Geography Of India In Hindi: भारत का भौतिक स्वरूप

Geography Of India In Hindi: भारतीय प्राचीन ग्रंथ विष्णु पुराण के अनुसार ”पृथ्वी के उस भू भाग को जो उत्तर में हिमाद्रि, हिमवान व हेमकूट पर्वत तन्त्र से लगाकर दक्षिण में सेतुबंध (हिंदमहासागर) तक फैला हुआ है. जिसमें भारतीय सन्तति बसती है, को भारत कहते है. भारत का भौतिक स्वरूप (Geography Of India In Hindi) के बारे में यह श्लोक देखियें.

उतरं यतः समुद्रस्य, हिमाद्रिश्चैव दक्षिणम |
वर्ष तत भारत नाम, भारती यत्र संतति ||Geography Of India In Hindi

भारत का भूगोल (Geography Of India In Hindi)

हमारे देश का नाम भारत कैसे पड़ा- प्राचीनकाल में आर्यों की भूमि के कारण यह आर्यावर्त के नाम से भी जाना जाता था. ईरानियों ने सिंधु नदी के तटीय निवासियों को हिन्दू एवं इस भू भाग का हिन्दुस्थान दिया. रोम निवासियों ने सिधु नदी को इंडस तथा यूनानियों ने इन्डोस व देश को इण्डिया कहा. यही देश विश्व में आज भारत के नाम से विख्यात है.

भारत की स्थति- भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में 8°4′ से 37°6′ उतरी अक्षांस तक तथा 68°7′ से 97°25′ पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है. कर्क रेखा अर्थात 23°30′ उतरी अक्षांश भारत के लगभग मध्य से गुजरती है. यह रेखा भारत को दो भागों में विभक्त करती है. भारत का प्रामाणिक समय 82°30′ पूर्वी देशांतर रेखा से माना जाता है. यह रेखा इलाहबाद के पास से गुजरती है.

भारत की विशालता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है. कि इसका विस्तार पूर्व पश्चिम में 2933 किलोमीटर और उतर दक्षिण में 3214 किलोमीटर है. इसकी स्थलीय सीमा 15200 किलोमीटर तथा समुद्रीय सीमा 7516.6 किलोमीटर (लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीपों) सहित है.

हमारे भारत देश का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश भारत की स्थल सीमा से जुड़े हुए पड़ौसी देश है. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है. भारत की जनसंख्या 121.02 करोड़ (जनगणना 2011 के अनुसार) है. भारत का क्षेत्रफल सम्पूर्ण विश्व के क्षेत्रफल का 2.42 प्रतिशत है. इसकी जनसंख्या सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत है.

भारत के भौतिक प्रदेश, (Geography Of India)

हमारे भारत देश की विशालता के कारण यहाँ अनेक भौगोलिक विषमता का मिलना स्वाभाविक है. भारत को उपमहाद्वीप की संज्ञा दी जाती है. देश के सम्पूर्ण क्षेत्रफल का 10.5 प्रतिशत पर्वतीय भाग, 18.6 प्रतिशत पहाड़ियाँ, 27.7 प्रतिशत पठारी एवं 43 प्रतिशत भाग मैदानी है.

इसके उतर में हिमालय पर्वत जैसी श्रंखलाएं है. जिसमें अनेकों बर्फीली चोटियाँ सुंदर घाटियाँ व महाखंड है. भौतिक विभिन्नताओं की दृष्टि से भारत को पांच भागों में बाटा जाता है.

Geographical Regions Of India (भारत के भौगोलिक क्षेत्र)

  1. उत्तरी पर्वतीय प्रदेश (Northern mountainous region)
  2. उत्तर का विशाल मैदान (Northern Giant ground
  3. थार का मरुस्थल (Desert of Thar)
  4. प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau)
  5. समुद्र तटीय मैदान व द्वीप समूह (Seaside Plains and Islands)

उत्तरी पर्वतीय प्रदेश (Northern mountainous region)

हिमालय पर्वत भारत की उत्तरी सीमा पर पश्चिम से पूर्व की ओर वृहत् चाप के रूप में 5 लाख वर्ग किलोमीटर लम्बाई में तथा 250 से 400 किलोमीटर की चौड़ाई में विस्तृत है. यह विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है. इसका क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग किमी है.

यह श्रेणी पामीर पर्वत प्रणाली का भाग है. पश्चिम में पठार गाँठ से निकलकर यह अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है. भू-गर्भशास्त्रियों के अनुसार आज जहाँ हिमालय पर्वत श्रेणियों का विस्तार है. वहां पहले टेथिस सागर का विस्तार था. इसमें अवसाद के जमाव के पश्चात कालान्तर में भूगर्भीय हलचलों से जमाव अवसाद की परतों में मोड़ पड़ जाने से इस सागर की तली ऊँची उठ गई है.

फलस्वरूप ही यह नविन मोड़दार पर्वत श्रेणियाँ बनी है यथा-

  • वृहत् हिमालय- प्रमुख चौटियाँ- गौरी शंकर (माउंट एवरेस्ट), कंचनजंघा तथा नंदादेवी
  • लघु हिमालय- प्रमुख श्रेणियाँ- पीर पंजाल व धौलाधर
  • उप हिमालय- जम्मू, गिरी, मिसमी, डाफला पहाड़ियाँ आदि.

वृहद् हिमालय (himalayas mountains) –

यह हिमालय की सबसे ऊँची पर्वतमाला है, जिसे मुख्य हिमालय, हिमाद्री आदि नामों से भी जाना जाता है. यह श्रेणी उत्तर पश्चिम में सिन्धु नदी के मोड़ से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र के मोड़ तक के चाप की आकृति में लगभग 2500 किलोमीटर की लम्बाई में विस्तृत है. इसकी औसत उंचाई लगभग 6000 मीटर तथा चौड़ाई 100 से 200 किलोमीटर है.

यहाँ की पर्वत चौटियाँ 7000 मीटर से भी अधिक ऊँची है. इस श्रेणी में विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट है. इसकी उंचाई 8848 मीटर है. इस पर चढ़ने वाला प्रथम भारतीय महिला बछेंद्रीपाल थी. भारत में हिमालय की सबसे ऊँची चोटी कंचनजंघा (8585 मीटर) है.

इस श्रेणी में जोजिला, शिपकी, माना, नीति ला आदि दर्रे है. इसी प्रदेश से हमारे देश की प्रसिद्ध नदियाँ गंगा व यमुना निकलती है.

लघु हिमालय (Small himalaya)

यह पर्वत श्रंखला वृहत् हिमालय के दक्षिण में स्थित है. जो मध्य हिमालय या हिमाचल हिमालय के नाम से जानी जाती है. इसकी चौड़ाई 80 से 100 किलोमीटर तक है. इसकी औसत उंचाई 3000 मीटर है. किन्तु अधिकतम उंचाई 5 हजार मीटर तक पाई जाती है.

पीर पंजाल व धौलाधर इसकी प्रमुख श्रेणियाँ है. बनिहाल प्रमुख दर्रा है. यहाँ शीत ऋतु में तीन चार महीने तक बर्फ रहती है. . किन्तु ग्रीष्म ऋतू सुहावनी व स्वास्थ्यवर्धक होती है. यहाँ कई पर्वतीय पर्यटक स्थल जैसे शिमला, मंसूरी, नैनीताल, दार्जलिंग, रानीखेत आदि स्थित है.

इस श्रेणी के उच्च ढालों पर कोणधारी वन तथा निम्न ढालों पर घास के क्षेत्र पाएं जाते है. जिन्हें काश्मीर में मर्ग (जैसे गुलमर्ग, सोनमर्ग आदि) कहा जाता है.

उप हिमालय (Sub himalaya)

हिमालय की यह सबसे दक्षिणी श्रेणी है. इसे बाह्य हिमालय या शिवालिक श्रेणी के नाम से जाना जाता है. हिमालय की सभी श्रेणियों में यह नवीनतम रचना है. यह श्रेणी पोटवार बेसिन से प्रारम्भ होकर पूर्व की ओर कोसी नदी तक विस्तृत है. यह श्रेणी 10 से 50 किलोमीटर तक चौड़ी है.

इसकी औसत उंचाई 600 से 1500 मीटर है. जम्मू में इसे जम्मू पहाड़ियाँ तथा अरुणाचल में गिरी मिशमी, अबोर, डाफला पहाड़ियों के नाम से जानते है.यह सम्पूर्ण भाग वनाच्छादित है. मध्यवर्ती भाग में हिमालय के शिवालिक के बिच नदियों की मिट्टी व बालू के निर्मित कुछ ऊँचे घाटी मैदान भी मिलते है. जिन्हें पूर्व में द्वार जैसे हरिद्वार तथा पश्चिम में दून जैसे देहरादून  कहते है.

उत्तर का विशाल मैदान (NORTH INDIAN PLAIN)

यह मैदान हिमालय पर्वत तथा प्रायद्वीपीय पठार के मध्य स्थित है. प्राचीनकाल से यह भू भाग गंगा सिन्धु मैदान के नाम से जाना जाता था. किन्तु विभाजन के कारण सिन्धु व उसकी सहायक नदियाँ, झेलम, चिनाव व रावी के मैदानी भाग पकिस्तान में चले गये है. अतः अब भारतीय क्षेत्र सतलज, गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान कहते है.

जो इनके व इनकी सहायक नदियों द्वारा बिछाई गई गई तलछट मिट्टी से बना है. इस धनुषाकार मैदान की लम्बाई लगभग 2400 किलोमीटर व चौड़ाई 150 से 480 किलोमीटर तक है. इस मैदान का क्षेत्रफल 7 लाख वर्ग किलोमीटर तक है. दोआब दो नदियों के बिच के स्थान को कहा जाता है.

इस मैदान में पंजाब हरियाणा, उतराखंड, उत्तरप्रदेश, उत्तरी राजस्थान, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड आदि का भाग शामिल है.

उत्तर के मैदान की जानकारी व महत्व (Information and importance of North Plains)

काँप (नदी की बारीक) मिट्टी से बनने के कारण यह अत्यधिक उपजाऊ मैदान है. अनेकों नदियों का जाल बिछा होने से पीने व सिंचाई के लिए प्रचुर जल उपलब्ध है. नदियों का उपयोग सस्तें यातायात साधन के रूप में किया गया है.

समतल होने से सड़क व रेल मार्गों का सघन जाल हमारे देश के अधिकांश, औद्योगिक, व्यापारिक व धार्मिक नगर यही है. दिल्ली, कानपुर, हरिद्वार, मथुरा, वाराणसी, अमृतसर, लखनऊ, आगरा, पटना, कोलकाता आदि.

भौगोलिक वर्गीकरण (Geographical classification)

  • भाबर प्रदेश- शिवालिक के पर्वतपदीय क्षेत्र में जो सतलज नदी से तीस्ता नदी तक 8 से 16 किलोमीटर तक चौड़ी पट्टी का विस्तार है. पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर मैदानी भाग में प्रवेश करते ही ढाल कम होने से नदियाँ भारी चट्टानों के टुकड़े इस पर्वत पद क्षेत्र में जमा कर देती हो. उस क्षेत्र में अधिकांश नदियों का भूमिगत प्रवाह होता है.
  • तराई प्रदेश- तराई प्रदेश भाबर के दक्षिण में मैदान का वह भाग है, जहाँ भाबर प्रदेश का भूमिगत जल प्रवाह पुनः धरातल पर प्रकट हो जाता है. ढाल की न्यूनता व अनियमित जल प्रवाह के कारण यहाँ दलदल पाए जाते है. इस प्रदेश में सघन वन, लम्बी घासें जैसे – कांस, हाथी घास आदि व गैंडे जैसे विशाल वन्य जीव मिलते है.
  • बांगर प्रदेश- प्राचीन तलछट से निर्मित उच्च मैदान बांगर कहलाते है. जहाँ नदियों के बाढ़ का जल नही पहुच पाता है. ये उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग तथा उत्तराखंड में अधिक पाए जाते है.
  • खादर प्रदेश- ये नई तलछट व कांप मिट्टी से बने हुए निचले मैदान है. जहाँ बाढ़ का पानी प्रतिवर्ष पहुच कर मिट्टी की नयी परत जमाता रहता है. ऐसे मैदानों को खादर कहते है. ये पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार व पश्चिम बंगाल में अधिक है.

थार का मरुस्थल (thar desert climate, facts, map,vegetation, animals, tourism, temperature & weather)

जलवायु परिवर्तन से निर्मित यह मरुस्थल अरावली के पश्चिम व उत्तर पश्चिम में सिन्धु के मैदान तक विस्तृत है. यह लगभग 150 से 380 मीटर तक ऊँचा, 640 किलोमीटर लम्बा व 160 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र है. यहाँ तेज हवाएं व बालुका स्तूपों एवं रेत के टीलों का निर्माण करती है.

इन टीलों के मध्य वर्षा जल भर जाने से अस्थायी झीलें बन जाती है. जिसे ढांढ या रन कहते है. यहाँ सांभर, लूणकरणसर, डीडवाना, पचपदरा आदि खारे पानी की मुख्य झीलें है. इनमें नमक तैयार किया जाता है. भूगर्भशास्त्रियों के मतानुसार यह क्षेत्र पहले उपजाऊ भाग था. यहाँ बड़ी बड़ी नदियाँ बहती थी. यहाँ पर सरस्वती नदी के अवशेष मिलना इस बात के प्रमाण है.

प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau)

भारत के विशाल मैदान के दक्षिण में विस्तृत अति प्राचीन लावा निर्मित भू-भाग है जो 7 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है. इसके तीन ओर समुद्र है और यह त्रिभुजाकार पठार का आधार उत्तर में विध्यांचल पर्वतमाला तथा दक्षिण में कुमारी अंतरीप है.

दक्षिण पूर्वी राजस्थान की उच्च भूमि से कन्याकुमारी तक इसकी अधिकतम लम्बाई 1800 किलोमीटर तथा अधिकतम चौड़ाई लगभग 1400 किलोमीटर है. इस पठार की औसत ऊँचाई समुद्रतल से 600 मीटर है. इसका विस्तार दक्षिण पूर्वी राजस्थान, गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल में आंशिक रूप से है.

प्रायद्वीपीय भारत (Peninsular Plateau) को निम्न प्रकार उप-विभाजित किया जा सकता है.

  • पश्चिमी घाट– दक्षिण के पठार का पश्चिमी किनारा पश्चिमी घाट के रूप में जाना जाता है. यह उत्तर में सहाद्री तथा दक्षिण में निलगिरी के नाम से जाना जाता है. इनका अरब सागर की ओर ढाल तीव्र गति तथा पूर्व की ओर धीमा ढाल है. लगभग 1000 मीटर औसत ऊँचाई वाले सहाद्रि का ताप्ती घाटी से कुमारी अंतरीप तक क्रमिक विस्तार है. इसमें भोर घाट, थाल घाट व पाल घाट दर्रे है. दक्षिण में यह पूर्वी घाट से मिल गये है. इसकी सबसे ऊँची छोटी (2637 मीटर) अनाई मूंदी है.
  • पूर्वी घाट- यह घाट पश्चिमी घाट की अपेक्षा कम ऊँची, तट से काफी दूर स्थित व अक्रमिक है. यह घाट पूर्वी घाट के समानांतर लगभग 800 किलोमीटर की लम्बाई में फैले है. पूर्व की ओर बहने वाली सभी नदियों ने पूर्वी घाट को काफी छिन्न विछिन्न कर दिया है. इनकी औसत ऊँचाई 600 मीटर है. 1501 मीटर पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटियाँ है.
  • दक्षिण पठार- यह अत्यंत प्राचीन दृढ भूभाग है जिसका निर्माण ज्वालामुखी उदगार से निसृत लावा से हुआ है. उपजाऊ तथा काली मिट्टी से युक्त यह पठारी भू भाग लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर में विस्तृत है. इसमें दक्षिणी पूर्वी राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश एवं कर्नाटक के भाग सम्मिलित है. इस पठार की औसत उंचाई 600 मीटर है. इस पठार की ढाल पूर्व की ओर है. इसलिए इस पठार की अधिकाँश नदिया पूर्व की ओर बहती है. इन नदियों ने इसे छोटे छोटे पठारों में विभक्त कर दिया है. जैसे छतीसगढ़, मैसूर का पठार, रायल सीमा का पठार, तेलंगाना का पठार आदि.

प्रायद्वीपीय पठार का महत्व (importance of Peninsular Plateau)-

यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज भंडार पाए जाते है. काली मिट्टी कपास के उत्पादन के लिए लाभदायक है. यहाँ सागवान, शीशम व चन्दन के बहुमूल्य मानसूनी वृक्ष मिलते है. नदियों में जल प्रपात मिलते है. जो जल विद्युत उत्पादन का आधार है. इसी भाग में पंचमढ़ी, महाबलेश्वर, उड्गममंडल (ऊंटी) आदि पर्यटन स्थल है.

समुद्र तटीय मैदान व द्वीप समूह (Seaside Plains and Islands)

दक्षिण के पठार के दोनों तरफ मैदान स्थित है. ये समुद्री तटीय मैदान दो भागों में विभक्त किये जाते है. ऐसे मैदान नदियों द्वारा या समुद्र की क्रिया से बने है.

पश्चिमी तटीय समुद्री मैदान- खम्भात की खाड़ी से प्रारम्भ होकर कुमारी अंतरीप तक फैले इस समुद्र तटीय मैदान की औसत चौड़ाई 64 किलोमीटर तथा अधिकतम ऊँचाई 180 मीटर है. व इसकी लम्बाई 1600 किलोमीटर है.

इस तटीय मैदान में तीव्रगामी छोटी नदियाँ बहती है. उत्तर में यह मैदान अधिक चौड़ा है. नर्मदा, ताप्ती, मंडवी आदि नदियाँ बहती है. इस तट के उत्तरी भाग को कोंकण तथा दक्षिणी भाग को मालाबार तट कहते है.

इसके प्रमुख बंदरगाह कांडला, मुंबई, मारमगोआ, कोचीन व मंगलौर आदि है. इस मैदान में उत्तम जलवायु मिट्टी, व्यापार की सुविधाएँ होने से सघन जनसंख्या पाई जाती है.

  • पूर्वी समुद्र तटीय मैदान- यह गंगा मुहाने से कुमारी अंतरीप तक फैला है. यह पश्चिम मैदान की अपेक्षा अधिक चौड़ा है. इसकी लम्बाई 1500 किलोमीटर तथा चौड़ाई 16 किलोमीटर से लेकर 480 किलोमीटर तक है. इस तट का उत्तरी भाग उत्तरी सरकार तथा दक्षिणी भाग कोरोमंडल तट कहलाता है. महानदी, कृष्णा, गोदावरी व कावेरी यहाँ की प्रमुख नदियाँ है. विशाखापत्तनम, चेन्नई, पारादीप व तूतीकोरन यहाँ के प्रमुख बन्दरगाह है. यहाँ चिल्का, पुलीकट व कोलेरू झीलें है.
  • द्वीप समूह- भारत के पूर्वी व पश्चिमी तटों तथा अरब सागर व बंगाल की खाड़ी में भारत क्र अनेक द्वीप है. अधिकतर द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में है. भारत के प्रमुख द्वीप समूहों के नाम यह है. अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप, पाम्बन, हेयर, पारिकुंद व श्रीहरिकोटा आदि. भारत का दक्षिणतम बिंदु ”इंदिरा पॉइंट” निकोबार द्वीप समूह में है.
  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह- यह कोलकाता से 1248 किलोमीटर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी में है. इस द्वीप समूह में लगभग 205 द्वीप है. यहाँ के किनारों पर सुन्दरी वृक्ष बहुतायत पाये जाते है. मुख्य बड़े द्वीप उत्तरी अंडमान, मध्य अंडमान, दक्षिणी अंडमान, बारातंग तथा रुथलैंड व निकोबार द्वीप अंडमान से 128 किलोमीटर दक्षिण में है. इसके उतर के द्वीप को कार निकोबार, मध्य को कामोरटा व तानकाडरी एवं दक्षिण को विशाल निकोबार कहा जाता है. इनमें अमिनी द्वीप व मिनिकोई सम्मिलित है.
  • लक्षद्वीप- अरब सागर में भारत के पश्चिमी तट के पास स्थित है. इसका शाब्दिक अर्थ एक लाख द्वीप है. यहाँ नारियल के वृक्ष बहुतायत मिलते है. यह वास्तव में मूंगे के द्वीप है.

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