ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया इतिहास और जीवनी | Hazrat Nizamuddin Auliya Story History Photo In Hindi

ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया इतिहास और जीवनी | Hazrat Nizamuddin Auliya Story History Photo In Hindi

nizamuddin auliya Chishti dargah qawwali photo quotes: सुन्नी इस्लाम धर्म से संबंध रखने वाले हजरत निज़ामुद्दीन औलिया का चिश्ती सम्प्रदाय के सूफी संतों में अग्रणी स्थान हैं। इनका जन्म 1236 के आसपास यूपी के बदायू में हुआ था। मुगल काल के प्रसिद्ध इस सूफी संत की जीवनी व इतिहास का वर्णन आइन ए अकबरी में वर्णित हैं जिसके अनुसार ५ साल की आयु में ही निजामुद्दीन औलिया के पिता अहमद बदायनी का निधन हो गया था। इनका लालन पोषण माँ बीबी जुलेखा द्वारा किया गया। औलिया ने अपना अधिकतर समय दिल्ली में ही बिताया तथा इनकी मृत्यु भी यही पर हुई थी दिल्ली में हजरत निज़ामुद्दीन औलिया का मकबरा (nizamuddin auliya dargah) दिल्ली में हैं। इनकी दरगाह का निर्माण अकबर के काल में वर्ष 1962 में सम्पूर्ण हुआ था। शेख हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह, पुस्तकें, nizam ad-din awliya, दरगाह हजरत निजामुद्दीन new delhi, delhi के बारे में जानकारी इस आर्टिकल में दी गई हैं।

ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया इतिहास और जीवनी

Hazrat Nizamuddin Auliya Story History Photo In Hindiख्वाजा निजामुद्दीन औलिया इतिहास और जीवनी | Hazrat Nizamuddin Auliya Story History Photo In Hindi

निजामुद्दीन औलिया का इतिहास (nizamuddin auliya history)

Hazrat Nizamuddin Auliya Story निजामुद्दीन औलिया इतिहास
नाम निज़ामुद्दीन औलिया
जन्म तिथि 1236
पूर्वाधिकारी फरीद्दुद्दीन गंजशकर (बाबा फरीद)
उत्तराधिकारी नसीरुद्दीन चिराग़ देहलवी
उपाधि महबुब-ए-इलाही
धर्म सुन्नी इस्लाम, सूफ़ी,
जन्म स्थान बदायुं, उत्तर प्रदेश
मृत्यु स्थान व दरगाह ३ अप्रैल, १३२५

निजामुद्दीन औलिया का जन्म और आरम्भिक जीवन (Birth and early life of Nizamuddin Auliya)

भारत में सूफी संतों में हजरत निजामुद्दीन औलिया का नाम प्रमुख हैं। जिनके नेतृत्व में में चिश्ती सिलसिले का भारत में विकास हुआ। एक विशेष धर्म का अनुयायी होते हुए भी औलिया में सामाजिक और धार्मिक कटटरता नहीं थी। हिन्दू मुसलमानों की एकता और समाज सुधार में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे मनुष्य मात्र की एकता के सच्चे प्रतीक थे।

हजरत निजामुद्दीन के विचार में संगीत ईश्वरीय प्रेम एवं सौंर्दय से साक्षात्कार कराने का अनूठा माध्यम हैं। भारतीय भक्ति भावना से भी सूफी परम्परा में संगीत को प्रोत्साहन मिला हैं। सल्तन कालीन प्रसिद्ध लेखक अमीर खुसरों इन्ही के शिष्य थे।

नई दिल्ली स्थित दरगाह परिसर में हजरत निजामुद्दीन औलिया की मजार के पास ही अमीर खुसरो की मजार भी हैं। सूफी मत में कई सम्प्रदाय हैं भारत में सिर्फ चार सम्प्रदाय का ही अधिक महत्व रहा हैं। यथा कादरी, चिश्ती, सुहरावर्दी तथा नक्शबंदी।

सूफियों और भक्ति संतो में बहुत समानताएं हैं जैसे गुरु का महत्व, नाम स्मरण, प्रार्थना, ईश्वर के प्रति प्रेम, व्याकुलता एवं विरह की स्थति, संसार की क्षण भंगुरता, जीवन की सरलता, सच्ची साधना, मानवता से प्रेम, ईश्वर की एकता तथा व्यापकता आदि भक्ति व सूफी दोनों ही आंदोलन का आधार रही हैं। भक्ति आंदोलन और सूफी मत दोनों ने ईश्वरीय प्रेम के द्वारा मानवता का मार्ग प्रशस्त किया हैं।

Hazrat Nizamuddin Auliya Dargah History Information In Hindi

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत थे। इनके बारे में किवदंती हैं कि एक बार इनके कहने पर १३ ०३ में दिल्ली सम्राट ने अपना आक्रमण रोक दिया था। दिल्ली सल्तनत का हरेक शासन उनकी आज्ञा का पालन करता था।

इस कारण आमजन में भी औलिया के प्रति गहरी श्रद्धा थी। देहांत ९२ वर्ष की आयु में दिल्ली में हुआ था, उनकी याद में आज वहां पर एक दरगाह हैं जहाँ पर जियारत के लिए हजारों लोग जाते है। जो भी जायरिन सच्ची श्रद्धा के साथ इस सूफी संत के दरबार में जाता हैं उनकी सारीं मन्नते कबूल हो जाती हैं।

इस दरगाह को १६ वीं सदी में संगमरमर के पत्थर से बनाया गया था। इस चौकोर दरगाह के गुबंद को काली लकीरों से उकेरा गया हैं जिसका मुख्य मकबरा मदर ऑफ पर्ल केनॉपी और डिजायनदार मेहराबों से घिरा हुआ हैं। इस्लाम की परम्परा के अनुसार जो भी भक्त मस्जिद अथवा दरगाह में प्रवेश करता हैं उन्हें सिर व कंधा ढ़कना चाहिए।

इस नियम का यहाँ भी कड़ाई से पालन किया जाता हैं। कव्वाली तथा सूफी गीत भजन इस दरगाह की अनूठी विशेषता हैं। सूफी संगीत की सरगम में शरीक होने के लिए सांय के समय आप हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह नई दिल्ली में जा सकते हैं यह दरगाह निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास ही स्थित हैं। जहाँ आवागमन के साधन सुलभता से मिल जाते हैं।

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