बाढ़ की समस्या इसके कारण प्रभावित क्षेत्र और प्रबंधन | Flood Causes Effects Types Facts Prevention In Hindi

बाढ़ की समस्या इसके कारण प्रभावित क्षेत्र और प्रबंधन | Flood Causes Effects Types Facts Prevention In Hindi : जब भारी अथवा निरंतर वर्षा के कारण नदियों का जल अपने तटबंधो को तोड़कर बहुत बड़े क्षेत्र में फ़ैल जाता है. तो उसे बाढ़ कहते है. वर्षा ऋतू में वर्षा का यह आसमान वितरण भारत में प्राकृतिक आपदाओं का कारण बनती है. प्रत्येक वर्ष भारत के किसी न किसी क्षेत्र में बाढ़ आती है. भारत में 4 करोड़ हैक्टर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र माना जाता है.

Flood Causes Effects Types Facts Prevention In Hindi

अपने विशाल आकार एवं मानसूनी जलवायु के कारण ये दोनों प्राकृतिक आपदाएं भारत को प्रभावित करती है. भारतीय जनमानस अपने स्वभाव व सहज संतोषी वृति के कारण ईश्वरीय प्रकोप मानकर सदियों से इन आपदाओं को सहता आ रहा है.

बाढ़ के कारण (flood causes in hindi)

भारी वर्षा के चलते नदी जलग्रहण क्षेत्र में प्रवाहित जल को पर्याप्त प्रवाह मार्ग उपलब्ध नही होने से अतिरिक्त वर्षा जल चारों ओर फैलने लगता है. वर्षा ऋतू में पानी के साथ बहकर आये अवसाद नदी मार्ग को संकड़ा व उथला बना देते है. जिसके कारण पानी किनारों के बाहर फैलकर बाढ़ की शक्ल दे देता है.

धरातल पर वनों का व चरागाहों के निरंतर विनाश भी भारत में बाढ़ की समस्या के कारण है. इनके अतिरिक्त नदी प्रवाह मार्गों पर आबादी की बसावट, अविवेकपूर्ण तरीकों से आवागमन मार्गों का निर्माण, परम्परागत जल ग्रहण स्रोतों को नष्ट करना तथा प्राकृतिक रूप से जल प्रवाह स्वरूप की उपेक्षा कर निर्माण कार्य करना बाढ़ के कारण बनते है.

भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र (Flood affected areas in India)

भारत के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र वर्षा के वितरण से निर्धारित है. भारत में बाढ़ों से होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक क्षति उतरी एवं उतरी पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में होती है. भारत के उत्तर पश्चिम में बहने वाली नदियाँ सतलज, व्यास, रावी, चिनाब व झेलम से बाढ़ की भयंकरता कम होती है.

जबकि पूर्व में बहने वाली गंगा, यमुना, गोमती, घाघरा व गंडक आदि नदियों से अपेक्षाकृत अधिक बाढ़ आती है. कोसी व दामोदर नदियों में बाढ़े विनाशकारी होती है, इसलिए कोसी नदी को बिहार का शोक व दामोदर नदी को बंगाल का शोक कहा जाता है.

देश के उत्तर पूर्वी भाग में ब्रह्मपुत्र नदी घाटी है. अतः नदी घाटी में भी प्रति वर्ष बाढ़ आती है. इस क्षेत्र में वर्षा भी 250 सेमी से अधिक होती है.

बाढ़ पर निबंध – Essay on Flood in Hindi

भारत में बाढ़ से प्रतिवर्ष 2000 से अधिक जाने जाती है. 80 लाख हैक्टर क्षेत्र से बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होता है. 35 लाख हैक्टर क्षेत्र में फसल नष्ट हो जाती है. 3 करोड़ हैक्टेयर क्षेत्र में जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है. आर्थिक रूप से लगभग एक करोड़ रुपयें की हानि प्रतिवर्ष होती है.

बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पशुधन पर पड़ता है. लगभग 12 लाख पशुधन को हानि उठानी पडती है. 12 लाख से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो जाते है. भारत में बाढ़ से होने वाली 60 प्रतिशत से अधिक क्षति केवल उत्तरप्रदेश व बिहार में होती है. इसके बाद पश्चिम बंगाल, आसाम, उड़ीसा को नुकसान उठाना पड़ता है.

बाढ़ की समस्या जीवन को अस्त व्यस्त कर देती है. मार्ग अवरुद्ध हो जाते है तथा फसलें नष्ट हो जाती है. पानी के स्रोत खराब व दूषित हो जाते है. संचार के साधन बिगड़ जाते प्रभावित क्षेत्र में गंदगी बढ़ने से महामारी फैलने का भय रहता है. बाँधो, तालाबों तथा नहरों को क्षति होती है.

बाढ़ प्रबंधन (Flood Facts Prevention management in Hindi)

  • सरकारी व सामाजिक स्तर (Government and social status)– देश में बाढ़ की विकरालता के मध्यनजर सबसे पहले इसकी रोकथाम की आवश्यकता के प्रयास प्रारम्भ हुए. इस दिशा में सन 1854 में राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण योजना प्रारम्भ की गई. इस योजना में नदी तटबंधों का निर्माण व जल प्रवाह नालिकाओं का निर्माण करने के निर्णय लिए गये. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बहुउद्देशीय योजनाओं के बाँध बनाने का कार्य भी किया जाता है. इस सन्दर्भ में महानदी, दामोदर, सतलज, व्यास, चम्बल, नर्मदा नदियों पर बाँध बनाए गये है.बाढ़ों पर नियंत्रण के लिए नदी उद्गम क्षेत्रों एवं जल ग्रहण क्षेत्रों में वनों का लगाया जाना अति आवश्यक है. इससे मृदा अपरदन रुकने से नदी पेटे में अवसाद के अभाव में कमी आएगी. अतः जरुरी है कि वृक्षारोपण के साथ साथ वनों का अविवेकपूर्ण दोहन रोका जायें. यातायात मार्गों के निर्माण के समय यह ध्यान रखा जाए कि इससे जल के प्राकृतिक प्रवाह में अवरोध उत्पन्न हो.

    वर्षा से पहले नदी की जल ग्रहण क्षमता को बढ़ाया जाए, अवसाद को निकालकर तटबंधों पर डलवाया जाए इससे दोहरा लाभ होगा, एक तो नदी की जलग्रहण क्षमता बढ़ेगी व तटबंध ऊँचे व मजबूत होंगे.
    बाढ़ की समस्या से होने वाली हानि से बचने के लिए 1854 इसवी में बाढ़ पूर्वानुमान संगठन की स्थापना की गई. वर्तमान में प्रत्येक जिला मुख्यालय पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है. मौसम एवं सिंचाई विभाग वर्षा ऋतू में उस समय होने वाली वर्षा की मात्रा एवं जल प्रवाह की राशि को सतर्कता से अवलोकन करते है. संचार के साधनों से सदैव जनता को स्थति से अवगत कराया जाता है.

     

  • व्यक्तिगत स्तर पर (At the personal level)– व्यक्तियों को चाहिए कि वे वर्षा ऋतू में रेडियों व दूरदर्शन से लगातार समाचार सुनते रहे. यदि वे बाढ़ संभावित क्षेत्र में रह रहे है तो सरकारी आदेशों व सलाह की अनिवार्यता पालना करे. बिजली उपकरणों को बंद कर दे. घर में कीमती सामान, कपड़े व भोजन सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाए, ताकि जब तक बाढ़ का पानी उतरे नही तब तक स्वयं का व अन्य लोगों का ध्यान रखा जा सके. वाहनों व पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुचाए जाए, मकान में यदि जल खतरे के निशान से उपर जाने लगे तो सुरक्षित स्थान पर अतिशीघ्र पहुचने का प्रयास करे.
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