hariyali teej 2017 कब हैं| इसका महत्व और कथा

hariyali teej 2017-यह एक राजस्थानी संस्क्रति का त्यौहार हैं, इसे बरसात त्रतु में श्रावण महीने की शुक्ल तीज को मनाया जाता हैं, इस वर्ष तीज का त्यौहार 26 जुलाई बुधवार को मनाया जाना हैं, इस त्यौहार को शिव पार्वती से जोड़कर देखा जाता हैं. hariyali teej हरियाली और समर्धी का प्रतीक समझा जाता हैं. इस तीज को सुहागन औरत विशेष तौर पर मनाती हैं. हर राज्य में इसे मनाने का अपना अनोखा अंदाज हैं.

hariyali teej कब और कैसे मनाते हैं.

इस त्यौहार में घर की वृद्ध महिलाओ और कन्याओ से लेकर सभी स्त्रियाँ मनाती हैं, hariyali teej के दिन झुला झुलना इसका प्रतीक माना जाता हैं. इस दिन हाथ से लेकर पाँव तक मेहँदी लगाकर परिवार के बड़े बुढो का आशर्वाद लेना, एक सुहागन स्त्री के सुहाग के लिए सौभाग्यशाली समझा जाता हैं. कई राज्यों में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं.

झूले के हिलोरे के साथ सावन के लोकगीत हर घर गुजते हैं.

hariyali teej को मनाने के पीछे कई कारण और पौराणिक कथाए जुड़ी हुई हैं,

वैसे भी हिन्दू धर्म में मेहँदी को सुहाग का प्रतीक समझा जाता हैं.

सावन महिने को काम वासना की इच्छा जगाने वाले माह के रूप में भी कहा जाता हैं.

इसी कारण हाथो पर लगी मेहँदी इस प्रकार के विचारों को कम करने में मददगार रहती हैं,

साथ ही hariyali teej के व्रत के दिन गुस्सा करना ना जायज समझा जाता है.

इसके अतिरिक्त साँस माँ अपनी बहु को नए वस्त्र और मिठाई भी भेट करती हैं,

जो उनके कुल को बढाने और सुख समर्धि का प्रतीक समझा जाता हैं.

hariyali teej Katha In Hindi

जैसा कि आपकों उपर बताया था hariyali teej के पीछे भगवान् शंकर और पार्वतीजी की एक कथा को माना जाता हैं.

कहते हैं एक बार शिवजी ध्यान में मग्न हो गये थे. उनकी तपस्या सैकड़ो वर्षो तक निरंतर चला करती थी,

इस दौरान वे पल भी नही खोलते थे. तभी दोनों के निर्णय किया कि वे इन वर्षो तक अलग हो जाए.

एक बार शिवजी से बिछड़ने के बाद पार्वती जी शिवजी को पाने के लिए हजारे प्रयत्न करने लगी.

मगर वे न मिले इस दौरान पार्वती ने 107 जन्म लिए फिर भी भोले शंकर के दर्शन प्राप्त ना हो सके.

आखिर 108 वे जन्म में पार्वती को hariyali teej के दिन ही अपने परमेश्वर के दर्शन होते हैं.

इस दिन पार्वती ने शिवजी से वरदान माँगा कि जो कुवारी कन्याए इस दिन व्रत धारण करे

उन्हें उनका चाहां वर प्राप्त हो.

साथ ही जो सुहागन इस दिन व्रत रखे

उन्हें आजीवन सुहाग जिन्दा रहे और वैवाहिक जीवन का आनंद मिलता रहे.

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