गुरु भक्ति की आदर्श कहानी- Guru Bhakti Story in Hindi

Guru Purnima Story in Hindi- गुरु भक्ति की आदर्श कहानी- Guru Bhakti Story in Hindi / Guru or shishy ki kahani story.

गुरु भक्ति की आदर्श कहानी- Guru Bhakti Story in Hindi

गुरु भक्ति की आदर्श कहानी- Guru Bhakti Story in Hindi

एक वक्त की बात हैं किसी गाँव में एक बड़े तपस्वी रहा करते थे. वे अपने शिष्यों को नित्य पाठ पढ़ाते थे. उनके यहाँ गाँव के सभी शिष्यों में एक युवा होनहार बालक भी था, जिसमें गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा थी. गुरु जी अपने शिष्यों को एक मन्त्र विद्या देने की बात करते थे. जब शिष्य उनसे मंत्र पूछते तो वे कहते वक्त आने पर आप सभी को बता दूंगा. आखिर वो दिन आ ही गया. जब गुरूजी ने अपने सभी शिष्यों से कहा – आज मैं आपकों वो मन्त्र दूंगा जिसकी आपको अगले 12 माह सिद्धि करनी हैं.

गुरूजी ने सभी शिष्यों को मंत्र बता दिया, मगर उस दिन वह नवयुवक नहीं आया था. अगले दिन जब उसे इस बात का पता चला तो उसने पाया कि सभी साथी मंत्र की सिद्धि में लगे हैं वह अकेला बच गया, वह भागा भागा गुरूजी के पास गया और उन्हें सारी घटना बताई गुरूजी ने कहा – इसमें मेरी गलती नहीं हैं आप नहीं आए. अब अगले वक्त तक इंतजार करिये. वह नवयुवक ऐसे ही मानने वालों में नहीं था. सुबह शाम सोते जागते, नहाते धोते गुरु जी के पीछे लगा ही रहता और मंत्र मांगता रहा. एक दिन गुरूजी जंगल में निवृत होने के लिए निकले वह भी उनके पीछे भागा और मंत्र मांगने लगा. गुरूजी भी तंग आ गये. गुरूजी ने कहाँ सही वक्त आने पर दूंगा.

अगले दिन वह शिष्य निश्चय कर आया कि आज वह मंत्र लेकर ही लौटेगा. उस दिन जब गुरूजी निवृत होने निकले तो वह फिर बोल पड़ा – गुरूजी मंत्र दे दीजिए. गुस्से में बोले ” टेम दैखे न कटेम भाग अठै सूं ” भोली प्रवृति का नवयुवक मन ही मन प्रसन्न हुआ उसने सोचा कि यही मंत्र हैं. वह प्रसन्न मुद्रा पर इसका जाप करने बैठ गया. कुछ वक्त बाद उसी गाँव में एक लड़के की मौत हो गई अभी अभी शादी हुई, सभी दुखी हारे मन से उसे श्मशान की ओर ले जा रहे थे. तभी किसी को याद आया कि हमारे यहाँ कुछ संत हैं जो मरे व्यक्ति को जीवित कर सकते हैं. वे तुरंत उन शिष्यों के पास गये. उन्होंने मंत्र लगाया पर कोई काम नहीं आया. आखिर में उस नवयुवक ने भी ” टेम दैखे न कटेम भाग अठै सूं ” मंत्र का जाप किया तो मरा लड़का जीवित हो गया.

यह देखकर सभी शिष्य गुरूजी के पास पहुंचकर शिकायत करने लगे कि आपने हमें नकली मंत्र दिया हैं. असली मंत्र तो उसके पास है जो उस दिन नहीं आया था. गुरु ने उस नवयुवक को बुलाया और पूछा तुझे मैंने मन्त्र कब दिया- वह बोला आपने ही तो बताया था ” टेम दैखे न कटेम भाग अठै सूं ”

गुरूजी बोले वो कोई मंत्र नहीं था. यह तो तुझे भगाने के लिए कहा था तेरी अटूट श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से यह सिद्ध हो गया.

शिक्षा: गुरु के प्रति सच्ची भक्ति भवसागर पार करा देती हैं.

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