घोंसला हिंदी कहानी (Ghosla Birds Story In Hindi)

घोंसला हिंदी कहानी (Ghosla Birds Story In Hindi)

बाल कहानियों के इस लेख में आज हम “घोंसला” हिंदी कहानी आपके साथ शेयर कर रहे हैं. इस शोर्ट बर्ड स्टोरी को बच्चों के लिए प्रेरणा के लिए उन्हें सुना सकते है. कक्षा १,२,३,४,५,६,७,८,९,१० के बच्चों को यह कहानी आप बता सकते हैं.घोंसला हिंदी कहानी (Ghosla Birds Story In Hindi)

hindi tales- उमा के घर के पीछे एक बबूल का पेड़ था. उमा ने अपने कमरे की खिड़की से उसे देखती रहती थी. एक दिन उसने देखा कि एक चिड़िया बार बार आ जा रही थी. वह हर बार अपनी सोंच में भरकर एक घास का तिनका लेके आती, उस वृक्ष की डाल पर उन्हें रखती और फिर वापिस चली जाती.

उमा ने ध्यान दिया तो उस डाल पर एक सुंदर घास का घौसला बन रहा था. उसे बड़ी जिज्ञासा हुई तथा अपनी माँ से पूछने लगी, माँ यह चिड़िया पेड़ पर कितना सुंदर घौसला बना रही हैं जबकि हमारे घर में तो वह ऐसा नही बनाती हैं.

माँ से बड़े मीठे स्वर में बेटी को जवाब दिया- आप जो पेड़ पर घौसला देख रही हो, वह एक चिड़िया का है जिसका नाम बया हैं. बया के घौसले बेहद प्रसिद्ध होते है तथा यह बेहद सुंदर नीड़ बनाती हैं. जब बेटी ने पूछा कि माँ यह अन्य पक्षियों की तुलना में इतना सुंदर घौसला कैसे बनाती है तो माँ ने कहा- यह अपनी पूरी सिद्धत से इस काम में लगी हैं तथा पूर्ण मेहनत और निष्ठां के साथ अपना कार्य करती हैं. इसकी मेहनत का परिणाम यह सुंदर घौसला हैं.

इतना कहने के पश्चात जब माँ रसोईघर में खाना बनाने के लिए निकल गई तो उमा को एक शरारत सूझी उसने एक लम्बा डिंडा लेकर बया के उस घौसले को पेड़ से गिरा दिया. जब वह चिड़िया एक तिनका लेकर पेड़ की तरफ उड़ी तो उसने देखा कि उसका घौसला बिसरा पड़ा है सारे तिनके बिखर गये हैं.

अपनी मेहनत को धुल में मिला देख बया को बड़ी ग्लानी हुई. थोड़े वक्त तक वह अपनी कराहती आवाज में रोती रही, फिर उन्हें लगा कि रोने से क्या फायदा है सिर पीटने और रोने से कोई फायदा नही हैं ऐसा करने से जो हो चुका हैं वह अपने आप ठीक नही होने वाला हैं. अतः उसने निश्चय किया कि वह फिर से घौसला बनाने के कार्य में पूरी सिद्धत से लग जायेगी.

उधर उमा की उदंडता भी बढती ही जा रही थी, बया जैसे ही नया घौसला बनाती वह उन्हें गिरा कर जमीन पर तिनको को बिखेर डालती. यह क्रम कई दिन तक चलता रहा, अचानक जैसे ही उमा एक दिन खिड़की से डंडा निकालकर उस घौसले को गिरा रही थी, कि उसकी माँ ने यह देख लिया और उसे समझाने लगी. उमा तुम यह क्या कर रही हो, कोई काम कर रहा हो तो उसकी मदद करनी चाहिए, इंसान होकर हमें जीव जन्तुओं को कष्ट पहुचाने की बजाय उनकी मदद करनी चाहिए.

इन सब बातों का उमा पर कोई असर नही था. जैसे ही बया कोई घौसला बनाती वह उन्हें फिर से गिराकर स्वयं को आनन्दित महसूस करती, मगर बया भी कहाँ हार मानने वाली थी. उमा की शरारतों का वह अपनी मेहनत से जवाब देती रही, जैसे ही वह घौसला गिराती वह नया तैयार कर देती थी.

माँ को लगा इस तरह उमा नही मानने वाली हैं उन्हें उपाय सुझा की किसी तरह इसे दुःख पहुचा कर उनकी गलतियों का एहसास कराया जाए.  माँ ने उमा की प्रिय गुडिया को तोड़ डाला, जब उमा ने इसे देखा तो वह बेहद खिन्न हुई और रोने लगी.

उमा की माँ ने कहा मैं तुम्हारी गुडिया को जोडकर तब तक तैयार कर दूंगी जब तक तू बया का घौसला तैयार नही कर देती, यदि तू उसके कार्य में विद्य न डालकर उनकी मदद करती तो बया अब तक अपना घौसला बना देती. ऐसा सुनते ही उसने अपने घर के बगीचे से घास फूस को इकट्ठा किया और बया का घौसला बनाने के लिए तेजी से निकल पड़ी.

उसने सोचा यह कुछ ही मिनट का काम है वह तिनकों को लेकर पेड़ की डाल पर चढ़ी और उन पर रखती गयी मगर जैसे जैसे वह तिनका रखती वह नीचे गिरती रही. काफी मेहनत के बाद भी काम बनता न देखकर वह दुखी होकर पेड़ की डाल पर ही रोने लगी. वह इसे जितना सरल काम समझ रही थी वह उतना ही कठिन निकला.

थोड़ी देर बाद उसे लगा कि उसके सिर पर कोई हाथ फेर रहा हैं. जब उमा ने नजर उठाकर देखा तो सामने उसकी माँ थी वह समझाते हुई बोली, बेटा कोई भी काम बिगाड़ना आसान है मगर उसे बनाना बहुत कठिन हैं. आप उसकी मदद करों. उसकी परेशान मत करो सताओ मत , उन्हें लगा कि उसने माँ की बात न मानकर बहुत बड़ी भूल की हैं आगे से वह अपनी माँ की हर आज्ञा का पालन करेगी.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *