Habitat Gk Notes In Hindi आवास Synonym Meaning Place Of Habitat Types

Habitat Gk Notes In Hindi आवास Synonym Meaning Place Of Habitat Types:  प्रिय विद्यार्थियों आपका स्वागत है आज हम Habitat Gk Notes In Hindi आपके साथ शेयर कर रहे हैं. आवास सामान्य ज्ञान व पर्यावरण अध्ययन का महत्वपूर्ण अध्याय हैं. चलिए अब आवास की परिभाषा अर्थ प्रकार विशेषताएं habitat and adaptation class 6 आपके साथ शेयर कर रहे हैं.

Habitat Gk Notes In Hindi आवास Synonym Meaning Habitat

Habitat Gk Notes In Hindi आवास Synonym Meaning Place Of Habitat Types

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Habitat Gk Notes In Hindi Language

आवास/Habitat– किसी सजीव का वह परिवेश जिसमें वह रहता हैं, आवास कहलाता हैं. एक सजीव अपने भोजन, वायु, शरण स्थल व अन्य आवश्यकता हेतु आवास अर्थात रहने के स्थान पर निर्भर करता हैं.

स्थलीय आवास– स्थल जमीन पर पाए जाने वाले पौधें व जन्तुओं के आवास स्थलीय आवास कहलाता हैं. इसमें वन, घास के मैदान मरुस्थल, तटीय, पर्वतीय क्षेत्र शामिल हैं.

  • जलीय आवास- जलाशय, दलदल, झील, नदियाँ, समुद्र आदि.
  • किसी आवास के जैव घटक – सजीव (जीव, जन्तु, पादप)
  • किसी आवास के अजैव घटक – चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, मौसम आदि.

अनुकूलन (types of adaptations in animals)– हजारों वर्ष की अवधि में किसी क्षेत्र में अजैव घटकों में परिवर्तन आते हैं. तब जो भी जन्तु इन परिवर्तनों के अनुरूप ढल नहीं पाते वे मर जाते हैं. वे जीव जन्तु प्रकृति में जीवित रहते है, जो अपे परिवेश/ वातावरण के अनुरूप अनुकूलित होते हैं.

स्थलीय आवास (list of animals and their habitats)

मरुस्थल (The desert)

  • मरुस्थल का मुख्य पशु – ऊंट जिसे रेगिस्तान का जहाज कहते हैं.
  • मरुस्थल की जल वायु अत्यधिक गर्म व शुष्क हैं. यहाँ दिन अत्यधिक गर्म तथा रातें अत्यधिक ठंडी होती हैं. इन क्षेत्रों में
  • पौधे व जन्तु भूमि पर रहकर श्वसन हेतु आस पास की वायु का प्रयोग करते हैं.

ऊंट रेगिस्तान में रह सकता हैं क्योंकि उसमें रेगिस्तान में अनुकूलन हेतु कुछ विशेषताएं पाई जाती हैं.

  • ऊंट के पैर लम्बे होते हैं जिससे उसका शरीर रेत की गर्मी से दूर रहता हैं.
  • मूत्रउत्सर्जन की मात्रा बहुत कम होती हैं तथा मूत्र गाढ़ा व मल शुष्क होता हैं.
  • त्वचा मोटी होने से पसीना नहीं आता, क्योंकि शरीर से जल का हास बहुत कम होता हैं इसलिए जल के बिना भी अनेक दिनों तक जीवित रह सकता हैं.
  • ऊंट के पैर के तलुएँ चौड़े व गद्देदार होने से रेत में कम घसते है जिससे रेत पर आसानी से चल सकते हैं.
  • मरुस्थल में रहने वाले चूहें एवं सांप के ऊंट की भांति लम्बे पैर नहीं हैं. परन्तु वे दिन की तेज गर्मी से बचने हेतु भूमि के अंदर गहरे बिलों में रहते हैं. रात्री के कम ताप में वे बिलों से बाहर आ जाते हैं.

पर्वतीय आवास (Mountain Habitat)

  • ये आवास सामान्यतः बहुत ठंडे होते हैं और इनमें तेज हवा चलती हैं कही कहीं हिमपात जैसी स्थितियां बनती हैं.
  • पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले जन्तुओं की मोटी त्वचा या फर ठंड से उनका बचाव करते हैं.

उदहारण

  1. याक- शरीर को गर्म रखने हेतु इसका शरीर लम्बे बालों से ढका रहता हैं.
  2. पहाड़ी तेंदुआ- इसके शरीर पर फर होते हैं जो बर्फ में चलते समय उनकें पैरों को ठंड से बचाते हैं.
  3. पहाड़ी बकरी- इसके मजबूत खुर होते हैं जो उसे ढालदार चट्टानो पर दौड़ने के लिए अनुकूलित करते हैं.

वन व घास स्थल

  • शेर, चीता, हिरण आदि मुख्यतः वन व घास स्थलों में पाए जाते हैं.

शेर में अनुकूलन की विशेषताएं

  • उसका मटमैला हरा, भूरा रंग शिकार के दौरान घास के सूखे मैदानों में छिपाए रखता हैं तथा शिकारी को पता नहीं चलता.
  • इसके चेहरे के सामने आँखे वन में दूर तक शिकार खोजने में सहायक.

हिरण में अनुकूलन की विशेषताएं

  • तेज गति- शिकारी से दूर भागने में सहायक
  • सिर के पार्श्व में दोनों ओर स्थित आँखे- प्रत्येक दिशा में खतरा महसूस करने हेतु.
  • लम्बे कान- शिकारी की गतिविधि की जानकारी देते हैं.

जलीय आवास (Water Habitat)

  • जलाशय, दलदल, समुद्र, तालाब, झील आदि.
  • सबसे प्रमुख जलचर- मछली
  • मछली जैसे कई जलचरों का शरीर धारा रेखीय होता हैं जिससे जल के अंदर आसानी से तैर सकती हैं.
  • मछलियों का शरीर चिकने शल्क से ढका रहता हैं जिससे सुरक्षा भी मिलती हैं. व जल में सुगम गति में भी सहायक हैं.
  • मच्छली के पंख व पूंछ चपटी होती है जो उन्हें जल के अंदर दिशा परिवर्तन व संतुलन में सहायक हैं.
  • मछली के गलफड़े/क्लोम होते है जो उन्हें जल में श्वास लेने में सहायता प्रदान करते हैं.
  • स्किवड व ऑक्टोपस जैसे समुद्री जन्तुओं में शरीर सामान्यतः धारा रेखीय नहीं होता हैं, समुद्र की गहराई/तलहटी में रहकर अपनी ओर आने वाले शिकार को पकड़ते हैं. जल में चलते समय शरीर धारा रेखीय बना लेते हैं.
  • कुछ जलीय जन्तु डाल्फिन, व्हेल आदि में गिल नहीं होते है. बल्कि सिर पर स्थित नासद्वार / वात छिद्रों में श्वास लेते हैं. ये समय समय समुद्री सतह पर आकर श्वसन छिद्रों से जल बाहर निकालते हैं व श्वास द्वारा स्वच्छ वायु अंदर भरते हैं, फिर लम्बे समय तक बिना श्वास लिए रह सकते हैं.
  • मेढ़क तालाब के जल एवं स्थल दोनों पर रह सकता हैं. मेढ़क के पश्चपाद में ज्लायुक्त पादानुगतियाँ होती हैं जो उन्हें तैरने में सहायक हैं. पश्चपाद लम्बे व मजबूत होने से छलांग लगाने व शिकार पकड़ने में सहायक हैं.

ध्रुवीय क्षेत्रों के जन्तु (स्थलीय/जलीय)

  • ऐसे क्षेत्र भयंकर सर्दी वाले बर्फ से ढके होते हैं, जहाँ 6 महीने सूर्यास्त नहीं होता व 6 महीने तक सूर्योदय नहीं होता हैं. सर्दियों में -37 डिग्री सेल्सियस ताप कम हो जाता हैं.
  • ध्रुवीय भालू, पैग्विन, कस्तुरी मृग, रैनडियर, लोमड़ी, सील, व्हेल आदि.

ध्रुवीय भालू पेंग्विन की विशेषताएं

  1. सारे शरीर पर सफ़ेद बाल होते हैं जिससे बर्फ की श्वेत भूमि में स्पष्ट दिखाई नही देते हैं जिससे अपना शिकार पकड़ने में या खुद के बचाव में सहायता मिलती हैं.
  2. बालों की मोटी परत शीत से बचाव तथा त्वचा के नीचे वसा की परत होती हैं.
  3. बहुत धीमे धीमे चलते हैं ताकि शरीर का ताप आवश्यक से ज्यादा न हो, विश्राम भी पर्याप्त करते हैं.
  4. चौड़े व बड़े पंजे जिनकी सहायता से समुद्री जल में तैरते हैं. गर्मी में भौतिक क्रियाकलाप के बाद शरीर को ठंडा करते हैं.
  5. नखर (नाख़ून) मुड़े हुए व पैने होते हैं जिससे बर्फ में चलने में सहूलियत होती हैं.
  6. पैंग्विन का शरीर मछलियों की तरह धारा रेखीय होता हैं.

उष्णकटिबंधीय वर्षा वन के जन्तुओं में अनुकूलन 

वृक्षों पर आवास, लम्बी व बड़ी चौंच, मजबूत पूंछ, सुनने की संवेदनशील शक्ति, मोटी त्वचा, तीव्र दृष्टि आदि विशेषताएं होती हैं.

उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के जन्तु

  • सामान्यतः गर्म जल वायु के प्रदेश
  • भूमध्य रेखा के समीपस्थ क्षेत्र
  • ताप 10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस के मध्य
  • प्रचुर वर्षा
  • प्रमुख देश- भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, ब्राजील, कांगो, युगांडा, नाइजीरिया आदि.
  • वर्ष भर दिन रात लगभग बराबर
  • भारत में पश्चिमी घाट व असम में मुख्यतः पाए जाते हैं. दक्षिण पूर्वी एशिया, मध्य अमेरिका, मध्य अफ्रीका में भी ये जन्तु हैं.
  • प्रमुख जन्तु- बन्दर, कपि, गुरिल्ला, चीता, हाथी, तेंदुआ, छिपकली, सर्प, कीट
  • इन क्षेत्रों में जन्तुओं की जनसंख्या अधिक होने से भोजन की प्रतिस्पर्धा अधिक, अतः वृक्ष पर निर्भर
  • लाल नेत्र के मेढ़क के पैर के तलवे चिपचिपे होने के कारण वृक्ष पर चढने में सहायता
  • बंदरों की लम्बी पूंछ व हाथ पैरों की बनावट वृक्ष की शाखाओं को पकड़ने व छलांग लगाने में सहायक
  • टूकन नामक पक्षी की लम्बी व बड़ी चोंच होती हैं जिसकी सहायता से कमजोर शाखाओं के फल को पकड़ लेता हैं.

लायन टेल्ड लंगूर/ मंकी/ दाड़ी वाला एप

  • पश्चिमी घाट के वर्षा वन में पाया जाता हैं.
  • चांदी जैसी श्वेत अयाल/दाड़ी जो सिर के चारो ओर गालों व चिबुक तक रहती हैं.
  • सामान्यतः वृक्ष पर रहता हैं व वृक्ष कि छाल में रहने वाले कीट, पत्तियों, तने, पुष्प, कलियाँ, फल खाता हैं.

जीव जंतुओं के आवास (jeev jantuon ke aavas & habitat and adaptation of animals)

  • छत्ता/ Hive– मधुमक्खी, बर्र, ततैया
  • पेड़ की शाखाएं/branches– बन्दर, कोआ, चील, टिड्डे
  • घौसला / Nest– बया, चिड़िया, बुलबुल, कबूतर, कठफोड़वा
  • पेड़ के कोटर– गिलहरी
  • माद/गुफा/ Cave– शेर, भालू, चीता, भेड़िया, लोमड़ी
  • बिल/Hole – चूहा, खरगोश, दीमक, चींटी, गोयरा, सांप
  • घर /home– चूहे, छिपकली, पालतू जन्तु, मनुष्य

एकमात्र सांप जो घोसला बनाकर रहे वह किंग कोबरा हैं.

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आशा करता हूँ दोस्तों आवास क्या है अर्थ मीनिंग, परिभाषा, निबंध, स्पीच, जानकारी, आवास के प्रकार, आवास क्यों बनाते है जीव जन्तुओं के आवास की सूची में दी जानकारी आपकों पसंद आई होगी.

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