Hariyali Amavasya कब और क्यों मनाई जाती हैं क्या हैं महत्व

Hariyali Amavasya : प्रतिवर्ष श्रावण महीने की अमावस्या को देश भर के कई हिस्से जिनमे पंजाब, मध्यप्रदेश के मालवा, राजस्थान, गुजरात ,उत्तरप्रदेश और हरियाणा आदि राज्यों में नए वर्ष की हरियाली के आगमन के रूप में इस पर्व को मनाते हैं.इस दिन किसान आने वाले वर्ष में कृषि कैसी होगी इनका अनुमान लगाते हैं, शगुन करते हैं. हरियाली को समर्पित यह त्यौहार इस वर्ष 23 जुलाई 2017 रविवार को पड़ रहा हैं. इस दिन वृक्षारोपण का कार्य विशेष रूप से किया जाता हैं.

वर्षो पुरानी परम्परा के निर्वहन के रूप में हरियाली अमावस्या के दिन एक नया पौधा लगाना शुभ माना जाता हैं.

गुजरात में इन्हे हरियाली अमावस के नाम से जानी जाती हैं.

Hariyali Amavasya का महत्व

हरियाली अमावस्या के दिन सभी लोग वृक्ष पूजा करने की प्रथा के अनुसार पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा करते हैं. हमारे धार्मिक ग्रंथो में सजीव और निर्जीव जीवों से पर्वत और पेड़ पौधो में भी इश्वर का वास बताया जाता हैं. पीपल का सर्वगुणसंपन्न होने के साथ इसमे त्रिदेवों का वास भी माना जाता हैं.

ठीक इसी तरह आंवले के वृक्ष में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का वास माना जाता हैं.

अमावस्या के दिन कई शहरों में हरियाली अमावस्या के मेलों का भी आयोजन किया जाता हैं. इस कृषि उत्सव को सभी समुदायों के लोग आपस में मिलकर मनाते हैं. तथा एक दुसरे को गुड़ और धानी की प्रसाद देकर आने वाली मानसून त्रतु की शुभकामना देते हैं.

इस दिन अपने हल और कृषि यंत्रो का पूजन करने का रिवाज हैं.

इस पर्व के ठीक तीन दिन बाद हरियाली तीज का पर्व भी आता हैं.पेड़ों के महत्व को हमारे वेदों और पुराणों में अच्छी तरह से महिमामंडित किया गया हैं, आज सम्पूर्ण विश्व में पर्यावरण सरक्षण की हवा जोरों पर हैं.

ऐसे में इस प्रकार के तीज त्योहारों को मनाने से हम पर्यावरण संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं.

Hariyali Amavasya पर निबंध

हिन्दू धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना एक महत्व होता हैं.365 दिन ही कोई न कोई तीज त्यौहार चलते हैं, कई बार एक ही तिथि को दो अलग-अलग त्यौहार एक साथ पड़ते हैं. हम बात कर रहे हैं अमावस्या कि हर महीने 2 और इस तरह वर्ष में 24 अमावस्या होती हैं.इस तिथि को अपने पितरों की आत्मा को शांति के लिए हवन पूजा पाठ दान दक्षिणा देने का विशेष महत्व हैं.

अमावस्या में सावन महीने की हरियाली अमावस्या का अपना अलग ही महत्व हैं.

सावन की फूल बहार और खुशनुमे पर्यावरण का स्वागत करने के लिए हरियाली अमावस्या को एक पर्व की भांति मनाया जाता हैं. इस दिन विभिन्न स्थानों पर मेलों और पूजा पाठ का भी आयोजन किया जाता हैं.पीपल तथा आंवले के वृक्ष की इस दिन पूजा कर एक नया वृक्ष लगाने का सकल्प भी किया जाता हैं.

हरियाली अमावस्या के दिन उत्तर भारत में मथुरा और वृंदावन के खासकर बांके बिहारी मंदिर एंव द्वारकाधिश मंदिर विशेष पूजा और दर्शन के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. कई अन्य शिव मन्दिरों में भी लोग अमावस्या के दिन दर्शन और पवित्र स्नान करने जाते हैं.

Hariyali Amavasya को क्या करे

  • इस दिन स्नानादि करने के पश्तात पीपल अथवा तुलसी के वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करे.
  • भूखे और दीन लोगों को दान पुण्य के रूप में कुछ भेट दे.
  • यदि आप सर्पदोष, शनी की दशा और प्रकोप व पितृपीड़ा से परेशान हो तो हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल और पुष्प चढ़ाए.
  • अपने पर्यावरण की खातिर वर्षो से आ रही प्रथा को निभाने के लिए एक पौधा जरुर लगाए.
  • वेदों के अनुसार आरोग्य प्राप्ति के लिए नीम का पेड़ सुख की प्राप्ति लिए तुलसी का पौधा, संतान प्राप्ति के लिए केले का वृक्ष और धन सम्पदा के लिए आंवले का पौधा ही लगाए.
  • गेहूं, ज्वार, चना,मक्का, बाजरा की इस दिन प्रतीक के रूप में कुछ भाग पर बुवाई करे.

 

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