनेक कुकृत्य अब आम बात हो गई है.

अब तो नाबालिक लड़कियों और स्कुल कॉलेज जाने वाली यवतियो का अपहरण कर उनका सामूहिक बलात्कार करना, साक्ष्य मिटाने के लिए उन्हें जान से मार डालना या मुह बंद रखने के लिए डराना-धमकाना, दुराचार का प्रस्ताव न मानने पर तेज़ाब डालकर हमला करना इत्यादि अपराधी क्रूर प्रवृतियाँ उतरोतर बढ़ती जा रही है.

आए दिन ऐसे पाशविक कृत्यों की घटनाएं देखने सुनने को मिल रही है. इस तरह के शोषण उत्पीडन से नारी समाज में असुरक्षा की भयानक समस्या उभर कर सामने आ रही है.

यौनाचार उत्पीड़न की भयानकता

दिसम्बर 2012 में दिल्ली में एक युवती के साथ पांच युवकों ने दुराचार किया, उनके साथ पशुओ के समान हिंसक व्यवहार किया. वह युवती निभर्या बनकर यथाशक्ति उनका विरोध करती रही, मरणासन्न अवस्था में उनका उपचार भी किया गया. परन्तु तमाम उपायों के बावजूद उनकी जान बचाई न जा सकी.

इस घटना से आक्रोशित जनमानस ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया. इसके परिणामस्वरूप भारत सरकार ने फरवरी 2013 में निर्भया फौजदारी कानून एक्ट में बलात्कार और यौन शोषण को लेकर कठोर कानून बनाया. इस कानून को विभिन्न धाराओं में महिलाओं पर एसिड से हमला करना, यौन उत्पीडन और दुर्व्यवहार तथा बलात्कार को जधन्य अपराध घोषित कर कठोर कारावास और मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है.

निर्भया नाम से बजट में धनराशि आवंटित कर शासन ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है.

नारी सुरक्षा की महती आवश्यकता (Onerous requirement of female security)

निर्भया कानून बन जाने से महिलाओं या युवतियों के साथ यौनाचार के दोषियों को मृत्यु दंड दिया जा रहा है. फिर भी कुछ क्षेत्रों में अबोध नाबालिक लड़कियों के अपहरण, बलात्कार और उनकी हत्या के मामले सामने आ रहे है. एसिड हमले आज भी जारी है. तथा इलेक्ट्रोनिक उपकरणों के जरिये आज भी उन्हें ब्लैकमेल या बदनाम किया जाना कम नही हुआ है. इस कारण सबसे अधिक असुरक्षा नाबालिक अबोध लड़कियों को लेकर बढ़ रही है.

अतः ऐसे दुराचारी लोगों को कठोर से कठोर दंड दिया जाना जरुरी है. नारी सुरक्षा की महती आवश्यकता को सामजिक द्रष्टिकोण में सुधार लाना नितांत अपेक्षित है.

उपसंहार

प्रशासन स्तर पर बालिकाओं की सुरक्षा तथा महिलाओं के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है. ‘निर्भया फंड’ से बलात्कार पीड़ित शोषित युवतियों की मदद की जा रही है.  वर्तमान में इस जधन्य अपराध से समाज को मुक्त करने तथा नारियों में असुरक्षा का भाव दूर करने की आवश्यकता है. अतः शासन एवं जनता के सहयोग से नारी समाज को उत्पीड़न से बचाया जा सकता है.

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