गोवर्धन पूजा 2017 अन्नकूट पूजा विधि शुभ मुहूर्त और महत्व

गोवर्धन पूजा हिंदुओ का अहम पर्व है, जिन्हें दीपावली के दुसरे दिन (कार्तिक प्रतिपदा) के दिन मनाया जाता है. द्वापर युग से चली आ रही गोवर्धन पूजा का सम्बन्ध भगवान श्रीकृष्ण से माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रज के लोग वर्षा के आगमन पर उत्सव मना रहे थे, तथा इंद्र देव की पूजा कर रहे थे कृष्ण ने आकर जब उन्हें इसे मनाने का कारण पूछा तो उन्होंने इंद्र देव की मेहरबानी की फलस्वरूप वर्षा के आगमन का कारण बताया, कृष्ण ने गोपियों को समझाते हुए कहा कि ये वर्षा गौवर्धन पर्वत की वजह से हो रही है. जिसके बाद इन्द्रदेव के साथ शक्ति परिक्षण की कथा आती है.

इस साल 21 अक्टूबर 2017 को गौवर्धन पूजा (अन्नकूट पूजा) की जानी है. विष्णु के अवतार कहे जाने वाले कृष्ण जी द्वारा इस दिन इंद्र को पराजित किया था. गोवर्धन पूजा 2017 पूजा विधि, कथा, शुभ मुहूर्त और इसे मनाने के महत्व की जानकारी इस लेख में दी जा रही है.

गोवर्धन पूजा 2017 अन्नकूट पूजा विधि शुभ मुहूर्त और महत्व

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त (Govrdhan Puja Mhurt)

इस बार गोवर्धन पूजा का शुभ समय मुहूर्त सुबह = 07:22 से 9: 29 बजे तक रहेगा.
कुल अवधि = 2 घंटे 6 मिनट (126 मिनट)
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ = 19 अक्टूबर 2017 को 15:11 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त = 20 अक्टूबर 2017 को 16:07 बजे

गोवर्धन पूजा महत्व Significance of Worshipping Govrdhan

जब से श्रीकृष्ण इस लोक में अवतरित हुए है, तब से गोवर्धन पूजा यानि अन्नकूट पूजा का उत्सव मनाया जाता है. इस दिन को महाराष्ट्र में बालि प्रतिपदा या पड़वा के रूप में मनाया जाता है. यहाँ आमजन में प्रचलित एक मान्यता के अनुसार विष्णु की राजा बलि पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुजराती नव वर्ष की शुरुआत होती है. इस दिन व्यापारी लोग अपने नये हिसाब खाते बही का श्रीगणेश करते है.

उत्तर भारत तथा देश के अधिकतर हिस्से में गोवर्धन पूजा को मनाने के पीछे का मुख्य कारण भगवान् श्री कृष्ण से जुड़ा मानते है. यहाँ के लोग वर्षा होने पर इंद्रदेव की पूजा अर्चना किया करते थे. कृष्ण जी ने लोगों को समझाया कि यहाँ की वर्षा के लिए गोवर्धन पर्वत जिम्मेदार है. इसी बात को लेकर कृष्ण और इंद्र के बिच युद्ध होता है. जिसमे इंद्र ब्रज पर अतिवृष्टि करने लगते है श्याम ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गौवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लेते है, जिस कारण इंद्र का प्रभाव खत्म हो जाता है.

आखिर में कृष्ण की हठ के आगे देवराज इंद्र को हार माननी पड़ी, तथा उन्होंने गौवर्धन पर्वत को नीचे रखने की विनती की. कहा जाता है, श्री कृष्ण ने जिस दिन गौवर्धन पर्वत को जमीन पर रखा उस दिन से गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई तथा इस दिन को लोग गोवर्धन पूजा अन्नकूट पूजा के रूप में मनाने लगे.

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