गांधी जयंती पर भाषण और कविता | Gandhi Jayanti Speech In Hindi

गांधी जयंती पर भाषण और कविता Gandhi Jayanti Speech In Hindi: 2 अक्टूबर 2019 को गाँधी जयंती है. हमारे राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी का जन्म इस दिन 1869 को हुआ था. Gandhi Jayanti Poem Speech In Hindi में स्टूडेंट्स के लिए गांधी जयंती 2019 पर भाषण और मोहनदास करमचन्द गांधीजी पर कविता प्रस्तुत कर रहे हैं. आशा करते हैं गांधीजी जयंती स्पीच 2019 आपकों पसंद आएगा. mk Gandhi Par Speech In Hindi Language For School Kids & Students Read In class 1,2,3,4,5,6,7,8,910 Find Here Best short Gandhi jayanti speech 2019 With Short Information about Nation Father Mk Gandhi.

गांधी जयंती पर भाषण और कविता | Gandhi Jayanti Speech In Hindi

गांधी जयंती पर भाषण और कविता Gandhi Jayanti Speech In Hindi

Gandhi Jayanti Speech In Hindi गांधी जयंती 2 अक्टूबर को हर साल मनाई जाती है. इस साल 2019 में महात्मा गांधी जयंती के दिन सभी विद्यालयों और कोलेज में राष्ट्रपिता गांधीजी के जीवन उनके विचारों पर कविता भाषण प्रस्तुत किये जाते है. यहाँ आपकों गांधी जयंती के अवसर पर बोलने के लिए Gandhi Jayanti Par Bhashan Speech उपलब्ध करवाया जा रहा है.

Speech On Gandhi Jayanti 2019 In Hindi

सम्माननीय मंच, प्रधानाचार्य महोदय जी समस्त विद्वान् गुरुजनों और मेरे साथ पढ़ने वाले भाइयों और बहिनों. जैसा कि आप सभी जानते है आज हम हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाने बाबत यहाँ एकत्रित हुए है. गांधी जयंती के इस पावन अवसर में मुझे बोलने का अवसर प्रदान करने के लिए मेरे कक्षाध्यापक जी का विशेष आभार धन्यवाद. दोस्तों आज 2 अक्टूबर का दिन है आज ही के दिन 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले में एक ऐसे महापुरुष का जन्म हुआ था, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के पथ पर आजीवन चलते हुए विश्व के सबसे ताकतवर सम्राज्यी शक्ति ब्रिटेन को परास्त करने में सफलता अर्जित की थी.

गुजराती ब्राह्मण परिवार में जन्मे महात्मा गांधी जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था. इनके पिताजी का नाम करमचन्द और माताजी का नाम पुतलीबाई था. मात्र 13 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया था. इन्होने आरम्भिक शिक्षा अपने जिले के ही एक विध्यालय से ही प्राप्त की थी. आगे की पढ़ाई के लिए इन्हें इंग्लैंड भेज दिया गया, जहाँ से बैरिस्टर (वकालत) की पढ़ाई पर भारत लौटे. m गांधी ने कुछ समय तक अहमदाबाद में वकालत की, एक केस के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा था.

गांधीजी की अफ्रीका यात्रा उनके जीवन का अहम मोड़ था. साउथ अफ्रीका में मूल निवासियों तथा प्रवासी भारतीयों के साथ वहां की गोरी सरकार के अत्याचार का सामना इन्हें भी करना पड़ा. एक बार रेल यात्रा के दौरान वे गोरो लोगों के डिब्बे में बैठ गये थे. रंगभेद की निति के चलते अंग्रेज लोगों ने गांधीजी को डिब्बे से बाहर कर दिया. इस घटना से आहत होकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में ही रंगभेद के खिलाफ सत्याग्रह शुरू कर दिया. कुछ हद तक वहां समानता की स्थति बनने के बाद गांधी 1915 में भारत लौट आए.

जब गांधीजी भारत लौटे तो कुछ किसान नेताओं ने उनका ध्यान स्थानीय नील व्यापरियों तथा जमीदारों द्वारा कृषकों के शोषण की घटनाओं के बारे में अवगत करवाया. किसानों तथा मजदूरों के शोषण के खिलाफ इन्होने खेड़ा और चम्पारण नामक क्षेत्रों में किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया. जब अंग्रेज सरकार को इस प्रकार के सत्याग्रह विरोध की जानकारी मिली तो उन्होंने गांधीजी को जेल में बंद करने का आदेश दे दिया. मगर किसानों और मजदूरों को मिली एक आशा की किरण को वो किसी भी सूरत में समाप्त नही होने देना चाहते थे.

गांधी जयंती पर सरल भाषण इन हिंदी 2019 महात्मा गांधी स्पीच

अतः उन्होंने अपने विरोध आंदोलन को सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में जारी रखा तथा गांधीजी को रिहा करने को लेकर आंदोलन का अल्टीमेटम जारी कर दिया. स्थति को समझते हुए अंग्रेज सरकार ने आन्दोलन की सभी मांगो को मानते हुए महात्मा गांधी को जेल से रिहा कर दिया. इस तरह भारत में पहले राजनितिक संघर्ष में मिली सफलता के बाद सत्य और अहिंसा के दम पर इन्होने भारत को आजाद करवाने का संकल्प लिया.

इसके बाद 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के जलियावाला बाग नामक स्थान पर अंग्रेज सरकार द्वारा हजारों निर्दोष नागरिकों को मारने के विरोध में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया. इस आंदोलन में सभी भारतीय अधिकारी, शिक्षक और अंग्रेजी सेवा में काम करने वाले सभी भारतीयों ने अपने काम का त्याग कर गांधीजी के समर्थन में सड़को पर आए गये थे. इसके बाद दांडी नमक सत्याग्रह, स्वदेशी आंदोलन, हरिजन आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व भी गांधीजी ने किया.

भारत को स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को मिली, इसमे महात्मा गांधी का सबसे बड़ा योगदान था. देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी ने अपने जीवन के कई साल जेल की काल कोठरियों में बिताएं तब जाकर भारत को आजादी मिली. वकालत व्यवसाय में करियर शुरू करने वाले गांधी इतने लोकप्रिय हुए कि लोगों ने इन्हें महात्मा और बापू “राष्ट्रपिता” जैसे उपनामों से पुकारना शुरू किया.

महात्मा गांधी एक सच्चे देशभक्त और महान स्वतंत्रता सेनानी थे ही साथ ही अच्छे समाज सुधारक भी थे. जीवन पर्यन्त इन्होने समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने के लिए साहसिक कदम उठाए. स्वच्छता को ईश्वरीय गुण मानने वाले गांधीजी स्वय गन्दी बस्तियों में अपने हाथ से झाड़ू निकालकर भारत को स्वच्छ बनाने की दिशा में कार्य करने वाले पहले इंसान थे.

समाज में व्यापत रूढ़ीवाद तथा छुआछूत तथा निम्न जाति के लोगों के साथ उच्च जातियों द्वारा अत्याचार व् भेदभाव पूर्ण व्यवहार को समाप्त करने के लिए हरिजन आंदोलन और दलित उद्धार के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए.

गाँधी जयंती एक ऐसा अवसर है जिसमे हमे एक ऐसें महान महापुरुष को याद कर उनकी राह पर चलने का संकल्प करना चाहिए. जिन्होंने सम्पन्न स्वतंत्र और एक स्वच्छ भारत की कल्पना की थी जिनमे बिना किसी उंच नीच के भेद किये सभी नागरिकों को समान रूप से मौलिक सुविधा उपलब्ध करवाए जाए. गाँधी जयंती के अवसर पर अंत में बस इतना ही कहना चाहुगा. कि अमूमन माना जाता है कि अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता.

मगर गांधीजी ने अकेले की एक ऐसें मिशन की शुरुआत जिनका पूरा होना लगभग अस्मभव था. मगर किसी नेक कार्य को करने का मजबूत इरादे भर के पीछे चलने वालों की संख्या लाखों करोड़ो तक चली गई. इसी प्रकार आज समाज और देश में व्याप्त समस्याओं से निजात पाने के लिए हमे एक और महात्मा गांधी चाहिए जो हमारे बिच में से ही कोई है.

गांधी जयंती पर कविता (Poem on Gandhi Jayanti In Hindi)

गांधी के विरोधियों पुजारियों का मेल है
राजनीति सांप और नेवले का खेल है
काँग्रेसियों का देखो आज तुम कमाल जी
धीरे-धीरे पूरी काँग्रेस है हलाल जी
कोई पश्चाताप नहीं ना कोई मलाल जी
क्या हुआ जो जूतियों में बँट रही है दाल जी
ये नेहरु और गोखले की जान थीं
काँग्रेस इंदिरा जी की आन-बान-शान थीं
काँग्रेस गांधी जी तिलक का स्वाभिमान थीं
कल स्वतंत्रता – सेनानी होने का प्रमाण थीं
CONGRESS अरुणा आसिफ अली का ईमान थीं
काँग्रेस भारती की पूजा का सामान थीं
काँग्रेस भिन्नता में एकता की तान थीं
पूरे देश को जो बांध सके वो कमान थीं
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस काँग्रेसी थे
टंडन जी, नरेंदर देव घोष काँग्रेसी थे
लाल बहादुर की अंतिम साँस काँग्रेस थीं
लोहिया जी की भी कभी प्यास काँग्रेस थीं
लाला लाजपत की चोट वाली काँग्रेस थीं
हर गली – गली में वोट वाली काँग्रेस थीं
जे.पी. की भी जली थीं जवानी काँग्रेस में
आजादी की पली थीं कहानी काँग्रेस में
काँग्रेस पार्टी जो शुरू से महान थीं
जो स्वतंत्र – काल में अधिक समय प्रधान थीं
काँग्रेसी टोपी कल जो शीश पे थीं शेरों के
आज पैरों में है ऐरे – गैरे नत्थू खैरों के

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