Father Nibandh in Hindi | फादर्स डे पर निबंध

Father Nibandh in Hindi | फादर्स डे पर निबंध

जी मैंने सुना आज फादर्स डे है.. ठीक अट्ठारह साल की उम्र रही होगी जब आगरा बीटेक के चक्कर में जाना पड़ा था ..तब तक हमारा कोई वैलेंटाइन डे नहीं होता था .. फादर्स डे नहीं होता था ..जो दिन पापा से थुराये बिना निकल जाता था वो ही फादर्स डे मान लिया जाता था ..

मैंने कभी पापा से मार नहीं खायी लेकिन बड़े भाई साहब ने सुबह शाम हफ्ते में पांच दिन और सुबह दोपहर शाम शनिवार रविवार खाया है (पापा कि छुट्टी तब दो दिन हुआ करती थी ) ..अनवरत रूप से ..भैया बेहद अच्छे लतखउक थे और पापा को उनको देने के लिए प्रचुर मात्र में ये विटामिन उपलब्ध था. अच्छे से अच्छे मूड में भी पिता को कैसे गुस्सा दिलवाया जाता है और किस चतुराई से उनको लतिया देने के लिए प्रेरित करना है.Father's Day In Hindi

सब भईया को आता था ..भईया की लतखोरी के किस्से नदेसर के घरों में में अलग अलग तरीके से सुनाया जाता होगा ..हमारे होश सम्भाल लेने के बाद भईया का लात खाना बंद हो चुका था और पापा को एक अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति हुई थी कि लड़के को ज्यादा थूरते रहने से लड़का थेथर हो जाता है और हाथ से निकल जाता है ..इसका एक बड़ा फायदा ये हुआ कि मैं मार खाने से बचा रहा .. मेरी गलतियां भईया के मुकाबले बहुत छोटी होती थी ..

जहाँ मैं किसी का कांच तोड़ देता था वहीँ भईया कांच निकल के बेच के कुछ घटिया सा खाने का आइटम खरीद के मोहल्ले में सभी लड़कों को खिला दिया करते थे ..अब मेरे मामले में कांच मालिक की शिकायत आती थी जबकि भईया में मामले में पूरे मोहल्ले की ..जिस जज ने मर्डर की सजा ७ साल कैद दी हुई हो वो झापड़ मरने पे क्या सजा देता ..मैं बच जाता था ..

पापा के ऑफिस से लौटने पर मम्मी के पास एक लिस्ट होती थी जिसमे भईया के गुनाह हुआ करते थे और भईया का फेसिअल एक्सप्रेशन एक पेशी के लिए खड़े मुजरिम के उलट एक सुप्रीम कोर्ट के जज जैसा हुआ करता था ..(जैसा मम्मी बताती हैं ) ..पापा के सवाल पर उनके जवाब आग में घी का काम करते थे ..भईया के चेहरे पर भगवान् बुद्ध जैसी चमक होती थी ..उनको गलत कुछ नहीं लगता था ..

आज भी नहीं लगता है लेकिन अब पापा उनको लतिया नहीं सकते और इसकी अब जरूरत भी नहीं रह गयी है ..आज जब भईय्या और हम अपने बच्चों को कभी आप कभी तुम करके अच्छे से रखते हैं ..बहुत सारी शालीनता से भरी कोशिशें करते हैं तो अहसास होता है कि वो गलत वक़्त नहीं था.

आज बच्चे फेसबुक पर उन पिताओं को फादर्स डे विश कर रहे हैं जो फेसबुक पर हैं भी नहीं ..हम कहाँ बढ़ रहे हैं ..सर्वसन्तुष्टि कि ओर या आत्मसंतुष्टि की ओर ..कुछ ऐसे भी कोहिनूर बेटे होते हैं जो बाप को आश्रम में डाल देते हैं ..शायद फेसबुक पर वो भी स्टेटस यही डाल रहे होंगे –मिसिंग यू पापा ..हज़रत, पापा रोज़ पापा ही हैं और मम्मी रोज़ मम्मी ही हैं ..उनको अच्छे से रखिये ..वैसे ही जैसे आप अपने बेटे की तरफ से उम्मीद रखते हैं ..मुझमे कोई ज्ञानी होने का घमंड नहीं है लेकिन प्यार तो सबको अच्छा ही लगता है न यार.

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